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ट्रम्प ने अफगानिस्तान को धमकी दी: Bagram Airbase न लौटाने पर होगा ‘भयंकर परिणाम’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अफगानिस्तान को चेतावनी दी है कि यदि वह Bagram Airbase अमेरिका को वापस नहीं करता, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। ट्रम्प ने शनिवार को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट लिखकर यह धमकी दी।

ट्रम्प पहले भी गुरुवार को ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में कह चुके थे,

“हम बगराम को वापस लेने की कोशिश कर रहे हैं। यह बेस चीन के न्यूक्लियर प्लांट से सिर्फ एक घंटे की दूरी पर है।”

तालिबानी सरकार ने ट्रम्प की इस मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


बगराम एयरबेस का ऐतिहासिक और रणनीतिक महत्व

बगराम एयरबेस अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से 40 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। यह अमेरिकी सेना का सबसे बड़ा ठिकाना था। 2001 के 9/11 हमलों के बाद अमेरिका ने इसका इस्तेमाल शुरू किया।

  • एयरबेस का क्षेत्रफल लगभग 30 वर्ग किलोमीटर है।

  • इसमें बर्गर किंग, पिज्जा हट, इलेक्ट्रॉनिक्स और अफगानी कालीन बेचने वाली दुकानें थीं।

  • यहाँ एक बड़ा जेल परिसर भी है।

ट्रम्प ने मार्च 2025 में कहा था कि वह बगराम एयरबेस को रखना चाहते थे। इसका मुख्य कारण चीन की निगरानी और अफगानिस्तान के खनिज संसाधनों तक पहुंच है।


तालिबान और अफगान अधिकारियों की प्रतिक्रिया

तालिबान के विदेश मंत्रालय के अधिकारी जाकिर जलाल ने कहा कि अमेरिकी सेना की मौजूदगी अफगानिस्तान में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने X पर लिखा कि अफगानिस्तान और अमेरिका आपसी सम्मान के आधार पर आर्थिक और राजनीतिक संबंध बना सकते हैं, लेकिन अफगानिस्तान के किसी भी हिस्से में सैन्य उपस्थिति नहीं होगी।

जलाल ने दोहराया,

“अफगानिस्तान ने इतिहास में कभी भी विदेशी सैन्य उपस्थिति को स्वीकार नहीं किया।”


चीन ने जताया विरोध

चीन ने भी ट्रम्प की धमकी का विरोध किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि क्षेत्र में तनाव और टकराव को बढ़ावा देना अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा,

“अफगानिस्तान की स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाएगा। अफगानिस्तान का भविष्य अफगान लोगों के हाथों में है।”

चीन ने तालिबान के कब्जे के तुरंत बाद काबुल में राजनयिक संबंध स्थापित किए और देश में तांबे की खदान और तेल भंडारों में भारी निवेश किया।


ट्रम्प की धमकी और संभावित सैन्य विकल्प

ट्रम्प ने कहा,

“हम इस बारे में बात नहीं करेंगे। अगर बेस नहीं देंगे, तो आप देखेंगे मैं क्या करता हूं।”

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अमेरिका बगराम एयरबेस पर फिर से कब्जा करना चाहे तो 10,000 से अधिक सैनिक, उन्नत हवाई रक्षा प्रणालियां और भारी संसाधन आवश्यक होंगे। यह एक तरह से अफगानिस्तान पर पुनः आक्रमण जैसा होगा।

  • सुरक्षा चुनौती: इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा जैसे आतंकी समूह।

  • ईरान का खतरा: जून 2025 में ईरान ने कतर में अमेरिकी एयरबेस पर हमला किया था।

  • बेस को चलाना और बचाना महंगा और जटिल होगा।


भविष्य के राजनीतिक और रणनीतिक निहितार्थ

ट्रम्प का बयान अमेरिका के वैश्विक सैन्य रणनीति और चीन पर निगरानी के दृष्टिकोण को दर्शाता है। बगराम एयरबेस की वापसी की मांग ने अफगानिस्तान, अमेरिका और चीन के बीच भारी कूटनीतिक तनाव पैदा कर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तालिबान ने सहमति भी दी, तो बेस को सुरक्षित रूप से चलाना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होगा।


पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति **डोनाल्ड ट्रम्प** की बगराम एयरबेस पर चेतावनी ने अफगानिस्तान और क्षेत्रीय शक्तियों में तनाव पैदा कर दिया है। तालिबान ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सेना की मौजूदगी स्वीकार नहीं की जाएगी। चीन ने भी टकराव का विरोध किया। विशेषज्ञों के अनुसार, बगराम एयरबेस की वापसी केवल राजनीतिक और सैन्य दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि आर्थिक और सुरक्षा दृष्टि से भी बेहद चुनौतीपूर्ण और महंगा कार्य होगा।

Bagram Airbase का परिचय

बगराम एयरबेस, अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से 40 किलोमीटर उत्तर में स्थित, अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य ठिकाना रहा है। यह एयरबेस 1950 के दशक में सोवियत संघ और अमेरिका की मदद से बनाया गया था। 2001 के 9/11 हमलों के बाद इसे अमेरिकी सेना ने व्यापक रूप से इस्तेमाल करना शुरू किया।

बेस का क्षेत्रफल लगभग 30 वर्ग किलोमीटर है और इसे आधुनिक सैन्य सुविधाओं से लैस किया गया था।


Bagram Airbase की सुविधाएँ

बगराम एयरबेस केवल रनवे तक सीमित नहीं था। इसमें शामिल थीं:

  • जेल परिसर: आतंकवादियों और विरोधियों के लिए विशेष कारावास।

  • क्लब और रेस्टोरेंट: बर्गर किंग, पिज्जा हट जैसे रेस्टोरेंट, कैफे और मनोरंजन की सुविधाएँ।

  • दुकानें और बाज़ार: इलेक्ट्रॉनिक्स और अफगानी कालीन बेचने वाली दुकानें।

  • सैन्य और लॉजिस्टिक सुविधाएँ: हेलीपैड, विमान हैंगर, वाहन पार्किंग, और हथियार भंडार।

यह एयरबेस अफगानिस्तान में अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन का केंद्र माना जाता था।


रणनीतिक महत्व

बगराम एयरबेस का रणनीतिक महत्व कई कारणों से है:

  1. सैन्य संचालन का केंद्र: अफगानिस्तान के विभिन्न हिस्सों में अमेरिकी और NATO के ऑपरेशन यहां से नियंत्रित होते थे।

  2. चीन और पाकिस्तान की नज़र में: ट्रम्प और अमेरिकी रणनीतिकारों ने इसे चीन और पाकिस्तान पर निगरानी रखने के लिए महत्वपूर्ण माना।

  3. खनिज संसाधनों तक पहुंच: अफगानिस्तान की खनिज संपदा (जैसे तांबा और कीमती धातुएँ) तक पहुंच के लिए यह एयरबेस रणनीतिक था।

  4. क्षेत्रीय सुरक्षा: इस एयरबेस से अफगानिस्तान में आतंकवादी समूहों और विद्रोही गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती थी।


इतिहास और अमेरिकी वापसी

2021 में अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान से पूरी तरह वापसी की। इसके बाद तालिबान ने Bagram Airbase पर कब्जा कर लिया और अमेरिका समर्थित काबुल सरकार को गिरा दिया।

पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प ने बार-बार यह कहा कि बगराम एयरबेस छोड़ना गलत निर्णय था, और वह इसे वापस लेना चाहते थे। उनका उद्देश्य चीन की निगरानी और अफगानिस्तान में अमेरिका की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करना था।


राजनीतिक और कूटनीतिक पहलू

बगराम एयरबेस के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय राजनीति भी जटिल है:

  • तालिबान: अमेरिकी सेना की मौजूदगी को स्वीकार नहीं करता।

  • चीन: अफगानिस्तान की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करता है। चीन ने तालिबान के कब्जे के बाद काबुल में राजनयिक संबंध स्थापित किए और देश में निवेश शुरू किया।

  • अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण: यदि अमेरिका एयरबेस पर दोबारा कब्जा करना चाहे, तो यह अफगानिस्तान पर आक्रमण जैसा होगा और 10,000 से अधिक सैनिकों, उन्नत हवाई रक्षा प्रणालियों और भारी संसाधनों की आवश्यकता होगी।


सामाजिक और स्थानीय प्रभाव

Bagram Airbase न केवल सैन्य ठिकाना था, बल्कि स्थानीय अफगान समाज पर भी इसका प्रभाव था।

  • बेस ने स्थानीय युवाओं को रोजगार और व्यापार के अवसर दिए।

  • एयरबेस के आस-पास छोटे-छोटे बाज़ार और दुकानें विकसित हुईं।

  • हालांकि, अमेरिकी सैन्य उपस्थिति कभी-कभी स्थानीय विरोध और तनाव का कारण भी बनी।


भविष्य की चुनौती

विशेषज्ञों का कहना है कि बगराम एयरबेस की वापसी केवल सैन्य दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि सामरिक, आर्थिक और कूटनीतिक दृष्टिकोण से भी चुनौतीपूर्ण है। इसे सुरक्षित रखना और चलाना महंगा और जटिल कार्य होगा, खासकर क्षेत्रीय आतंकवादी गतिविधियों और पड़ोसी देशों के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए।


**बगराम एयरबेस** अफगानिस्तान में अमेरिकी सैन्य शक्ति और रणनीतिक महत्व का प्रतीक रहा है। 2001 के बाद इसे अमेरिकी सेना ने मुख्य संचालन केंद्र बनाया। तालिबान के कब्जे और अमेरिकी वापसी के बाद, इस एयरबेस का महत्व अब भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा में बना हुआ है। भविष्य में इसे सुरक्षित और प्रभावी बनाए रखना अमेरिका और क्षेत्रीय शक्तियों के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

 

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