Muzaffarnagar में ₹1.01 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा, निवेश पर मोटे मुनाफे का झांसा देने वाला एक और आरोपी गिरफ्तार
Muzaffarnagar । सोशल मीडिया पर दोस्ती कर ऑनलाइन निवेश में मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर 1 करोड़ 1 लाख 2 हजार रुपये की साइबर ठगी करने के मामले में मुजफ्फरनगर साइबर क्राइम पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, पीड़ित को फर्जी वेबसाइट पर करोड़ों रुपये का लाभ दिखाकर अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराई गई थी। ठगी की गई धनराशि में से 27 लाख 29 हजार रुपये फ्रीज कराए जा चुके हैं और यह रकम पीड़ित के खाते में वापस कराने की कार्रवाई जारी है।
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में अब तक कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। ताजा गिरफ्तारी के बाद पुलिस मामले में शामिल अन्य लोगों, बैंक खातों और कथित निवेश नेटवर्क की भूमिका की जांच कर रही है। यह कार्रवाई बढ़ते साइबर अपराधों की रोकथाम और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई।
फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर शुरू हुई ठगी
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता को फेसबुक पर एक फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली थी। रिक्वेस्ट भेजने वाली ने अपनी पहचान गीतिका कपूर उर्फ ‘जीजी’ के रूप में बताई। बातचीत बढ़ने के साथ कथित तौर पर विश्वास और भावनात्मक संबंध बनाए गए। इसके बाद पीड़ित को ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश के जरिए अधिक लाभ कमाने का लालच देकर डीजीएक्ससी नाम की वेबसाइट पर निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया।
जांच के मुताबिक, आरोपियों ने व्हाट्सएप ग्रुप और निवेश से जुड़े संदेशों के जरिए पीड़ित का भरोसा जीतने की कोशिश की। वेबसाइट पर निवेश की रकम के बदले भारी मुनाफा दिखाया जाता था, जिससे पीड़ित को लगा कि उसके पैसे तेजी से बढ़ रहे हैं। इसी भरोसे में उसने अलग-अलग तारीखों पर विभिन्न बैंक खातों में कुल 1,01,02,000 रुपये जमा करा दिए।
पैसे निकालने की बारी आई तो नए शुल्क के नाम पर मांगी रकम
पुलिस के अनुसार, वेबसाइट पर पीड़ित को करोड़ों रुपये का कथित लाभ दिखाई देने लगा था। लेकिन जब उसने अपनी रकम और मुनाफा निकालने का प्रयास किया, तो आरोपियों ने कथित तौर पर कई तरह की प्रक्रियाओं का हवाला देकर और पैसे जमा कराने का दबाव बनाया। इनमें ‘फाइनल वेरिफिकेशन’, ‘डेटा रिपेयरिंग’ और ‘एंटी मनी लॉन्ड्रिंग प्रोसेस’ जैसे नाम शामिल थे।
हर बार नई प्रक्रिया का हवाला देकर अतिरिक्त रकम मांगे जाने के कारण पीड़ित को संदेह हुआ। इस तरह निवेश के नाम पर जमा कराई गई बड़ी धनराशि वापस नहीं मिल सकी। पुलिस मामले की जांच कर रही है। ऐसे मामलों में फर्जी वेबसाइट पर दिखने वाला मुनाफा वास्तविक कमाई का प्रमाण नहीं होता; यह लोगों को अधिक पैसा जमा कराने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक ठगी की तकनीक हो सकती है।
सहारनपुर का फुजैल उर्फ फैजुल गिरफ्तार
मुजफ्फरनगर पुलिस के मुताबिक, इस मामले में गिरफ्तार आरोपी की पहचान फुजैल उर्फ फैजुल पुत्र जियाउलहक के रूप में हुई है। वह सहारनपुर जिले के गंगोह कस्बे और थाना क्षेत्र का निवासी बताया गया है। पुलिस ने उसे साइबर ठगी के इस मामले में गिरफ्तार किया है।
इससे पहले इसी मुकदमे में अब्दुल कादीर पुत्र अब्दुल कुद्दुस, मोहम्मद आकिब अली, निखिल त्रिपाठी, बलवंत जायसवाल, मोहित कुमार और शहनवाज उर्फ गुड्डू को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। पुलिस के अनुसार, ताजा गिरफ्तारी के बाद इस प्रकरण में गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या सात हो गई है। मामले में प्रत्येक आरोपी की भूमिका का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।
27.29 लाख रुपये फ्रीज, पीड़ित को वापस दिलाने की प्रक्रिया जारी
पुलिस ने बताया कि ठगी गई रकम में से 27 लाख 29 हजार रुपये फ्रीज कराए गए हैं। इस धनराशि को पीड़ित के खाते में वापस कराने की कार्रवाई चल रही है। हालांकि, रकम फ्रीज होने और पीड़ित के खाते में वास्तव में वापस पहुंचने के बीच अंतर है। पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, वापसी की प्रक्रिया अभी प्रचलित है।
इस मामले में बड़ी धनराशि कई बैंक खातों में जमा कराई गई थी। साइबर ठगी की जांच में ऐसे खातों की पहचान, धन के लेन-देन का पता लगाना और उपलब्ध रकम को समय रहते फ्रीज कराना महत्वपूर्ण होता है। पुलिस की आगे की कार्रवाई से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितनी रकम वापस मिल पाती है और कथित नेटवर्क में अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।
एसएसपी के पर्यवेक्षण में साइबर क्राइम पुलिस की कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुजफ्फरनगर सूरज कुमार राय के पर्यवेक्षण में की गई। पुलिस अधीक्षक अपराध इंदु सिद्धार्थ, क्षेत्राधिकारी अपराध सुभाष चंद्र और थाना साइबर क्राइम के प्रभारी निरीक्षक कर्मवीर सिंह के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई की।
गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक कर्मवीर सिंह, उपनिरीक्षक मुबारिक हसन, हेड कांस्टेबल बालकिशन और कांस्टेबल गजेंद्र सिंह शामिल रहे। पुलिस ने बढ़ते साइबर अपराधों के मद्देनजर ऑनलाइन निवेश से जुड़े मामलों में सतर्क रहने और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने की अपील की है।
ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी से कैसे बचें?
सोशल मीडिया पर अनजान व्यक्ति से दोस्ती होने के बाद यदि वह शेयर ट्रेडिंग, क्रिप्टोकरेंसी या किसी अन्य ऑनलाइन निवेश में असाधारण मुनाफे का दावा करे, तो सावधानी बरतना जरूरी है। व्हाट्सएप ग्रुप में दिखाई जाने वाली कमाई, स्क्रीनशॉट या वेबसाइट पर दिखता बड़ा बैलेंस अपने आप में निवेश की विश्वसनीयता साबित नहीं करता।
निवेश करने से पहले संबंधित कंपनी और वित्तीय सेवा प्रदाता की वैधता की स्वतंत्र रूप से जांच करें। यदि पैसे निकालने के लिए बार-बार वेरिफिकेशन, टैक्स, डेटा सुधार या अन्य शुल्क के नाम पर अतिरिक्त रकम मांगी जाए, तो भुगतान करने से पहले रुकें और आधिकारिक माध्यम से जांच कराएं। साइबर ठगी होने पर जल्द से जल्द राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। बैंक को भी तत्काल सूचना दें, ताकि लेन-देन रोकने या रकम फ्रीज कराने की संभावना बढ़ सके।
मुजफ्फरनगर में 1.01 करोड़ रुपये की कथित ऑनलाइन निवेश ठगी के मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। अब तक सात गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और 27.29 लाख रुपये फ्रीज कराकर पीड़ित को वापस दिलाने की प्रक्रिया जारी है। यह मामला बताता है कि सोशल मीडिया पर दोस्ती और मोटे मुनाफे के वादे के जरिए लोगों को बड़ी आर्थिक ठगी का शिकार बनाया जा सकता है।

