Farrukhabad में 21 साल बाद आया फैसला, 8 साल के बच्चे के अपहरण में दो दोषियों को उम्रकैद
Farrukhabad में 21 साल पुराने बालक के अपहरण के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र/अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र सचान ने आठ वर्षीय दिव्यांशु के अपहरण के मामले में दोषी पाए गए नत्थू और राजपाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने दोनों दोषियों पर दो-दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। यह मामला वर्ष 2005 का है, जब कक्षा दो में पढ़ने वाला आठ वर्षीय बच्चा स्कूल जाने के बाद घर वापस नहीं लौटा था। परिवार ने काफी तलाश की, जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी।
स्कूल गया था आठ साल का दिव्यांशु, फिर नहीं लौटा
मामला थाना जहानगंज क्षेत्र के नगला कन्हई गांव का है। दिव्यांशु के पिता विवेकानंद वर्मा ने 13 जनवरी 2005 को पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
उन्होंने पुलिस को बताया था कि उनका आठ वर्षीय बेटा दिव्यांशु सरस्वती शिशु मंदिर जहानगंज में कक्षा दो में पढ़ता था। 12 जनवरी को वह रोज की तरह स्कूल गया था, लेकिन छुट्टी होने के बाद घर वापस नहीं पहुंचा।
बेटे के घर नहीं लौटने पर परिवार परेशान हो गया। परिजनों ने अपने स्तर पर उसकी तलाश शुरू की, लेकिन काफी खोजबीन के बावजूद दिव्यांशु का कोई पता नहीं चला। इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई।
काले रंग की बाइक पर घूम रहे थे संदिग्ध
जांच के दौरान पुलिस को स्कूल से जुड़े लोगों से महत्वपूर्ण जानकारी मिली। स्कूल के प्रधानाचार्य संजीव कुमार ने बताया था कि घटना वाले दिन दोपहर करीब तीन बजे स्कूल के आसपास एक काले रंग की बिना नंबर वाली बाइक दिखाई दी थी।
प्रधानाचार्य के मुताबिक, बाइक पर बादाम सिंह के साथ दो अन्य लोग भी मौजूद थे। पुलिस ने इस जानकारी को जांच का हिस्सा बनाया और बालक को स्कूल से ले जाने की आशंका वाले लोगों के बारे में जानकारी जुटाई।
मामले की जांच आगे बढ़ी तो एक अन्य गवाह की जानकारी भी सामने आई।
चपरासी ने बच्चे को बाइक से ले जाते देखा था
विवेकानंद विद्यालय लोधीनगर के चपरासी अरविंद कुमार ने पुलिस को बताया था कि उसने बादाम सिंह के रिश्तेदार अखिलेश और राजपाल को दिव्यांशु को मोटरसाइकिल से छिबरामऊ की ओर ले जाते देखा था।
इस बयान के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज की। पुलिस को बच्चे के संबंध में सुराग मिलने लगे और आखिरकार 13 जनवरी 2005 को दिव्यांशु को बरामद कर लिया गया।
पुलिस के अनुसार, बालक को नत्थू के यहां से बरामद किया गया था। इसके बाद अपहरण के मामले में आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हुई।
दो जिलों से जुड़े थे आरोपी
पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद दो आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। इनमें जनपद कन्नौज के थाना तालग्राम क्षेत्र के नरदाह निवासी राजपाल और विशुनगढ़ थाना क्षेत्र के हृदय नगला निवासी नत्थू शामिल थे।
मामला अदालत में पहुंचने के बाद लंबे समय तक इसकी सुनवाई चली। इस दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों के बयान और मामले से जुड़े साक्ष्य अदालत के सामने रखे गए।
21 साल बाद अदालत ने सुनाया फैसला
करीब 21 साल पुराने इस मामले में अदालत ने गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी माना।
अदालत ने 3 अक्टूबर को नत्थू और राजपाल को दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई और अब विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र/अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र सचान ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
इसके साथ ही दोनों पर दो-दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
दो दशक से ज्यादा पुराने मामले में आया कानूनी अंजाम
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि घटना के करीब 21 साल बाद अदालत का फैसला आया। 2005 में जिस बच्चे के अचानक स्कूल से गायब होने के बाद परिवार में चिंता और डर का माहौल बना था, उसी मामले में अब अदालत ने दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।
फैसले के दौरान अदालत ने मामले में पेश किए गए गवाहों के बयान और साक्ष्यों को आधार बनाया। बालक की बरामदगी के बाद पुलिस ने विवेचना पूरी कर आरोपपत्र दाखिल किया था, जिसके आधार पर मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ी।

