उत्तर प्रदेश

Bareilly में एमबीबीएस छात्र का अपहरण: दोस्त ने ही रची थी फिरौती की साजिश, 50 लाख की मांग से हड़कंप!

Bareilly में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने हर किसी को हिला कर रख दिया है। यहां एक एमबीबीएस छात्र का अपहरण उसके ही दोस्त ने करा दिया। वजह थी लालच और पैसे की हवस। आरोपी दोस्त ने न केवल अपहरण की साजिश रची, बल्कि खुद भी अगवा होने का ड्रामा रचा ताकि शक किसी को न हो।

फतेहगंज पश्चिमी क्षेत्र के एक मेडिकल कॉलेज में तीसरे वर्ष का छात्र गौरव वरपे, जो महाराष्ट्र के सोनोई का निवासी है, इसी साजिश का शिकार बना। पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपी दिविज और उसके साथी गौरवेंद्र समेत कई संदिग्धों को पकड़कर पूछताछ शुरू कर दी है।


खाते में एक करोड़ रुपये की अफवाह से शुरू हुई पूरी कहानी
जांच में पता चला है कि इस पूरे अपराध की जड़ एक अफवाह थी। कॉलेज में पढ़ने वाले कुछ छात्रों के बीच यह बात फैलाई गई कि गौरव वरपे के बैंक खाते में एक करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम है। बस फिर क्या था, दोस्ती के रिश्ते पर लालच हावी हो गया।

दिविज, जो पीलीभीत का रहने वाला है, ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर गौरव को किडनैप करने और उसका खाता खाली करने की योजना बनाई। तय हुआ कि रकम ट्रांसफर करने के बाद बाहरी लोग गौरव को रास्ते से हटा देंगे।


स्कूटी से निकले थे तीनों – रास्ते में हुआ अपहरण
शनिवार शाम करीब चार बजे गौरव, दिविज और गौरवेंद्र स्कूटी से घूमने निकले थे। राधा कृष्ण मंदिर से मेडिकल कॉलेज लौटते समय अचानक एक इको कार ने उन्हें ओवरटेक किया और रोक लिया।

कार में बैठे लोगों ने तीनों को जबरन गाड़ी में बिठा लिया। गौरव के मुताबिक, कार में मौजूद लोगों को दिविज “सोनू” नाम से पुकार रहा था, जिससे साफ है कि अपहरण की यह साजिश पहले से रची गई थी।


मोबाइल से खाते से ट्रांसफर किए ₹60,000 – फिर मांगी 50 लाख की फिरौती
गौरव ने पुलिस को बताया कि दिविज उन लोगों के साथ मिलकर उसके मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहा था। उन्होंने उसके बैंक खाते से ₹60,000 दूसरे खातों में ट्रांसफर कर लिए।

इसके बाद दिविज ने गौरव के पिता और उसके दोस्त कपिल को फोन कर बताया कि गौरव का अपहरण हो गया है और उसे छुड़ाने के लिए ₹50 लाख की फिरौती चाहिए।

रात करीब 11:30 बजे, जब पुलिस ने इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया, तो कार में बैठे अपराधियों ने गौरव को जंगल के पास छोड़ दिया और भाग खड़े हुए।


पुलिस की तेजी से हुई गिरफ्तारी – मोबाइल लोकेशन ने खोला राज़
जब छात्र रात तक हॉस्टल नहीं लौटे, तो कॉलेज प्रशासन ने इंस्पेक्टर अभिषेक कुमार को सूचना दी। उन्होंने तुरंत एसएसपी अनुराग आर्य को खबर दी और एसओजी व सर्विलांस टीम को सक्रिय किया गया।

पुलिस ने मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रैक की और दिविज की पूरी साजिश बेनकाब हो गई। जब पुलिस ने गौरव को बरामद किया, तो उसने सारी कहानी बयां की। उसी के आधार पर पुलिस ने दिविज को भी पकड़ लिया।


पुलिस ने बताया – आरोपी नौसिखिए थे, खुद के जाल में फंसे
थाना प्रभारी अभिषेक कुमार ने बताया कि गौरव की ओर से दिविज, सोनू और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
उन्होंने कहा, “आरोपी बहुत अनुभवी नहीं थे, इसी वजह से पुलिस को उनका सुराग जल्दी मिल गया। अब सभी को जेल भेजा जाएगा।”


मास्टरमाइंड निकला मेडिकल छात्र दिविज – जांच में नए खुलासे की संभावना
जांच में सामने आया कि इस पूरे घटनाक्रम का मास्टरमाइंड खुद दिविज था। पुलिस ने यह भी पता लगाया कि दिविज ने बाहरी लोगों से संपर्क किया था, जिनके माध्यम से वह गौरव के पैसे निकलवाने और उसे ठिकाने लगाने की योजना बना रहा था।

सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने उस कार के मालिक को भी हिरासत में लिया है, हालांकि अधिकारी अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दे रहे हैं।
एसपी उत्तरी मुकेश मिश्रा और सीओ हाइवे शिवम आशुतोष ने बताया कि गौरव वरपे की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है और अब पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।


कॉलेज में फैली दहशत, छात्रों में डर का माहौल
घटना के बाद मेडिकल कॉलेज परिसर में डर और तनाव का माहौल है। छात्रों का कहना है कि अगर ऐसे ही घटनाएं होती रहीं तो कॉलेज के माहौल पर बुरा असर पड़ेगा।
कई छात्रों ने सुरक्षा बढ़ाने और कॉलेज के गेट पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग की है।

कॉलेज प्रशासन ने कहा कि वे पुलिस जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और छात्रों की सुरक्षा के लिए नई सुरक्षा नीति पर विचार चल रहा है।


मानव तस्करी और अपराध का नया चेहरा – ‘इंटेलिजेंट क्राइम’ का बढ़ता ट्रेंड
इस मामले ने यह भी दिखाया है कि अब अपराधी शिक्षा और तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऑनलाइन बैंकिंग, मोबाइल ऐप्स और UPI ट्रांसफर के जरिए अपराध करना आसान हो गया है।
ऐसे मामलों में अपराधी पहले “इनसाइडर” यानी किसी करीबी को इस्तेमाल करते हैं ताकि पीड़ित को धोखा देना आसान हो।

पुलिस का मानना है कि यह केस साइबर अपराध और मानव अपहरण के मिश्रण का एक उदाहरण है, जिसे “इंटेलिजेंट क्राइम” कहा जा सकता है।


पुलिस ने किया अलर्ट जारी – सावधान रहें, संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें
पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति से सतर्क रहें।
एसएसपी अनुराग आर्य ने कहा कि ऐसे मामलों में देरी नहीं होनी चाहिए। समय पर सूचना मिलने से अपहरण जैसे अपराधों को रोका जा सकता है।


बरेली का यह मामला समाज को यह चेतावनी देता है कि लालच और विश्वासघात के बीच इंसानियत किस हद तक गिर सकती है। जब दोस्त ही दुश्मन बन जाएं, तो सवाल केवल कानून का नहीं बल्कि समाज की नैतिकता का भी बन जाता है। पुलिस ने तेजी से कार्रवाई कर इस मामले का बड़ा हिस्सा सुलझा लिया है, लेकिन यह घटना युवाओं को यह सबक देती है कि दोस्ती में विश्वास रखें, मगर आंख मूंदकर नहीं।

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