देश को अस्थिर करने के साथ गृहयुद्ध की और धकेलने में लगें हैं विपक्षी दल- विश्व हिंदू महासंघ के राष्ट्रीय सचिव Pramod Tyagi
विश्व हिंदू महासंघ के राष्ट्रीय सचिव Pramod Tyagi ने बताया कि जिस प्रकार कोरोना काल में गैर भाजपा शाशित प्रदेशों में कृत्रिम ऑक्सीजन की कमी, वैक्सीन की उपलब्धता की कमी का नाटक कर केंद्र सरकार को दबाव में लेने का प्रयास किया गया था उसी प्रकार से आज कोयले की कृत्रिम कमी दिखाने के चलते सरकार पर अनावश्यक रूप से दबाव बनाने का प्रयास टूलकिट गैंग का हिस्सा तो नहीं हैं।
उन्होंने बताया कि बिजली उत्पादन में कोयले के महत्व को सभी भली प्रकार से जानते हैं और यह भी ध्यान देने योग्य हैं कि सबसे अधिक कोयला उत्पादक राज्य झारखंड, ओडिसा, छत्तीसगढ़, प• बंगाल है, और वहा पर गैर-भाजपाई सरकार है।जिनका एकसुत्रीय कार्यक्रम भाजपा सरकार का विरोध करना और ये केन प्रकारेण केंद्र सरकार को अस्थिर करना है।
वोट के लालच में फ्री बिजली देने वाले राज्य- दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, तीनों गैर-भाजपाई शासित।श्री त्यागी ने बताया कि कोयले की कमी की नौटंकी की जानकारी कई माह पहले से थी, आप यकीन नही करेंगे पर ये भी टूलकिट का ही हिस्सा है, सरकार विरोधी माहौल बनाने के लिए।
जब सारे पैंतरे आजमाकर हार गए हैं तो कुछ नई योजनाओं पर काम शुरू हुआ है, जिनमें दंगे भड़काना और मूलभूत आवश्यकताओं की कमी कर के ठीकरा सरकार पर फोड़ना। दंगे भड़कने से कोर वोटर भाजपा से दूर होगा, जैसा वोटर का स्वभाव है और मूलभूत आवश्यकताओं की कमी पर नया वोटर जो जुड़ा है वो दूर होगा।
अब आते हैं कोयले पर, तो ये बात सभी को मालूम है कि गर्मियों में बिजली की खपत काफी बढ़ जाती है, ऐसे में बिजली की कमी होना या कटौती होना बड़ी बात नही है, आज से 10-15 वर्ष पहले तक हमने राजधानी में 15 से 20 घंटे की कटौती झेली जो, जो पिछले 5-7 वर्षों से देखने को नही मिली है।
अभी भी महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब जैसे राज्यों का बिजली कंपनियों पर लाखों करोड़ बकाया पड़ा है, महाराष्ट्र सरकार तो सुप्रीम कोर्ट में केस तक हार चुकी है और उसे भुगतान करना ही करना है, उसके बाद भी ये लोग बिजली खर्च कर रहे है और पेमेंट नही कर रहे हैं।
नई नौटंकी ये आयी है कि पावर प्लांट में कोयले की कमी करो, हाल ही में 2-3 कोयले से भरी मालगाड़ी पलट चुकी हैं, जो विद्युत उत्पादन के लिए उपयोग होने वाले कोयले को ही ले जा रही थी। हो सकता है कि ये हादसे ही हों, पर ये भी हो सकता है कि ये हादसे करवाये गये हों, क्योंकि डेडिकेट फ्रेट कॉरिडोर पर गाड़ी पलटना अपने आप मे कई प्रश्न खड़े करता है।
ये सब इसीलिए किया जा रहा है कि किसी तरह तो लोगों का मोदी सरकार से मोहभंग हो, किसी तरह तो वे उनसे दूर हों और 2024 को लेकर थोड़ी उम्मीद दिखाई दे।
पर विपक्ष के लिए ऐसा होगा नही, सभी बाधाओं को पार किया जाएगा, बिजली की आर्टिफिशियल समस्या उत्पन्न करने की जो प्लानिंग हो रही है न वह भी सफल नही होगी।
एक बार कोयले को ऑक्सीजन समझो और अप्रैल 2021 में कोरोना की दूसरी लहर याद करो। सारा खेल समझ में आ जायेगा।
जनता अब सब कुछ समझती है, ये 10 वर्ष पहले वाला भारत नही है अब जनता की समझ में तो नाटक आ रहा है, लेकिन अभी भी विपक्षी दलों के लोकलुभावन वायदों के मायाजाल में वोटरों को जकड़ लिया जाता हैं, फ्री बिजली , फ्री पानी के चक्कर में पड़ कर भोली भाली जनता को फ्री लूटपाट, फ्री दंगे के साथ साथ खून पसीने की कमाई भी विधर्मियों व जेहादियों को सौंप दी जाएंगी।

