Bareilly जिला सहकारी बैंक में 1.31 करोड़ का बड़ा घोटाला: फरीदपुर शाखा के मैनेजर व कैशियर सस्पेंड, जांच में चौंकाने वाले खुलासे
Bareilly : उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में जिला सहकारी बैंक की फरीदपुर शाखा से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है जिसने पूरे बैंकिंग सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फरीदपुर शाखा में हुए इस 1.31 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले ने बैंकिंग क्षेत्र में काम कर रहे कर्मचारियों की नैतिकता पर गहरा धब्बा लगा दिया है।
इस घोटाले में शाखा प्रबंधक गौरव वर्मा, तत्कालीन शाखा प्रबंधक मुकेश कुमार गंगवार, कैशियर चंद्र प्रकाश, और दीपक पांडेय को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा इनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए दावा तहरीर भी दी गई है।
शाहजहांपुर के किसान की शिकायत से खुला फर्जीवाड़े का पिटारा
पूरा मामला तब खुला जब शाहजहांपुर के एक किसान ने शिकायत की कि उसकी सम्मान निधि की राशि गलती से फरीदपुर शाखा के खाते में चली गई है। इस एक छोटी सी गलती की जांच ने बड़ी साजिश का भंडाफोड़ कर दिया।
15 मई को उप महाप्रबंधक सर्वेंद्र सिंह चौहान ने जब फरीदपुर शाखा का निरीक्षण किया, तो उन्हें वहां 21 संदिग्ध बैंक खाते मिले जिनमें लेन-देन संदिग्ध था। यह देखकर उन्हें घोटाले का अंदेशा हुआ और 23 मई को विस्तृत जांच के आदेश दिए गए।
जांच में जो खुलासा हुआ वह चौंकाने वाला था—₹1,31,06,069 की रकम का गबन (embezzlement) किया गया था।
साज़िश के पीछे कौन-कौन? बैंक के अंदर की मिलीभगत!
गौरव वर्मा, मुकेश गंगवार, चंद्र प्रकाश और दीपक पांडेय — इन चारों पर शक सिर्फ संदेह नहीं रहा, बल्कि प्रमाण के साथ इनकी भूमिका घोटाले में पाई गई।
बताया जा रहा है कि इन अधिकारियों ने मिलीभगत से फर्जी खाते खोलकर और उनमें सरकारी सब्सिडी, सम्मान निधि, पेंशन इत्यादि की राशि डालकर अपना उल्लू सीधा किया। जांच में सामने आया कि इन खातों से निकासी भी संदिग्ध तरीकों से की गई।
क्या ये कर्मचारी अकेले थे या इसके पीछे एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था? यह सवाल अब जांच एजेंसियों के सामने है।
प्रभारी निरीक्षक ने कही अहम बात, FIR जल्द दर्ज होगी
फरीदपुर थाना प्रभारी राधेश्याम ने बताया कि उप महाप्रबंधक द्वारा तहरीर सौंप दी गई है और जैसे ही उच्चाधिकारियों की अनुमति मिलती है, रिपोर्ट दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह आर्थिक अपराध अधिनियम के तहत दर्ज किया जा सकता है, जिसमें गबन, धोखाधड़ी, जालसाजी जैसे गंभीर आरोप शामिल होंगे।
बैंक की शाखाओं में चल रहे ऐसे खेल की खबरें कोई नई बात नहीं!
पिछले कुछ वर्षों में देशभर में बैंक शाखाओं में फर्जी खातों, फर्जी निकासी, और सरकारी योजनाओं की रकम में हेराफेरी की घटनाएं आम हो गई हैं।
उत्तर प्रदेश के ही विभिन्न जिलों में सहकारी बैंकों में गड़बड़झाला सामने आया है, जिससे जनता का विश्वास इन संस्थानों से उठता जा रहा है।
हाल ही में प्रयागराज, मैनपुरी और गोंडा जिलों में भी ऐसे घोटालों की खबरें आ चुकी हैं, जहाँ कर्मचारियों ने नकली हस्ताक्षर, फर्जी चेक और मनगढ़ंत लेन-देन से लाखों की चपत लगाई।
क्या किसानों की राशि सुरक्षित है?
इस प्रकरण से सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि सरकारी योजनाओं के तहत किसानों को दी जाने वाली रकम क्या सुरक्षित है? जब बैंक के ही अधिकारी इस तरह की धोखाधड़ी में संलिप्त हों, तो आम जनता किस पर विश्वास करे?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं लाई जाएगी, तब तक ऐसे घोटाले थमने वाले नहीं हैं।
भविष्य में क्या कदम उठाए जाएंगे?
बैंक प्रबंधन की ओर से यह भी कहा गया है कि अब सभी शाखाओं में विशेष ऑडिट और जांच अभियान चलाया जाएगा, जिससे इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।
सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल लॉग, और कस्टमर वेरिफिकेशन को सख्ती से लागू करने की योजना है। साथ ही, दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कहीं यह तो नहीं सिर्फ ‘टिप ऑफ द आइसबर्ग’?
विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ एक छोटी सी बानगी है, और यदि सही तरीके से जांच की जाए तो ऐसे घोटाले कई जिलों में उजागर हो सकते हैं।
जरूरत है एक सख्त और व्यापक जांच की जो इस ‘मनी सिंडिकेट’ की जड़ तक पहुंचे।

