Dehradun में किसानों की बड़ी हलचल! BKU (तोमर) के अध्यक्ष संजीव तोमर ने 31 सूत्रीय माँगों का ज्ञापन सौंपा, गन्ने का भाव 500 रु./क्विंटल करने पर ज़ोर
Dehradun।भारतीय किसान यूनियन (तोमर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी संजीव तोमर द्वारा 13 दिसंबर को मुख्यमंत्री घेराव की घोषणा के बाद उत्तराखंड प्रशासन में हलचल तेज हो गई थी। पिछले दो दिनों से देहरादून और हरिद्वार प्रशासन पूरी तरह एक्टिव मोड में नजर आया, जिससे यह साफ हो गया कि किसान आंदोलन की तैयारी को सरकार ने गंभीरता से लिया है।
हालाँकि, विरोध कार्यक्रम से ठीक पहले एक बड़ा मोड़ तब आया जब उत्तराखंड सरकार ने खुद BKU नेतृत्व को वार्ता के लिए आमंत्रित किया। बुलावे के बाद आज 41 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल देहरादून पहुंचा और सरकार के साथ विस्तृत चर्चा हुई।
लंबी चली बातचीत, राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव तोमर का बड़ा बयान—“31 सूत्रीय माँगें मुख्यमंत्री को सौंप दी हैं”
वार्ता के बाद मीडिया से बात करते हुए चौधरी संजीव तोमर ने कहा कि सरकार के साथ संवाद सकारात्मक रहा और लगभग 31 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन मुख्यमंत्री को सौंपा गया।
उन्होंने बताया कि इस ज्ञापन में किसानों के हित से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं, जिनमें सबसे प्रमुख माँग है—
“गन्ने का मूल्य 500 रुपए प्रति क्विंटल किया जाए।”
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड और पश्चिम यूपी के हजारों किसान गन्ने की खेती पर निर्भर हैं, और बढ़ती लागत को देखते हुए यह दर आवश्यक है।
BKU Tomar protest की मुख्य माँगें—किसानों की आर्थिक सुरक्षा, मूल्य निर्धारण और नीतिगत सुधारों पर ज़ोर
31 सूत्रीय ज्ञापन में शामिल प्रमुख मुद्दे इस प्रकार बताए जा रहे हैं—
गन्ने का समर्थन मूल्य 500 रु./क्विंटल किया जाए
भुगतान समयबद्ध तरीके से हो
कृषि से संबंधित कानूनों व नीतियों में farmer-friendly संशोधन
बिजली, पानी और कृषि उपकरणों पर किसानों के लिए राहत
खाद-बीज की उपलब्धता और रेट नियंत्रण
मंडी व्यवस्था को पारदर्शी व शक्तिशाली बनाना
इन माँगों को संगठन ने “किसान की जीविका से सीधे जुड़े मूलभूत मुद्दे” बताया।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे प्रमुख किसान नेता—पवन त्यागी, राजीव मलिक, नितिन राठी, चंदन त्यागी और हनी बालियान
आज की महत्वपूर्ण बैठक में BKU (तोमर) संगठन के कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे—
पवन त्यागी – राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रतिनिधि
राजीव मलिक – वरिष्ठ किसान नेता
नितिन राठी – प्रदेश स्तर के समन्वयक
चंदन त्यागी – प्रदेश प्रवक्ता
हनी बालियान – युवा जिला उपाध्यक्ष
सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि किसान आंदोलन का उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि समाधान है। सरकार संवाद बनाए रखे तो किसान भी हर स्तर पर सहयोग के लिए तैयार हैं।
देहरादून प्रशासन और हरिद्वार प्रशासन की सतर्कता—किसानों की बड़ी संख्या को देखते हुए कसी गई तैयारी
सूत्रों के अनुसार, देहरादून और हरिद्वार प्रशासन दो दिनों से लगातार निगरानी कर रहा था—
संभव मार्ग परिवर्तन
ट्रैफिक प्रबंधन
सुरक्षा व्यवस्था
भीड़ नियंत्रण की योजना
चूँकि अनुमान था कि बड़ी संख्या में किसान पहुंच सकते हैं, इसलिए प्रशासन किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहना चाहता था।
लेकिन सरकार द्वारा बुलावा भेजे जाने के बाद स्थिति शांतिपूर्ण रही और संवाद की दिशा में सकारात्मक कदम दिखाई दिए।
अब आगे क्या?—सरकार की प्रतिक्रिया और अगली कार्रवाई पर टिकी नज़रें
किसान नेताओं का कहना है कि—
सरकार ने सभी बिंदुओं पर विचार का आश्वासन दिया है
कुछ मुद्दों पर त्वरित समाधान की उम्मीद है
बाकी मांगों पर नीति-स्तर पर समीक्षा की जाएगी
अगली मीटिंग में यह स्पष्ट होगा कि उत्तराखंड सरकार इन मांगों को लेकर क्या ठोस निर्णय लेती है।
किसान संगठन की ओर से भी यह संकेत दिया गया कि यदि वाजिब समाधान नहीं मिला, तो BKU Tomar protest आगे भी रणनीति के तहत जारी रह सकता है।

