भारत-चीन को ‘हेल होल’ कहने वाले Donald Trump फिर सुर्खियों में—अब दुनिया पूछ रही है, अगला निशाना कौन?
News-Desk
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दिलचस्प बात यह रही कि बयान में जितनी तीखी भाषा थी, उतने ठोस तथ्य नहीं थे—और यही वजह है कि आलोचना भी तेज हो गई।
जन्म आधारित नागरिकता पर हमला—संविधान से ज्यादा भरोसा ‘पोल’ पर?
ट्रम्प ने अमेरिका की Birthright Citizenship व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रवासी परिवार बच्चों के जन्म के जरिए नागरिकता हासिल कर “पूरे परिवार को अमेरिका ले आते हैं।”
उन्होंने सुझाव दिया कि इस मुद्दे का फैसला अदालतों से नहीं, बल्कि देशव्यापी वोटिंग से होना चाहिए।
संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह सुझाव राजनीतिक भाषण के लिए तो उपयुक्त हो सकता है, लेकिन व्यवहारिक रूप से संभव नहीं—क्योंकि नागरिकता का अधिकार अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन से आता है, जिसे जनमत से नहीं बदला जा सकता।
कैलिफोर्निया का टेक सेक्टर—प्रतिभा का केंद्र या ट्रम्प की नई शिकायत?
ट्रम्प ने California के हाई-टेक सेक्टर का जिक्र करते हुए कहा कि वहां भारत और चीन के पेशेवरों का “दबदबा” इतना ज्यादा है कि बाकी लोगों के लिए अवसर कम रह गए हैं।
यह दावा उस उद्योग के बारे में किया गया जिसे दुनिया “ग्लोबल टैलेंट इकोसिस्टम” कहती है।
विश्लेषकों का कहना है कि सिलिकॉन वैली में भारतीय इंजीनियरों की मौजूदगी योग्यता की वजह से है, न कि किसी राष्ट्रीय प्राथमिकता नीति की वजह से—जैसा ट्रम्प संकेत दे रहे थे।
ACLU भी निशाने पर—मानवाधिकार संगठन या राजनीतिक विरोधी?
ट्रम्प ने American Civil Liberties Union (ACLU) पर आरोप लगाया कि यह संगठन अवैध प्रवासियों को फायदा पहुंचाने वाली नीतियों का समर्थन करता है।
उन्होंने यहां तक सुझाव दिया कि इस संगठन पर संगठित अपराध से जुड़े कानून लागू होने चाहिए।
मानवाधिकार विशेषज्ञों ने इस बयान को लोकतांत्रिक संस्थाओं पर “अनावश्यक आक्रामक टिप्पणी” बताया।
स्वास्थ्य सेवाएं, वेलफेयर सिस्टम और प्रवासी—पुराना आरोप, नई प्रस्तुति
ट्रम्प ने दावा किया कि प्रवासी अमेरिकी स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी योजनाओं का अत्यधिक उपयोग करते हैं और इसका बोझ करदाताओं पर पड़ता है।
हालांकि कई स्वतंत्र अध्ययनों में पाया गया है कि प्रवासी श्रमिक अमेरिकी अर्थव्यवस्था में कर और श्रम दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
इसके बावजूद यह मुद्दा अमेरिकी चुनावी राजनीति में बार-बार लौटता रहता है—और ट्रम्प ने इसे फिर सामने ला दिया।
भारत-चीन को ‘हेल होल’ कहना—बयान या कूटनीतिक जोखिम?
ट्रम्प की सबसे ज्यादा चर्चा इसी टिप्पणी को लेकर हुई जिसमें उन्होंने भारत और चीन जैसे देशों के लिए “हेल होल” शब्द का इस्तेमाल किया।
कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक साझेदार देशों के बारे में इस तरह की भाषा न केवल असामान्य है, बल्कि रणनीतिक रूप से भी असुविधाजनक मानी जाती है।
सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने इस बयान को “बिना आधार का” और “अनावश्यक रूप से आक्रामक” बताया।
यह पहली बार नहीं—ट्रम्प का बयान इतिहास पहले से लंबा है
ट्रम्प पहले भी कई देशों और नेताओं पर तीखी टिप्पणियां कर चुके हैं।
उन्होंने अतीत में यूरोपीय देशों, अफ्रीकी राष्ट्रों और अंतरराष्ट्रीय नेताओं पर विवादित बयान दिए हैं। यहां तक कि Emmanuel Macron के परिवार को लेकर भी उनकी टिप्पणी वैश्विक बहस का विषय बनी थी।
आलोचकों का कहना है कि यह शैली अक्सर नीति से ज्यादा राजनीतिक संदेश देने के लिए अपनाई जाती है।
14वां संशोधन—जिसने गुलामी खत्म होने के बाद नागरिकता दी थी
Birthright Citizenship अमेरिका में 1868 में लागू 14वें संशोधन से आती है।
इसका उद्देश्य गृहयुद्ध के बाद अश्वेत नागरिकों को अधिकार देना था। बाद में इसकी व्याख्या इस तरह की गई कि अमेरिका में जन्म लेने वाला हर बच्चा नागरिक माना जाएगा—चाहे उसके माता-पिता का इमिग्रेशन स्टेटस कुछ भी हो।
यही व्यवस्था अब राजनीतिक बहस के केंद्र में है।
‘बर्थ टूरिज्म’—राजनीतिक शब्द या वास्तविक समस्या?
ट्रम्प ने तथाकथित “बर्थ टूरिज्म” का मुद्दा भी उठाया और कहा कि कई परिवार नागरिकता पाने के लिए बच्चों को अमेरिका में जन्म दिलाते हैं।
Pew Research Center की रिपोर्ट के अनुसार लाखों भारतीय मूल के बच्चों को अमेरिका में जन्म के आधार पर नागरिकता मिली है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसे “रणनीतिक प्रवास योजना” कहना अतिसरलीकरण होगा।
कोर्ट बनाम कार्यकारी आदेश—कानूनी लड़ाई जारी
20 जनवरी 2025 को ट्रम्प ने Birthright Citizenship सीमित करने का आदेश जारी किया था।
कुछ ही दिनों बाद फेडरल कोर्ट ने इस आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी। इसके बाद कई अदालतों में इस आदेश को चुनौती दी गई और मामला अभी भी न्यायिक प्रक्रिया में है।
यानी जिस व्यवस्था को वे बदलना चाहते हैं, वही व्यवस्था अभी उनके आदेश की समीक्षा कर रही है।
आलोचना क्यों तेज हुई?
विश्लेषकों के अनुसार तीन कारणों से यह बयान विवादित बना:
- भारत और चीन जैसे देशों को “हेल होल” कहना
- टेक सेक्टर में प्रवासियों पर सामान्यीकृत आरोप
- अदालतों की भूमिका पर सार्वजनिक अविश्वास
इसी वजह से कई राजनीतिक टिप्पणीकारों ने इसे “नीतिगत बयान से ज्यादा चुनावी बयान” बताया।

