‘Mirzapur: द फिल्म’ में ‘शूरवीर’ गाने पर मचा बवाल अब शांत! रैपरिया बालम के दावे के बाद ट्रूपर रिकॉर्ड्स ने बताया किसे दिए थे अधिकार?
News-Desk
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रैपरिया बालम ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर दावा किया था कि फिल्म में उनके गाने का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना किया गया। उन्होंने गाने के इस्तेमाल के तरीके पर भी आपत्ति जताई और कहा कि यह गीत उन्होंने महाराणा प्रताप को समर्पित करते हुए बनाया था, जबकि फिल्म में इसे ऐसे दृश्यों के दौरान इस्तेमाल किया गया जिनमें हिंसा और गोलियां चलती दिखाई देती हैं।
लेकिन अब इस विवाद में एक अहम मोड़ आया है। गाने के म्यूजिक लेबल ट्रूपर रिकॉर्ड्स ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा है कि ‘शूरवीर’ को फिल्म में इस्तेमाल करने के लिए एक्सेल एंटरटेनमेंट को आधिकारिक लाइसेंस दिया गया था।
इस बयान के बाद फिल्म और गाने को लेकर उठे अधिकार संबंधी सवालों पर फिलहाल विराम लगता दिखाई दे रहा है। हालांकि, कलाकार और लेबल के बीच व्यक्तिगत स्तर पर अनुमति तथा अधिकारों को लेकर क्या सहमति थी, इसकी पूरी तस्वीर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हुई है।
‘शूरवीर’ को लेकर आखिर शुरू कैसे हुआ विवाद?
विवाद की शुरुआत 4 सितंबर को ‘मिर्जापुर: द फिल्म’ के सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद हुई। फिल्म में ‘शूरवीर’ गाने का इस्तेमाल देखने के बाद रैपरिया बालम ने सोशल मीडिया पर अपना पक्ष रखा।
उन्होंने अपने वीडियो में इस बात पर निराशा जताई कि उन्हें फिल्म में अपने गाने को देखकर खुशी होने के बजाय दुख हुआ।
उनका कहना था कि अगर फिल्म की टीम उनसे संपर्क करती और गाने को इस्तेमाल करने की इच्छा जताती, तो वह खुद कई तरह के सुझाव दे सकते थे। उनकी मुख्य आपत्ति यह थी कि उन्हें कथित तौर पर सीधे तौर पर अनुमति लेने के लिए संपर्क नहीं किया गया।
यहीं से सोशल मीडिया पर गाने के अधिकार और लाइसेंस को लेकर चर्चा तेज हो गई।
रैपरिया बालम ने कहा- ‘मेरी अनुमति किसने दी?’
रैपरिया बालम ने अपने बयान में मूल सवाल यही उठाया कि अगर उनकी अनुमति नहीं ली गई तो फिल्म में गाना इस्तेमाल करने का अधिकार किसके पास था।
उन्होंने सवाल किया कि उन्हें खुशी मनानी चाहिए या इस बात पर सवाल उठाना चाहिए कि उनके गीत का इस्तेमाल किस तरह और किस अनुमति के तहत किया गया।
कलाकार की नाराजगी केवल गाने के इस्तेमाल तक सीमित नहीं थी। उन्होंने फिल्म में गाने के साथ दिखाए गए दृश्यों के संदर्भ पर भी सवाल उठाया।
उनके मुताबिक, ‘शूरवीर’ एक विशेष ऐतिहासिक व्यक्तित्व को समर्पित गीत है और इसके मूल भाव को ध्यान में रखते हुए इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए था।
महाराणा प्रताप को समर्पित था गाना
रैपरिया बालम के अनुसार, ‘शूरवीर’ गाना उन्होंने महाराणा प्रताप को समर्पित करते हुए बनाया था।
इसी वजह से फिल्म में इसके इस्तेमाल का तरीका उनके लिए महत्वपूर्ण था। उनका कहना था कि जिस गीत को उन्होंने महाराणा प्रताप जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्व की वीरता से जोड़कर तैयार किया, उसे फिल्म के विलेन से जुड़े हिंसक और मारधाड़ वाले दृश्यों में सुनना उन्हें उचित नहीं लगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर फिल्म की टीम उनसे पहले संपर्क करती तो वह गीत के उपयोग को लेकर कई रचनात्मक सुझाव दे सकते थे।
यानी विवाद में दो अलग-अलग सवाल एक साथ सामने आए—पहला, गाने के इस्तेमाल की अनुमति किसके पास थी, और दूसरा, गाने का इस्तेमाल किस संदर्भ में किया गया।
ट्रूपर रिकॉर्ड्स ने जारी की सफाई
विवाद बढ़ने के बाद गाने के म्यूजिक लेबल ट्रूपर रिकॉर्ड्स ने अपना आधिकारिक बयान जारी किया।
लेबल ने कहा कि ‘शूरवीर’ को ‘मिर्जापुर: द फिल्म’ में इस्तेमाल करने के लिए एक्सेल एंटरटेनमेंट को आधिकारिक तौर पर लाइसेंस दिया गया था।
यानी लेबल के मुताबिक फिल्म में गाने का इस्तेमाल बिना किसी अधिकार या अनुमति के नहीं किया गया था, बल्कि इसके लिए लाइसेंसिंग की प्रक्रिया के तहत अधिकार दिए गए थे।
ट्रूपर रिकॉर्ड्स ने फिल्म की रिलीज पर एक्सेल एंटरटेनमेंट और पूरी ‘मिर्जापुर’ टीम को बधाई भी दी।
यह बयान सामने आने के बाद विवाद का सबसे अहम कानूनी और अधिकार संबंधी सवाल फिलहाल काफी हद तक स्पष्ट होता नजर आया।
लेकिन कलाकार की अनुमति और लेबल के अधिकार का सवाल क्यों महत्वपूर्ण है?
यही वह बिंदु है जिसने इस पूरे मामले को दिलचस्प बना दिया है।
किसी गाने के अधिकार कई स्तरों पर जुड़े हो सकते हैं। गीतकार, संगीतकार, गायक, निर्माता और म्यूजिक लेबल के बीच अधिकारों की प्रकृति अलग-अलग हो सकती है। किसी कलाकार का गाने से जुड़ा होना और किसी लेबल के पास उस रिकॉर्डिंग को लाइसेंस करने का अधिकार होना हमेशा एक ही बात नहीं होती।
इसीलिए ट्रूपर रिकॉर्ड्स के बयान के बाद यह स्पष्ट होता है कि लेबल ने एक्सेल एंटरटेनमेंट को लाइसेंस देने की बात स्वीकार की है, लेकिन कलाकार और लेबल के बीच उस अधिकार व्यवस्था की पूरी शर्तें सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई हैं।
इस वजह से विवाद को पूरी तरह समझने के लिए दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
रैपरिया बालम ने कॉपीराइट और लाइसेंसिंग पर भी सवाल उठाए थे
अपने वीडियो में रैपरिया बालम ने केवल फिल्म की टीम को सवालों के घेरे में नहीं रखा, बल्कि गाने के कॉपीराइट और लाइसेंसिंग प्रक्रिया पर भी सवाल किया था।
उन्होंने यह जानने की बात कही थी कि फिल्म को गाने के अधिकार किसने दिए और जिस व्यक्ति या संस्था ने अधिकार दिए, क्या उसके पास वास्तव में ऐसा करने का कॉपीराइट था।
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि कलाकार के अनुसार उन्हें इस प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल नहीं किया गया था।
अब ट्रूपर रिकॉर्ड्स के बयान ने कम से कम यह स्पष्ट कर दिया है कि लेबल ने अपने स्तर पर एक्सेल एंटरटेनमेंट को आधिकारिक लाइसेंस दिए जाने की बात कही है।
विवाद के बीच सोशल मीडिया पर तेज हुई चर्चा
फिल्म और गाने से जुड़ा विवाद सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
एक वर्ग ने कलाकार की चिंता को उचित बताया और कहा कि किसी कलाकार को उसके गीत के इस्तेमाल की जानकारी और संदर्भ के बारे में स्पष्टता मिलनी चाहिए।
दूसरी ओर, ट्रूपर रिकॉर्ड्स के बयान के बाद यह सवाल भी सामने आया कि यदि लेबल के पास आवश्यक अधिकार थे और उसने आधिकारिक लाइसेंस दिया था, तो फिल्म में गाने का इस्तेमाल अधिकारहीन तरीके से कैसे माना जा सकता है।
यही वजह है कि मामले में कॉपीराइट, लाइसेंस और कलाकार की भूमिका तीनों अलग-अलग पहलू बन गए।
फिल्म में गाने के इस्तेमाल के संदर्भ पर भी थी आपत्ति
रैपरिया बालम की आपत्ति केवल इस बात को लेकर नहीं थी कि गाना फिल्म में शामिल किया गया।
उन्होंने फिल्म में जिस तरह गाने को इस्तेमाल किया गया, उस पर भी नाराजगी जताई।
उनका कहना था कि गाना महाराणा प्रताप को समर्पित है, लेकिन फिल्म में इसे मारधाड़ और गोलियां चलने वाले दृश्यों के दौरान इस्तेमाल किया गया।
कलाकार के मुताबिक, इससे उनके गीत के मूल भाव से अलग तस्वीर सामने आती है।
यह एक रचनात्मक सवाल भी है कि किसी गाने को फिल्म के किस दृश्य, पात्र या परिस्थिति के साथ जोड़ा जाता है और क्या वह मूल रचना की भावना से मेल खाता है।
‘अगर मुझसे पूछा जाता तो कई आइडिया देता’
रैपरिया बालम ने अपने वीडियो में यह भी कहा था कि यदि ‘मिर्जापुर’ की टीम उनसे संपर्क करती और गाना इस्तेमाल करने की इच्छा जताती, तो वह स्वयं इसके इस्तेमाल को लेकर कई सुझाव दे सकते थे।
उनका कहना था कि बिना संपर्क किए या उनकी अनुमति लिए गाने का इस्तेमाल करना उन्हें सही नहीं लगा।
इस बयान से यह भी पता चलता है कि कलाकार की आपत्ति केवल आर्थिक अधिकारों से संबंधित नहीं थी। वह गाने के रचनात्मक संदर्भ और उसके संदेश को लेकर भी अपनी बात रख रहे थे।
ट्रूपर रिकॉर्ड्स के बयान में गाने के क्रेडिट भी साझा किए गए
अपने स्पष्टीकरण के साथ ट्रूपर रिकॉर्ड्स ने ‘शूरवीर’ के क्रेडिट भी साझा किए।
इन क्रेडिट्स में रैपरिया बालम को गाने का गायक और कंपोजर बताया गया है।
यह जानकारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विवाद के दौरान कलाकार की भूमिका को लेकर चर्चा हो रही थी।
लेबल की ओर से क्रेडिट साझा करने और आधिकारिक लाइसेंसिंग की पुष्टि किए जाने के बाद मामले में अधिकारों की तस्वीर पहले की तुलना में कुछ अधिक स्पष्ट हुई है।
फिलहाल विवाद शांत, लेकिन कई सवालों पर नजर
ट्रूपर रिकॉर्ड्स के बयान के बाद ‘शूरवीर’ को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहा विवाद फिलहाल शांत होता दिखाई दे रहा है।
लेबल ने आधिकारिक लाइसेंस की बात कही है और एक्सेल एंटरटेनमेंट को फिल्म में गाना इस्तेमाल करने के लिए अधिकार दिए जाने की पुष्टि की है।
हालांकि, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि रैपरिया बालम और ट्रूपर रिकॉर्ड्स के बीच गाने के अधिकारों को लेकर वास्तविक समझौते की शर्तें क्या थीं।
इसलिए इस मामले में किसी एक पक्ष पर अंतिम टिप्पणी करने के बजाय उपलब्ध बयानों को ही आधार बनाना ज्यादा उचित है।
‘मिर्जापुर: द फिल्म’ ने रिलीज के साथ ही पकड़ी रफ्तार
विवाद के अलावा Mirzapur The Film बॉक्स ऑफिस पर भी चर्चा में बनी हुई है।
फिल्म 4 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। रिपोर्ट के अनुसार फिल्म ने पहले दिन 25.74 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया और साल की बड़ी ओपनिंग वाली फिल्मों में अपनी जगह बनाई।
फिल्म का बॉक्स ऑफिस मुकाबला ‘टॉक्सिक’ और ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्मों से बताया गया है।
रिलीज के शुरुआती दिनों में फिल्म की कमाई ने इसे एक्सेल एंटरटेनमेंट के लिए भी खास बना दिया है।
तीन दिनों में 93 करोड़ रुपये की कमाई का दावा
फिल्म ने शुरुआती तीन दिनों में करीब 93 करोड़ रुपये की कमाई की।
यह प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ‘मिर्जापुर’ मूल रूप से एक लोकप्रिय स्ट्रीमिंग फ्रेंचाइजी के रूप में स्थापित हुई थी और अब इसे बड़े पर्दे पर लाया गया है।
ओटीटी पर पहले से बड़ी फैन फॉलोइंग होने के कारण फिल्म को रिलीज से पहले ही दर्शकों की मजबूत दिलचस्पी हासिल थी।
थिएटर रिलीज के बाद यह रुचि बॉक्स ऑफिस आंकड़ों में भी दिखाई देती नजर आ रही है।
ओटीटी से थिएटर तक पहुंची ‘मिर्जापुर’ की कहानी
‘मिर्जापुर’ फ्रेंचाइजी की शुरुआत 16 नवंबर 2018 को हुई थी। पहले सीजन में कुल 9 एपिसोड थे।
इसके बाद 23 अक्टूबर 2020 को दूसरा सीजन आया, जिसमें 10 एपिसोड शामिल थे।
तीसरा सीजन 5 जुलाई 2024 को रिलीज हुआ और इसमें भी कुल 10 एपिसोड थे।
लगातार तीन सीजन के जरिए इस फ्रेंचाइजी ने दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। अब इसी लोकप्रियता को बड़े पर्दे पर आगे बढ़ाने की कोशिश फिल्म के जरिए की गई है।
एक्सेल एंटरटेनमेंट के लिए भी खास बनी फिल्म
‘मिर्जापुर: द फिल्म’ एक्सेल एंटरटेनमेंट के लिए भी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट बनकर सामने आई है।
फिल्म ने शुरुआती प्रदर्शन के आधार पर कंपनी की पिछली चर्चित फिल्मों के ओपनिंग रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने की बात सामने आई है। इनमें ‘डॉन 2’, ‘गली बॉय’, ‘रईस’ और ‘गोल्ड’ जैसी फिल्में शामिल हैं।
एक सफल स्ट्रीमिंग फ्रेंचाइजी को थिएटर में लाना अपने आप में बड़ा प्रयोग था। ऐसे में बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन को लेकर इंडस्ट्री की नजर भी फिल्म पर बनी हुई है।
फिल्म की स्टारकास्ट ने बढ़ाई दर्शकों की दिलचस्पी
फिल्म में फ्रेंचाइजी से जुड़े कई चर्चित कलाकार नजर आ रहे हैं।
पंकज त्रिपाठी, अली फजल और दिव्येंदु शर्मा के अलावा फिल्म में श्वेता त्रिपाठी, जितेंद्र कुमार, रवि किशन, अभिषेक बनर्जी, रसिका दुग्गल, श्रिया पिलगांवकर, हर्षिता गौर, सुशांत सिंह, मोहित मलिक, शीबा चड्ढा, राजेश तैलंग, कुलभूषण खरबंदा, सोनल चौहान, प्रमोद पाठक और अनंग्शा बिस्वास भी दिखाई दे रहे हैं।
इतनी बड़ी और लोकप्रिय स्टारकास्ट के कारण फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता स्वाभाविक रूप से काफी अधिक रही।
‘शूरवीर’ विवाद ने एक बड़ा सवाल भी उठाया
‘शूरवीर’ से जुड़ा विवाद केवल एक गाने या एक फिल्म तक सीमित नहीं है। इसने मनोरंजन उद्योग में म्यूजिक राइट्स और लाइसेंसिंग की प्रक्रिया पर भी चर्चा छेड़ दी।
आज किसी फिल्म में पहले से रिलीज हो चुके गाने का इस्तेमाल करते समय कई तरह के अधिकारों को ध्यान में रखना पड़ता है। रिकॉर्डिंग राइट्स, म्यूजिक लेबल के अधिकार, कलाकारों की भूमिका और लाइसेंस की शर्तें—ये सभी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
ऐसे में किसी गाने के फिल्म में इस्तेमाल होने के बाद विवाद खड़ा होने पर सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही होता है कि अधिकार किसके पास थे और किस आधार पर लाइसेंस दिया गया।
कलाकार और म्यूजिक लेबल के बीच अधिकारों की समझ जरूरी
म्यूजिक इंडस्ट्री में कलाकार और रिकॉर्ड लेबल के बीच समझौते गाने के निर्माण और उसके बाद के उपयोग को प्रभावित कर सकते हैं।
किसी कलाकार के लिए यह महत्वपूर्ण हो सकता है कि उसकी रचना का इस्तेमाल कहां और किस संदर्भ में किया जा रहा है। दूसरी ओर, लेबल के पास उपलब्ध संविदात्मक अधिकार उसे किसी अन्य प्रोडक्शन के लिए रिकॉर्डिंग लाइसेंस देने की अनुमति दे सकते हैं।
इसलिए किसी मामले में केवल कलाकार के सार्वजनिक बयान या केवल लेबल के बयान के आधार पर पूरी कानूनी स्थिति तय करना उचित नहीं होगा।
‘शूरवीर’ विवाद में भी यही बात सामने आती है।
अब फिल्म और गाने दोनों पर नजर
ट्रूपर रिकॉर्ड्स के बयान के बाद तत्काल विवाद भले ही शांत हो गया हो, लेकिन ‘शूरवीर’ अब ‘मिर्जापुर: द फिल्म’ से जुड़ चुका है और इस वजह से गाना भी पहले से कहीं अधिक चर्चा में आ गया है।
एक तरफ कलाकार की रचनात्मक आपत्ति ने गीत के मूल भाव को लेकर सवाल खड़े किए, वहीं दूसरी तरफ लेबल के आधिकारिक लाइसेंस वाले बयान ने अधिकारों की बहस को अलग दिशा दे दी।
आगे इस मामले में यदि कलाकार, लेबल या फिल्म की टीम की ओर से कोई और स्पष्टता आती है, तो तस्वीर और साफ हो सकती है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी यही बताती है कि ट्रूपर रिकॉर्ड्स ने एक्सेल एंटरटेनमेंट को ‘शूरवीर’ के फिल्म में इस्तेमाल के लिए आधिकारिक लाइसेंस दिए जाने की पुष्टि की है, जबकि रैपरिया बालम की ओर से उठाए गए अनुमति और रचनात्मक इस्तेमाल से जुड़े सवालों की पूरी पृष्ठभूमि सार्वजनिक रूप से विस्तार से सामने नहीं आई है।
‘मिर्जापुर: द फिल्म’ की कहानी से ज्यादा अब गाने की कहानी भी चर्चा में
फिल्म की रिलीज के बाद आमतौर पर दर्शकों के बीच कहानी और किरदारों की चर्चा होती है, लेकिन इस बार ‘शूरवीर’ गाने ने भी अलग सुर्खियां बटोरी हैं।
रैपरिया बालम का बयान सामने आने के बाद शुरू हुआ विवाद ट्रूपर रिकॉर्ड्स की सफाई तक पहुंचा और अब फिलहाल मामला शांत नजर आ रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बात यह है कि गाने के इस्तेमाल को लेकर उठे सवालों का जवाब संबंधित म्यूजिक लेबल ने आधिकारिक लाइसेंस की बात कहकर दिया है। वहीं कलाकार के पहले बयान से यह स्पष्ट है कि उनकी चिंता गाने की अनुमति के साथ-साथ उसके इस्तेमाल के संदर्भ को लेकर भी थी।

