Panchbali Bhog in Pitru Paksha : पितृपक्ष में क्यों जरूरी है पंचबली भोग?
Panchbali Bhog: श्राद्ध यदि विधिवत किया जाए तो वह पितरों तक निश्चित रूप से पहुंचता है। मान्यता है कि इन पंचबलि के मुख से सीधे पितरों को भोजन मिलता है।
Read more...Panchbali Bhog: श्राद्ध यदि विधिवत किया जाए तो वह पितरों तक निश्चित रूप से पहुंचता है। मान्यता है कि इन पंचबलि के मुख से सीधे पितरों को भोजन मिलता है।
Read more...Lord Vishwakarma यज्ञ विघ्नों से रहित हो गया,उनकें सारे कष्ट दुर हो गयें। जो मनुष्य भक्ति-भाव् से विश्वकर्मा भगवान की पूजा करता है,वह सुखों को प्राप्त करता हुआ संसार में बङे पद को प्राप्त करता है।
Read more...Ganesh chaturthi: गणेश पूजा के बाद अज्ञानतावश पूजा में कुछ कमी रह जाने या गलतियों के लिए भगवान् गणेश के सामने हाथ जोड़कर निम्नलिखित मंत्र का जप करते हुए क्षमा याचना करे
Read more...Tantra: लेकिन टोने अगर गलत हो जाए तो वह करने वाले पर पलटवार भी कर सकते हैं यानी जो स्थिति अपने दुश्मन की चाह रहे हैं अगर सावधानियां नहीं रखी तो वह स्वयं आपकी भी हो सकती है।
Read more...Religious: पीपल पर लगातार 43 दिन लड़की या लड़का जल चढ़ाए, तो शादी की रुकावट दूर हो जाती है। रविवार को तथा मासिक धर्म आने पर जल नहीं चढ़ाना है।
Read more...Religious: चीटियों के बिल के पास शक्कर या आटा व शक्कर मिलाकर डालने से गृहस्थ (पारिवारिक) की समस्याओं का निवारण होता है। ऐसा नियमित 40 दिन तक करें।
Read more...उन्हीं में से कई धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी व्यक्ति इस विशेष दिन नागदेव की पूजा करता है तो, उसे अपनी कुंडली में मौजूद राहु और केतु से संबंधित हर प्रकार के दोष से तो मुक्ति मिलती ही है Naag Panchmi
Read more...आज के समय में जहाँ आर्थिक असंतुलन हमारी चिंता का एक मुख्य कारण है वहीँ एक दूसरी स्थिति जिसके कारण अधिकांश लोग चिंतित और परेशान रहते हैं वह है…
Read more...अशुभ स्वप्न दिखने पर फिर से सो जाने पर उसका अशुभ प्रभाव नष्ट हो जाता है | अशुभ स्वप्नों की शान्ति के लिए देव पूजन ,ब्राह्मण भोजन ,हवन या दान करना चाहिए।
Read more...यदि सूर्य पर्वत विकसित है तो सफलता का सूचक होता है। हाथ में सूर्य पर्वत का न होना व्यक्ति के लिए साधारण स्थिति व उपेक्षित जीवन का परिचय होता है। सूर्य पर्वत का विकास ही मनुष्य को प्रतिभावान और यशस्वी बनाता है।
Read more...हमारे धर्मग्रंथों के अनुसार हमारे द्वारा किए गए पाप ही हमारे दु:खों के कारण हैं। रुद्राभिषेक करना शिव आराधना का सर्वश्रेष्ठ तरीका माना गया है। रूद्र शिव जी का ही एक स्वरूप हैं। रुद्राभिषेक मंत्रों का वर्णन ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद में भी किया गया है।
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