पाकिस्तान-तालिबान दोस्ती पर Khawaja Asif का कबूलनामा, बोले- ‘बहुत बड़ी गलती थी’; अफगान पत्रकार को दिया अजीब जवाब
News-Desk
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लेकिन असली चर्चा सिर्फ इस बयान की नहीं है।
न्यूयॉर्क में एक अफगान महिला पत्रकार ने जब ख्वाजा आसिफ से अफगान महिलाओं और तालिबान की नीतियों को लेकर सवाल किया, तो रक्षा मंत्री का जवाब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। सवाल गंभीर था, लेकिन जवाब के दौरान आसिफ ने महिला के कपड़ों की ओर इशारा किया और फिर गला काटने जैसा इशारा करते हुए कहा—‘वहां ऐसे मत जाना।’
अब इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि तालिबान की महिलाओं के प्रति नीतियों पर पूछे गए गंभीर सवाल का जवाब क्या इस अंदाज में दिया जाना चाहिए था।
और सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसी बातचीत में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री अपने देश और तालिबान की पुरानी दोस्ती को भी ‘बहुत बड़ी गलती’ बता रहे थे।
तालिबान से दोस्ती… और अब पछतावा?
कहानी थोड़ी दिलचस्प है।
जब 2021 में तालिबान ने अफगानिस्तान में दोबारा सत्ता संभाली थी, तब पाकिस्तान के लिए यह घटनाक्रम रणनीतिक रूप से फायदेमंद माना गया था। तालिबान के साथ पाकिस्तान के पुराने संपर्क और संबंधों को देखते हुए इस सत्ता परिवर्तन को इस्लामाबाद में अलग नजरिए से देखा गया।
लेकिन कुछ ही समय में तस्वीर बदलने लगी।
जिस तालिबान को कभी पाकिस्तान अपने लिए रणनीतिक लाभ के रूप में देख रहा था, उसी के साथ सीमा विवाद, सुरक्षा और आतंकवाद को लेकर तनाव बढ़ने लगा।
अब ख्वाजा आसिफ खुद कह रहे हैं कि तालिबान से दोस्ती करना पाकिस्तान की बहुत बड़ी गलती थी।
यानी पुरानी दोस्ती की फाइल अब शायद पाकिस्तान में ‘गलत फैसला’ वाले कॉलम में पहुंच चुकी है।
TTP ने बिगाड़ दिए पाकिस्तान-तालिबान के रिश्ते
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव का सबसे बड़ा मुद्दा तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP है।
पाकिस्तान का आरोप है कि TTP के लड़ाके अफगानिस्तान में ठिकाने बनाकर पाकिस्तान के अंदर हमले करते हैं। इस्लामाबाद लगातार तालिबान सरकार से इन समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करता रहा है।
दूसरी तरफ तालिबान इन आरोपों से इनकार करता है।
यहीं से मामला और उलझ जाता है।
पाकिस्तान कहता है कि हमले अफगानिस्तान से संचालित नेटवर्क से जुड़े हैं, जबकि तालिबान पाकिस्तान के आरोपों को स्वीकार नहीं करता। नतीजा यह है कि दोनों देशों के बीच भरोसा लगातार कमजोर हुआ है।
जिस रिश्ते को कभी सहयोग और रणनीतिक साझेदारी के नजरिए से देखा जाता था, उसमें अब आरोप, जवाबी कार्रवाई और सीमा तनाव ज्यादा दिखाई दे रहा है।
अफगान पत्रकार ने पूछा महिलाओं पर सवाल, जवाब में मिला ‘वहां ऐसे मत जाना’
न्यूयॉर्क में अफगान महिला पत्रकार ने ख्वाजा आसिफ से सीधा सवाल किया।
सवाल था कि तालिबान अफगान महिलाओं के अधिकारों को लेकर जिस तरह की नीतियां लागू कर रहा है, उस पर पाकिस्तान का क्या संदेश है? साथ ही पत्रकार ने पूछा कि जब पाकिस्तान तालिबान के करीब था, तब उसने महिलाओं के अधिकारों को लेकर उसे समझाने की कोशिश क्यों नहीं की?
सवाल का जवाब देते हुए ख्वाजा आसिफ ने पहले महिला पत्रकार के कपड़ों की ओर इशारा किया।
इसके बाद उन्होंने गला काटने जैसा इशारा किया और कहा—‘वहां ऐसे मत जाना।’
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
कुछ लोगों का कहना है कि सवाल अफगान महिलाओं के अधिकारों और तालिबान की नीतियों पर था, इसलिए जवाब भी उसी मुद्दे पर होना चाहिए था। वहीं, कुछ लोग मंत्री के अंदाज और कथित मजाकिया लहजे को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
तालिबान की महिलाओं वाली नीति पर सवाल था, लेकिन जवाब में कपड़ों की चर्चा क्यों?
यही इस पूरे वीडियो का सबसे ज्यादा चर्चा वाला हिस्सा है।
अफगानिस्तान में महिलाओं की शिक्षा, रोजगार, सार्वजनिक जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों को लेकर लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय बहस चलती रही है। ऐसे में किसी अफगान महिला पत्रकार का सवाल इसी व्यापक मुद्दे से जुड़ा था।
लेकिन ख्वाजा आसिफ का जवाब सवाल के मूल राजनीतिक और सामाजिक हिस्से से हटकर सुरक्षा और व्यक्तिगत पहनावे की ओर चला गया।
उनका इशारा मूल रूप से यह बताने के लिए था कि अफगानिस्तान में किस तरह के कपड़ों को लेकर खतरा हो सकता है। मगर सोशल मीडिया के दौर में कुछ सेकंड का वीडियो भी पूरी बहस का केंद्र बन जाता है।
और यहां भी वही हुआ।
एक तरफ ‘दोस्ती गलती थी’, दूसरी तरफ दोस्ती की कीमत
ख्वाजा आसिफ का तालिबान को लेकर बयान पाकिस्तान की मौजूदा परेशानी को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
पाकिस्तान और तालिबान के बीच वैचारिक और ऐतिहासिक नजदीकी के बावजूद अब सुरक्षा हितों को लेकर टकराव सामने आ रहा है।
पाकिस्तान का कहना है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल उसके खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होना चाहिए।
तालिबान इस आरोप को स्वीकार नहीं करता।
इस खींचतान में सीमा विवाद भी जुड़ जाता है।
डूरंड लाइन ने भी बढ़ाया तनाव
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड लाइन का विवाद नया नहीं है।
सीमा पर बाड़ लगाने, चौकियां बनाने और लोगों तथा वाहनों की आवाजाही को लेकर दोनों देशों के बीच कई बार तनाव और झड़पें हो चुकी हैं।
पाकिस्तान डूरंड लाइन को अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में मानता है, जबकि अफगान पक्ष की ओर से इस सीमा को लेकर लंबे समय से अलग रुख रहा है।
यही वजह है कि दोनों देशों के बीच तनाव सिर्फ आतंकवाद तक सीमित नहीं है। सीमा प्रबंधन का मुद्दा भी रिश्तों में लगातार खटास पैदा करता रहा है।
अब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में किए हमले
तनाव सिर्फ बयानों तक नहीं रहा।
दी गई जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान ने गुरुवार तड़के अफगानिस्तान में करीब 10 स्थानों पर हवाई और ड्रोन हमले किए।
पाकिस्तान का कहना है कि ये कार्रवाई अफगानिस्तान की तरफ से एक दिन पहले भेजे गए ड्रोन हमले के जवाब में की गई।
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के मुताबिक, जिन स्थानों को निशाना बनाया गया, वहां ड्रोन रखे और लॉन्च किए जाते थे। उनका कहना था कि कार्रवाई उन ठिकानों तक सीमित रखी गई जिनका पाकिस्तान पर हुए हमलों से संबंध था।
यानी इस्लामाबाद का तर्क साफ है—पहले हमला, फिर जवाबी कार्रवाई।
लेकिन अफगानिस्तान की कहानी अलग है।
अफगानिस्तान ने कहा—यह खुली आक्रामकता है
अफगान सरकार ने पाकिस्तान के हमलों की कड़ी आलोचना की है।
अफगान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने दावा किया कि इन हमलों में चार अफगान नागरिकों की मौत हुई।
उन्होंने पाकिस्तान की कार्रवाई को खुली आक्रामकता और अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान को इसके ‘गंभीर नतीजे’ भुगतने की चेतावनी भी दी।
इस तरह एक तरफ पाकिस्तान अपने हमलों को सुरक्षा और जवाबी कार्रवाई के रूप में पेश कर रहा है, तो दूसरी तरफ अफगानिस्तान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बता रहा है।
दोनों पक्षों के दावे फिलहाल एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत हैं।
तालिबान को दोस्त बनाकर अब दुश्मनी क्यों?
पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस तालिबान के साथ कभी करीबी संबंधों को रणनीतिक लाभ के रूप में देखा गया, उसी के साथ अब तनाव इतना बढ़ क्यों गया?
इसका एक बड़ा कारण सुरक्षा है।
पाकिस्तान चाहता है कि अफगानिस्तान की जमीन से उसके खिलाफ किसी भी तरह की आतंकवादी गतिविधि न हो। लेकिन TTP को लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
इसके साथ सीमा विवाद जुड़ता है। फिर सीमा पर सैनिकों की तैनाती, बाड़ और चौकियों को लेकर विवाद होते हैं।
और जब बातचीत से मामला नहीं सुलझता, तो सीमा पर गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई का खतरा बढ़ जाता है।
यानी पुरानी दोस्ती के ऊपर अब सुरक्षा और सीमा विवाद भारी पड़ते दिखाई दे रहे हैं।
ख्वाजा आसिफ का बयान इसलिए भी चर्चा में है
ख्वाजा आसिफ का ‘बहुत बड़ी गलती’ वाला बयान सिर्फ एक राजनीतिक टिप्पणी के तौर पर नहीं देखा जा रहा। यह पाकिस्तान और तालिबान के बदलते रिश्तों की दिशा भी दिखाता है।
2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद पाकिस्तान ने जिस घटनाक्रम को अपने लिए लाभदायक समझा था, कुछ साल बाद वही रिश्ता सुरक्षा चुनौती के रूप में सामने आ रहा है—कम से कम पाकिस्तान के मौजूदा आरोपों और बयानों से यही तस्वीर सामने आती है।
लेकिन यहां एक विडंबना भी है।
तालिबान के साथ रिश्ते पर गंभीर राजनीतिक सवाल चल रहा था, अफगान महिलाओं के अधिकारों पर सवाल पूछा गया और पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने जवाब में ऐसा इशारा कर दिया कि पूरा वीडियो ही सोशल मीडिया की बहस बन गया।
पाकिस्तान के लिए अब आगे की राह आसान नहीं
पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों के लिए सीमा पर बढ़ता तनाव चुनौतीपूर्ण है।
अगर TTP को लेकर पाकिस्तान की चिंताएं बनी रहती हैं और तालिबान उन्हें स्वीकार नहीं करता, तो दोनों देशों के बीच भरोसा और कमजोर हो सकता है।
दूसरी तरफ सैन्य कार्रवाई और हवाई हमलों से तनाव और बढ़ने की संभावना रहती है। अफगानिस्तान पहले ही पाकिस्तान को गंभीर परिणामों की चेतावनी दे चुका है।
ऐसे में मामला सिर्फ दो पड़ोसी देशों के बीच बयानबाजी तक सीमित नहीं रह जाता। सीमा पर किसी भी नई सैन्य कार्रवाई का असर दोनों देशों के नागरिकों, व्यापार और सीमा पार आवाजाही पर भी पड़ सकता है।
दोस्ती का हिसाब अब मिसाइलों और बयानों में
ख्वाजा आसिफ ने तालिबान से दोस्ती को पाकिस्तान की ‘बहुत बड़ी गलती’ बताया है। वहीं, उसी समय पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हवाई हमले, ड्रोन, TTP और डूरंड लाइन जैसे मुद्दे तनाव बढ़ा रहे हैं।
एक समय जिस रिश्ते में रणनीतिक नजदीकी दिखाई देती थी, आज उसी में आरोप-प्रत्यारोप और सैन्य कार्रवाई की खबरें सामने आ रही हैं।
और ऊपर से न्यूयॉर्क में अफगान महिला पत्रकार के सवाल पर ख्वाजा आसिफ का वह जवाब—कपड़ों की ओर इशारा, फिर गला काटने का संकेत और ‘वहां ऐसे मत जाना’—अब पूरे मामले में एक अलग ही चर्चा जोड़ चुका है।
कहानी का सबसे बड़ा व्यंग्य शायद यही है—तालिबान से दोस्ती ‘बहुत बड़ी गलती’ थी, लेकिन उस गलती का हिसाब अभी भी सीमा पर ड्रोन, हवाई हमलों और बयानों के जरिए चुकाया जा रहा है।

