वैश्विक

ब्लैक सी में ड्रोन युद्ध: Ukraine ने रूसी ‘शैडो फ्लीट’ के टैंकर कैरोस और विराट को उड़ाया—दोनों जहाज जलकर निष्क्रिय, तेल सप्लाई पर बड़ा झटका

ब्लैक सी में शनिवार तड़के एक बार फिर धमाके गूंजे और समुद्र की लहरों पर फैलते धुएं ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया। Ukraine सेना ने रूस के दो बड़े तेलवाहक जहाज—‘विराट’ और ‘कैरोस’ पर हुए ड्रोन हमलों का वीडियो जारी किया है, जिसमें समुद्र के नीचे से आने वाले ‘सी बेबी’ नामक जल-ड्रोन सीधे टैंकरों से टकराते दिखते हैं।
इन दोनों जहाजों को रूस की ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा माना जाता है, जो अलग-अलग देशों के झंडे लगाकर प्रतिबंधों से बचते हुए रूसी तेल को विश्व बाजारों में पहुंचाने के लिए बदनाम है।
यूक्रेन ने आधिकारिक रूप से इस drone attack on Russian oil tankers की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि यह ऑपरेशन “पूरी तरह टार्गेटेड” था और रूस की तेल सप्लाई चेन को कमजोर करने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।


दोनों टैंकर रूस की शैडो फ्लीट से जुड़े—गैंबिया का झंडा लेकिन माल रूसी

हमले के समय विराट और कैरोस दोनों पर गैंबिया का झंडा लगा था, जबकि वे रूसी क्रूड ऑयल ढो रहे थे।
रूस पर लगे अंतरराष्ट्रीय तेल प्रतिबंधों के बाद मॉस्को ऐसे जहाजों का इस्तेमाल करता है, जो—

  • झंडे बदलते रहते हैं,

  • मालिकाना जानकारी छिपाते हैं,

  • AIS ट्रांसपोंडर बंद करके चलते हैं,

  • और हमेशा निगरानी से बचने की कोशिश करते हैं।

विराट (M/T Virat) पहले बारबाडोस, कोमोरोस, लाइबेरिया और पनामा के झंडों से भी चल चुका है और जनवरी 2025 में इसे एक चीनी कंपनी को बेचा गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बेहद चालाकी से ऑपरेट होने वाली रूस की “शैडो फ्लीट” के सबसे सक्रिय जहाजों में शामिल था।
इसके ठीक साथ चल रहा ‘कैरोस’ (Kairos) भी इसी क्लस्टर का हिस्सा माना जाता है, और ब्लैक सी में रूसी तेल ट्रांसफर ऑपरेशन का महत्वपूर्ण वाहक था।


पहला धमाका शुक्रवार, दूसरा शनिवार—विराट पर दो दिन में दो ड्रोन स्ट्राइक

सूत्रों के मुताबिक, विराट टैंकर पर पहला हमला शुक्रवार को हुआ। उस धमाके के बाद जहाज को हल्का नुकसान बताया गया था और 20 क्रू मेंबर्स को बचा लिया गया था।
लेकिन शनिवार सुबह दूसरा और ज्यादा खतरनाक हमला हुआ, जिसमें पानी के भीतर चलने वाले ‘सी बेबी’ ड्रोन ने टैंकर को सीधा निशाना बनाया।
इस दोहरे हमले से विराट बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, और तुर्किये के तटरक्षक अधिकारियों के अनुसार—

  • उसके ढांचे में बाहर से आए बड़े प्रभाव के निशान मिले हैं

  • आग रोकना मुश्किल हो गया

  • विस्फोट पानी के नीचे से हुआ प्रतीत होता है

  • और जहाज अब परिचालन योग्य स्थिति में नहीं है

हमले के दौरान दहशत इतनी थी कि विराट का चालक दल ओपन फ्रीक्वेंसी रेडियो पर लगातार चिल्ला रहा था
“यह विराट है! मदद चाहिए! ड्रोन हमला! मेडे… मेडे… मेडे!”
यह संदेश अब अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है।


कैरोस पर जोरदार विस्फोट—25 क्रू मेंबर सुरक्षित, लेकिन जहाज जलता रहा

दूसरा जहाज कैरोस (Kairos) भी समुद्र में तैरता अग्निकुंड बन गया।
हमले के बाद इसमें भीषण आग लग गई और धुएं का बड़ा गुबार कई किलोमीटर दूर तक देखा गया।
तुर्किये ने घटनास्थल के नज़दीक पहुंचकर मदद की और सभी 25 क्रू मेंबर्स को सुरक्षित निकाला, लेकिन जहाज को बचाने में सफलता नहीं मिली।

यूक्रेन की खुफिया एजेंसी SBU ने कहा—
“दोनों जहाजों में गंभीर क्षति हुई है, और वे आगे इस्तेमाल नहीं किए जा सकेंगे। रूस की तेल सप्लाई चेन पर भारी असर पड़ेगा।”


SBU और नौसेना का संयुक्त ऑपरेशन—‘सी बेबी’ ड्रोन का घातक परीक्षण सफल

यूक्रेन ने पुष्टि की कि यह हमला SBU (यूक्रेन की सुरक्षा एजेंसी) और नेवी की विशेष टीम द्वारा मिलकर किया गया एक हाई-प्रिसीजन ऑपरेशन था।
सीएनएन के सूत्रों ने भी बताया कि—

  • हमला पहले से पूरी तरह प्लान किया गया था

  • अंडरवॉटर और सरफेस दोनों तरह के ड्रोन उपयोग हुए

  • टक्कर के तुरंत बाद कई सेक्शन में आग लग गई

  • जहाजों के इंज़नियरिंग कंपार्टमेंट्स में बड़ी क्षति हुई

  • परिणामस्वरूप दोनों टैंकर निष्क्रिय हो गए

यह हमला यूक्रेन की समुद्री युद्ध क्षमता की नई रणनीति की ओर संकेत करता है, जिसमें रूस की शैडो फ्लीट को लक्ष्य बनाकर उसकी ऊर्जा सप्लाई लाइनों को बाधित करने की नीति अपनाई जा रही है।


विराट पर अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ पहले ही लगा चुके थे प्रतिबंध

विराट को लेकर एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि—

  • अमेरिका ने जनवरी 2025 में इसे प्रतिबंधित किया था

  • इसके बाद ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने भी इसे अपनी ब्लैकलिस्ट में डाल दिया

  • जहाज लगातार झंडे और नाम बदलकर निगरानी से बचता रहा

  • इसे रूस की “सबसे खतरनाक शैडो फ्लीट यूनिट्स” में से एक माना जाता था

पश्चिमी एजेंसियों के अनुसार विराट की गतिविधियाँ बार-बार संदेह पैदा करती थीं और यह अक्सर अपने AIS सिस्टम को बंद रखता था, जिससे यह समुद्र के मानचित्र पर गायब हो जाता था।


हमले तुर्किये के जल क्षेत्र के बाहर—अंकारा सिर्फ बचाव में लगी

तुर्किये के परिवहन मंत्री अब्दुलकादिर उरालोग्लू ने बताया कि—

  • दोनों हमले तुर्किये के क्षेत्रीय जल क्षेत्र के बाहर हुए

  • इसलिए तुर्किये का दायित्व केवल बचाव अभियानों तक सीमित था

  • तटीय गार्ड्स ने क्रू को सुरक्षित निकालकर मानवीय सहायता दी

  • जहाजों पर ‘बाहरी प्रभाव के निशान’ साफ़ दिखाई दे रहे थे

  • यह स्पष्ट है कि विस्फोट माइन, रॉकेट या समुद्री ड्रोन के कारण हुआ

तुर्किये की ओर से यह बयान आने के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान ब्लैक सी में बढ़ती सैन्य गतिविधि पर और ज्यादा केंद्रित हो गया है।


रूस की ओर से चुप्पी—लेकिन समुद्री व्यापार जगत में हड़कंप

हमले पर रूस ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
हालांकि समुद्री व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि यह हमला रूस की “शैडो फ्लीट नेटवर्क” के लिए बड़ा झटका है क्योंकि—

  • दो बड़े जहाजों का निष्क्रिय होना सीधा तेल एक्सपोर्ट क्षमता कम करेगा

  • बीमा कंपनियाँ अब शैडो फ्लीट जहाजों से और दूरी बनाएंगी

  • समुद्री मार्गों पर निगरानी बढ़ेगी

  • और ब्लैक सी पहले से ज्यादा उच्च-जोखिम क्षेत्र घोषित हो सकता है

अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी इस घटना का असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।


AIS बंद कर चलने वाली ‘शैडो फ्लीट’ पर यूक्रेन का संदेश—“छिपकर नहीं बच सकते”

ये दोनों जहाज अपने AIS (Automatic Identification System) को बंद रखकर चलते थे, जो रूस की शैडो फ्लीट की आम रणनीति है।
लेकिन यूक्रेन के अनुसार “अब समुद्र में छिपना आसान नहीं रहा।”
विशेषज्ञों का कहना है कि इस हमले ने यह संदेश दुनिया को दिया है कि—

  • समुद्र के नीचे चलने वाले ड्रोन आधुनिक युद्ध का नया चेहरा हैं

  • बड़े से बड़ा जहाज भी अब ‘अदृश्य’ रहकर सुरक्षित नहीं है

  • और रूस के तेल परिवहन नेटवर्क को 2025 में सबसे बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है


ब्लैक सी में हुए इन ड्रोन हमलों ने यूक्रेन-रूस संघर्ष को एक नए मोड़ पर ला दिया है। ‘विराट’ और ‘कैरोस’ जैसे बड़े टैंकरों का निष्क्रिय होना रूस की शैडो फ्लीट और उसकी तेल सप्लाई चेन पर गहरा प्रभाव डालने जा रहा है। समुद्र के भीतर से आने वाले सी-बेबी ड्रोन की सफलता बताती है कि आधुनिक युद्धक्षेत्र अब सिर्फ जमीन या हवा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समुद्र की गहराइयों तक पहुंच चुका है। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह संघर्ष ब्लैक सी को आने वाले महीनों में और ज्यादा अस्थिर बनाएगा।

 

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