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PPK Ramacharyulu को राज्यसभा महासचिव के पद से हटाने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना

Rajya Sabha के जनरल सेक्रेटरी PPK Ramacharyulu  को अचानक से हटाने पर विपक्ष मोदी सरकार पर हमलावर हो गया। राज्यसभा महासचिव डॉ.पीपीके रामाचार्युलु की नियुक्ति दो महीने पहले ही हुई थी। अब उन्हें सरकार ने इस पद से हटा दिया है।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व आईआरएस अधिकारी पीसी मोदी को राज्यसभा के महासचिव के रूप में अब नियुक्त किया गया है। विपक्ष ने पीपीके रामाचार्युलु को हटाने के कारणों को सरकार से बताने की मांग की है।रामाचार्युलु ने एक सितंबर को राज्यसभा के महासचिव के रूप में पदभार संभाला था। वह उस पद पर पहुंचने वाले पहले राज्यसभा सचिवालय के अधिकारी थे। अब उन्हें हटा दिया गया है और उन्हें “सलाहकार” के रूप में नियुक्त किया गया है।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया- “यह आश्चर्यजनक और चौंकाने वाला है। जब सत्र पहले ही बुलाया जा चुका था, तो अचानक यह फैसला क्यों लिया गया, इसके क्या कारण हैं? इसके पीछे क्या उद्देश्य और मंशा है, हमें यह पता लगाना होगा”।

खड़गे ने आगे मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा- “क्या उन्होंने भारत के उपराष्ट्रपति से परामर्श किया है जो सदन के अध्यक्ष भी हैं, हम नहीं जानते। वह भी हमें पता लगाना होगा। उन्होंने इतनी जल्दी में एक नया महासचिव क्यों नियुक्त किया है? उन्होंने रामाचार्युलु की जगह क्यों ली, जिन्हें सिर्फ दो महीने पहले नियुक्त किया गया था, जब उनके हस्ताक्षर से सत्र बुलाया गया था”?

राज्यसभा में कांग्रेस के चीफ व्हिप जयराम रमेश ने ट्वीट कर इस फैसले की ओलोचना की है। उन्होंने कहा-“बिल्कुल आश्चर्य नहीं हुआ। डॉ पीपीके रामाचार्युलु पूरी तरह से पेशेवर, गैर-पक्षपातपूर्ण और इस पद के लिए पूरी तरह से योग्य हैं।”

तृणमूल कांग्रेस और राजद ने भी सरकार के इस फैसले पर आश्चर्य जताया है। तृणमूल कांग्रेस के मुख्य सचेतक सुखेंदु शेखर रॉय ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि यह पता नहीं है कि मुश्किल से 73 दिन पहले नियुक्त किए गए एक व्यक्ति को अचानक एक आईआरएस अधिकारी से क्यों बदल दिया गया।

राज्यसभा में राजद के नेता मनोज झा ने कहा कि मुझे यह बहुत विचित्र लगता है। रामाचार्युलु एक भी सत्र में शामिल नहीं हो सके क्योंकि उनकी नियुक्ति अंतिम सत्र समाप्त होने के बाद की गई थी। और एक इस सत्र से पहले सरकार किसी नए को लेकर आ गई है, यह सवाल उठाता है।

नवनियुक्त राज्यसभा महासचिव मोदी, 1982 बैच के भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी हैं और इसी साल मई में सीबीडीटी अध्यक्ष के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे। उन्हें फरवरी 2019 में अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। इन पर कई संगीन आरोप भी लगे हैं। जून 2019 में, मुम्बई के मुख्य आयकर आयुक्त ने पीसी मोदी के खिलाफ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से एक शिकायत की थी। जिसमें अधिकारी ने “संवेदनशील मामले” को दफनाने के लिए उन्हें “चौंकाने वाले” निर्देश के रूप में बताया था।

इस शिकायत को मुख्य आयुक्त द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय और कैबिनेट सचिवालय को भी भेजा गया था। यह भी आरोप लगाया गया कि सीबीडीटी अध्यक्ष ने मुख्य आयुक्त को सूचित किया था कि उन्होंने एक विपक्षी नेता के खिलाफ “सक्सेसफुल सर्च” कार्रवाई के कारण अपना पद “सुरक्षित” कर लिया है। 

News-Desk

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