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इमरान खान की रिहाई के लिए इस्लामाबाद कूच, पेशावर से 30 किमी दूर पहुंचा लॉन्ग मार्च; Shehbaz Sharif ने बातचीत का दिया न्योता

पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान लॉन्ग मार्च को लेकर राजनीतिक तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के समर्थक इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर खैबर पख्तूनख्वा से इस्लामाबाद की तरफ बढ़ रहे हैं। मार्च 4 अक्टूबर को शुरू हुआ था और इसके बाद सरकार ने राजधानी के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। 

मार्च के बीच प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने इमरान समर्थकों को बातचीत का न्योता दिया। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले सरकार और PTI के बीच बातचीत के दो दौर हो चुके थे, लेकिन किसी समझौते पर सहमति नहीं बनी थी। PTI की ओर से इमरान खान की रिहाई और उनकी मेडिकल सुविधाओं से जुड़ी मांगें प्रमुख रही हैं। 

पेशावर की ओर बढ़ता मार्च, राजधानी पर सरकार की नजर

PTI का यह मार्च खैबर पख्तूनख्वा से आगे बढ़ रहा है। इसका नेतृत्व प्रांत के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी कर रहे हैं। पार्टी समर्थक इस्लामाबाद पहुंचकर इमरान खान की रिहाई की मांग को जोरदार तरीके से उठाना चाहते हैं।

रॉयटर्स के मुताबिक, मार्च में हजारों समर्थक शामिल हुए हैं, जबकि PTI ने रास्ते में बड़ी संख्या में लोगों के जुड़ने की उम्मीद जताई है। सरकार ने इस्लामाबाद में प्रदर्शनकारियों के प्रवेश को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी है।

पाकिस्तान की सरकार के लिए चुनौती सिर्फ मार्च की संख्या नहीं है। 2023 के बाद PTI के प्रदर्शनों का रिकॉर्ड हिंसा और व्यापक गिरफ्तारियों से भी जुड़ा रहा है। इसी वजह से राजधानी में सुरक्षा को लेकर सरकार विशेष सतर्कता बरत रही है। 

शहबाज शरीफ ने अचानक क्यों दिया बातचीत का प्रस्ताव?

मार्च के आगे बढ़ने के बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का बातचीत का प्रस्ताव खास चर्चा में है। PTI और सरकार के बीच पहले ही बातचीत हो चुकी थी, लेकिन दोनों पक्ष किसी साझा समाधान तक नहीं पहुंच पाए।

PTI की प्रमुख मांगों में इमरान खान से तत्काल मुलाकात और उन्हें ऐसे अस्पताल में स्थानांतरित करना शामिल रहा है, जहां उनके निजी डॉक्टर उनकी जांच और इलाज कर सकें। सरकार की ओर से प्रदर्शन रोकने की शर्त रखे जाने की वजह से बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। 

अब सड़क पर बढ़ते प्रदर्शन के बीच बातचीत का नया प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक PTI ने अपनी मांगों से पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं।

शहबाज सरकार का तर्क- प्रदर्शन से अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर असर

शहबाज शरीफ सरकार लगातार यह कहती रही है कि पाकिस्तान को राजनीतिक अस्थिरता के बजाय आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा पर ध्यान देने की जरूरत है। सरकार का कहना है कि देश पहले से आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियों से गुजर रहा है और लंबे समय तक चलने वाला आंदोलन स्थिति को और जटिल कर सकता है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस्लामाबाद में प्रदर्शनकारियों को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। राजधानी की तरफ जाने वाले रास्तों पर बैरिकेड और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

PTI दूसरी तरफ इसे इमरान खान की रिहाई और राजनीतिक अधिकारों से जोड़कर देख रही है। इस कारण बातचीत और सड़क पर आंदोलन—दोनों समानांतर रूप से चल रहे हैं।

इमरान खान 2023 से जेल में, परिवार भी बना आंदोलन का हिस्सा

73 वर्षीय इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। उनके खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए हैं और अलग-अलग मामलों में उन्हें सजाएं भी सुनाई गई हैं। हालांकि, उनकी कई सजाओं पर बाद में रोक लगी या वे पलट दी गईं। वर्तमान राजनीतिक संघर्ष का बड़ा हिस्सा उनके समर्थकों की इस मांग के आसपास केंद्रित है कि उन्हें जेल से बाहर आना चाहिए।

इमरान खान की जेल स्थिति को लेकर उनकी पार्टी और परिवार ने स्वास्थ्य तथा मुलाकातों से जुड़े आरोप लगाए हैं। सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि इमरान को पर्याप्त चिकित्सकीय सुविधा और मुलाकातों की अनुमति दी गई है। अगस्त में सरकार ने कहा था कि इमरान की सेहत ठीक है और उन्हें उचित चिकित्सा देखभाल मिल रही है। 

यानी इस मुद्दे पर भी दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। PTI जहां मेडिकल और जेल सुविधाओं को लेकर सवाल उठाती रही है, वहीं सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है।

इमरान की तीनों बहनें भी हिरासत में ली गई थीं

इमरान खान की रिहाई के आंदोलन में उनके परिवार के सदस्य भी सक्रिय रहे हैं। सितंबर में उनकी तीन बहनों—अलीमा खान, उज़मा खान और नोरीन नियाजी—को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में 30 दिनों के लिए हिरासत में लिया गया था। कार्रवाई Maintenance of Public Order कानून के तहत की गई थी। 

पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन हिरासतों को सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ा कदम बताया, जबकि PTI और परिवार ने कार्रवाई का विरोध किया। इन हिरासत आदेशों को लाहौर हाई कोर्ट में चुनौती भी दी गई थी। 

इन घटनाओं ने इमरान समर्थकों और सरकार के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ाया था।

सरकार और PTI के बीच पहले भी हुई बातचीत

इस्लामाबाद की तरफ मार्च शुरू होने से पहले सरकार और PTI के बीच बातचीत के दो दौर हुए थे। दोनों पक्षों के बीच इमरान खान की जेल स्थिति, मुलाकात और मेडिकल उपचार सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन कोई अंतिम समझौता नहीं बन पाया।

रॉयटर्स के अनुसार, बातचीत टूटने के बाद PTI ने मार्च शुरू करने का फैसला किया। सरकार ने भी राजधानी में सुरक्षा बढ़ाकर साफ कर दिया कि प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद में प्रवेश देने को लेकर उसका रुख सख्त है।

मार्च रोकने के लिए राजधानी में कड़ी सुरक्षा

सरकार ने इस्लामाबाद और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। राजधानी की तरफ जाने वाले रास्तों पर बैरिकेड लगाए गए हैं और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है।

पाकिस्तानी अधिकारियों को आशंका है कि यदि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी राजधानी तक पहुंचते हैं तो स्थिति तनावपूर्ण हो सकती है। पिछले वर्षों में PTI के प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, इसलिए इस बार प्रशासन पहले से ही सुरक्षा तैयारियों पर जोर दे रहा है। 

PTI की ओर से हालांकि आंदोलन को इमरान खान की रिहाई की मांग से जोड़ा गया है और समर्थकों को राजधानी तक पहुंचने के लिए लामबंद किया जा रहा है।

क्या बातचीत से निकलेगा रास्ता या बढ़ेगा टकराव?

इस समय पाकिस्तान की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार और PTI के बीच बातचीत का नया प्रयास किसी समझौते तक पहुंचता है या सड़क पर चल रहा आंदोलन और आगे बढ़ता है। शहबाज शरीफ सरकार के लिए चुनौती यह है कि वह एक तरफ राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखे और दूसरी तरफ राजनीतिक तनाव को बढ़ने से रोके।

PTI के लिए भी यह आंदोलन महत्वपूर्ण है, क्योंकि पार्टी इसे इमरान खान की रिहाई की मांग के समर्थन में बड़े राजनीतिक प्रदर्शन के रूप में आगे बढ़ा रही है।

पाकिस्तान में इमरान खान लॉन्ग मार्च ने सरकार और PTI के बीच पहले से चल रहे राजनीतिक तनाव को फिर सड़क पर ला दिया है। एक तरफ समर्थक इमरान खान की रिहाई की मांग पर आगे बढ़ रहे हैं, वहीं शहबाज शरीफ सरकार राजधानी में सुरक्षा कड़ी कर बातचीत का रास्ता भी खोल रही है। अब आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकाल पाते हैं या मार्च इस्लामाबाद तक पहुंचकर राजनीतिक टकराव को और बढ़ाता है।

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