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Muzaffarnagar में साइबर ठगी से बचाव पर सेमिनार, छात्रों को समझाए UPI-OTP फ्रॉड से लेकर फिशिंग और सोशल मीडिया हैकिंग तक के खतरे

Muzaffarnagar । डिजिटल दौर में इंटरनेट और ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल जितना बढ़ा है, उतनी ही तेजी से साइबर अपराध के तरीके भी बदल रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए एस.डी. कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, भोपा रोड, मुजफ्फरनगर के कंप्यूटर एप्लीकेशन विभाग की ओर से विद्यार्थियों के लिए ‘साइबर जागरूकता अभियान’ विषय पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप, ऑनलाइन ठगी के तरीकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रहने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी देना था। सेमिनार में साइबर पुलिस से जुड़े अधिकारियों ने विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन में सामने आने वाले विभिन्न साइबर फ्रॉड के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया और यह भी समझाया कि थोड़ी सी सावधानी कई बड़ी वित्तीय और व्यक्तिगत क्षति से बचा सकती है।

मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

सेमिनार की शुरुआत मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित करके की गई। दीप प्रज्वलन श्रीमती इंदु सिद्धार्थ, एस.पी. क्राइम, मुजफ्फरनगर, श्री करमवीर सिंह, एस.ए.ओ., साइबर पुलिस स्टेशन, मुजफ्फरनगर, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संदीप मित्तल तथा डॉ. संजीव तायल ने संयुक्त रूप से किया।

कार्यक्रम में व्यापारिक सुरक्षा फोरम से जुड़े पदाधिकारी और अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। इनमें जिला अध्यक्ष विश्वदीप गोयल, जिला महामंत्री राजकुमार रहेजा, अधिवक्ता मनोज कुमार, मनोज गुप्ता, दीपक शर्मा, संजय अग्रवाल, अखिल सिंघल तथा राजीव गर्ग शामिल रहे।

साइबर अपराध के तरीके लगातार बदल रहे हैं

सेमिनार में मुख्य संसाधन व्यक्तियों के रूप में इंदु सिद्धार्थ और करमवीर सिंह ने विद्यार्थियों को साइबर अपराध के मौजूदा स्वरूप के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि इंटरनेट, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ने के साथ साइबर अपराधी भी ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में केवल तकनीक का इस्तेमाल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी की सुरक्षा को लेकर भी जागरूक रहना जरूरी है।

उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि साइबर अपराधी अक्सर लोगों की जल्दबाजी, डर या लालच का फायदा उठाते हैं। वे किसी व्यक्ति को तत्काल कार्रवाई करने के लिए मजबूर करते हैं और इसी दौरान उसकी गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं।

UPI और OTP फ्रॉड से कैसे बचें, छात्रों को दी जानकारी

सेमिनार में ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल भुगतान से जुड़े फ्रॉड पर विशेष चर्चा हुई। विद्यार्थियों को UPI फ्रॉड, OTP फ्रॉड, बैंकिंग धोखाधड़ी और क्रेडिट कार्ड फ्रॉड के बारे में उदाहरणों के साथ समझाया गया।

विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि किसी भी अनजान व्यक्ति को OTP, PIN, CVV, पासवर्ड, बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी, ATM या क्रेडिट कार्ड की जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

इसी तरह PAN जैसी व्यक्तिगत जानकारी भी अनजान लोगों के साथ साझा करने से बचने की सलाह दी गई।

विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी बैंक या अधिकृत संस्था के नाम पर फोन आने और गोपनीय जानकारी मांगने की स्थिति में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बैंकिंग संबंधी जानकारी साझा करने से पहले संबंधित संस्था के आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करना जरूरी है।

फिशिंग और संदिग्ध लिंक से रहें सावधान

सेमिनार में फिशिंग को भी साइबर ठगी का एक प्रमुख तरीका बताया गया। इसमें साइबर अपराधी अक्सर किसी विश्वसनीय संस्था, बैंक, कंपनी या व्यक्ति के नाम का इस्तेमाल कर फर्जी संदेश या ई-मेल भेज सकते हैं।

इन संदेशों में ऐसे लिंक दिए जा सकते हैं, जिन पर क्लिक करने के बाद उपयोगकर्ता को फर्जी वेबसाइट पर ले जाया जाता है। वहां उससे लॉगिन, बैंकिंग या अन्य संवेदनशील जानकारी मांगी जा सकती है।

संसाधन व्यक्तियों ने विद्यार्थियों को सलाह दी कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए संदिग्ध लिंक, फाइल, ई-मेल अटैचमेंट या अनजान डिजिटल कंटेंट को बिना जांचे न खोलें।

संदेह होने पर पहले संदेश या लिंक की वास्तविकता की पुष्टि करना जरूरी है।

फर्जी वेबसाइट और ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड भी बड़ा खतरा

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को फर्जी वेबसाइट और ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड के बारे में भी जानकारी दी गई। साइबर अपराधी कई बार वास्तविक कंपनियों जैसी दिखने वाली वेबसाइट या आकर्षक ऑफर के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि किसी वेबसाइट पर भुगतान करने या व्यक्तिगत जानकारी देने से पहले उसकी विश्वसनीयता जांचना जरूरी है। केवल कम कीमत या आकर्षक ऑफर देखकर जल्दबाजी में ऑनलाइन भुगतान करने से बचना चाहिए।

नौकरी और लोन के नाम पर भी हो रही ठगी

साइबर अपराधों के बदलते तरीकों के बारे में बताते हुए विद्यार्थियों को फर्जी नौकरी और लोन ऑफर से होने वाली ठगी के बारे में भी जानकारी दी गई।

साइबर अपराधी नौकरी दिलाने, घर बैठे कमाई कराने या आसानी से लोन उपलब्ध कराने के नाम पर लोगों से पहले फीस या दस्तावेजों के नाम पर पैसे मांग सकते हैं। कई मामलों में व्यक्तिगत जानकारी भी हासिल करने की कोशिश की जाती है।

विद्यार्थियों को सलाह दी गई कि नौकरी या लोन से संबंधित किसी भी ऑफर की विश्वसनीयता जांचे बिना भुगतान या दस्तावेज साझा न करें।

सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग से बचने के तरीके बताए

सेमिनार में सोशल मीडिया सुरक्षा को लेकर भी विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। संसाधन व्यक्तियों ने कहा कि सोशल मीडिया अकाउंट की सुरक्षा के लिए मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड रखना चाहिए।

जहां सुविधा उपलब्ध हो, वहां टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जैसी अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई।

इसके अलावा विद्यार्थियों को सोशल मीडिया अकाउंट की प्राइवेसी सेटिंग्स को सही तरीके से नियंत्रित करने और समय-समय पर उनकी समीक्षा करने की सलाह दी गई।

विशेषज्ञों ने कहा कि सोशल मीडिया पर मोबाइल नंबर, घर का पता, यात्रा की जानकारी और अन्य निजी विवरण सार्वजनिक रूप से साझा करने से बचना चाहिए।

व्यक्तिगत जानकारी साझा करने में बरतें सावधानी

साइबर अपराधी कई बार इंटरनेट पर उपलब्ध छोटी-छोटी जानकारियों को जोड़कर किसी व्यक्ति के बारे में पर्याप्त जानकारी जुटा लेते हैं। इसलिए विद्यार्थियों को अपनी निजी जानकारी को सार्वजनिक करने से पहले सावधानी बरतने की सलाह दी गई।

यात्रा से संबंधित जानकारी, लोकेशन, परिवार से जुड़ी जानकारी, मोबाइल नंबर या अन्य संवेदनशील विवरण सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करने से संभावित सुरक्षा जोखिम पैदा हो सकते हैं।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विशेषज्ञों की जिम्मेदारी नहीं है। सामान्य इंटरनेट यूजर भी अपनी आदतों में सावधानी बरतकर साइबर अपराध के जोखिम को कम कर सकता है।

साइबर अपराधी डर और लालच का उठाते हैं फायदा

इंदु सिद्धार्थ और करमवीर सिंह ने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि साइबर ठगी के मामलों में अपराधी अक्सर व्यक्ति की मनोवैज्ञानिक स्थिति का फायदा उठाते हैं।

कभी बैंक खाता बंद होने का डर दिखाया जाता है, कभी इनाम या कैशबैक का लालच दिया जाता है, तो कभी नौकरी, लोन या किसी जरूरी सेवा के नाम पर तत्काल कार्रवाई करने के लिए कहा जाता है।

ऐसे मामलों में सबसे महत्वपूर्ण बात है कि घबराकर या जल्दबाजी में कोई फैसला न लिया जाए। संदिग्ध कॉल, मैसेज या लिंक की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना साइबर ठगी से बचने में मदद कर सकता है।

शिक्षकों और अतिथियों ने भी लिया भाग

कार्यक्रम में महाविद्यालय के कई शिक्षक और अन्य सदस्य उपस्थित रहे। इनमें चन्दना दीक्षित, हिमांशु शर्मा, रजत शर्मा, हर्षित गोयल, हर्षिता, निरंकार शर्मा, नवनीत चौहान, अंकुर अग्रवाल, अनुज गोयल, रोबिन मलिक, शेखर, प्रशांत गुप्ता, विनीता चौधरी, अमित, सतीश, शशांक भारद्वाज, लवी वर्मा और पवन बालियान सहित अन्य शिक्षक शामिल रहे।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने साइबर सुरक्षा से जुड़े विषयों को समझा और डिजिटल प्लेटफॉर्म के सुरक्षित इस्तेमाल से संबंधित जानकारी प्राप्त की।

प्राचार्य डॉ. संदीप मित्तल ने बताया जागरूकता का महत्व

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संदीप मित्तल ने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के बीच इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करने से उन्हें साइबर अपराधों के संभावित तरीकों को पहचानने और उनसे बचने के व्यावहारिक उपाय समझने में मदद मिलती है।

उन्होंने डिजिटल तकनीक का सुरक्षित और जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करने पर जोर दिया।

साइबर सुरक्षा में छोटी सावधानी बन सकती है बड़ी सुरक्षा

सेमिनार में सामने आई जानकारी का मूल संदेश यही रहा कि साइबर अपराध से बचाव के लिए केवल तकनीकी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। डिजिटल दुनिया में रोजमर्रा की छोटी-छोटी सावधानियां भी महत्वपूर्ण हैं।

किसी अनजान व्यक्ति को OTP या PIN न देना, संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करना, मजबूत पासवर्ड रखना, सोशल मीडिया की प्राइवेसी सेटिंग्स नियंत्रित करना और किसी भी संदिग्ध डिजिटल ऑफर की पहले पुष्टि करना ऐसी बुनियादी सावधानियां हैं, जिनसे कई तरह के ऑनलाइन फ्रॉड से बचा जा सकता है।

कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, वक्ताओं और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया गया।

डिजिटल दुनिया में सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। एस.डी. कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज में आयोजित ‘साइबर जागरूकता अभियान’ सेमिनार में विद्यार्थियों को UPI, OTP, ऑनलाइन बैंकिंग, फिशिंग, सोशल मीडिया, फर्जी वेबसाइट, नौकरी और लोन के नाम पर होने वाली ठगी समेत कई साइबर अपराधों के बारे में जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने स्पष्ट संदेश दिया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, PIN, CVV, पासवर्ड या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें और संदिग्ध लिंक या अटैचमेंट खोलने से पहले उसकी विश्वसनीयता जरूर जांचें।

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