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NATO में शामिल नहीं होगा Ukraine: Volodymyr Zelensky, US सीनेट ने की Putin द्वारा किए गए अत्याचारों के जांच की मांग

US सीनेट ने यूक्रेन पर हमले को लेकर युद्ध अपराधों के लिए रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin और उनके प्रशासन की जांच कराने की मांग करने वाले एक प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया. सीनेटर लिंडसे ग्राहम के प्रस्ताव में कहा गया है कि सीनेट पुतिन के निर्देश पर रूसी सैन्य बलों द्वारा किए जा रहे ‘‘मानवता के खिलाफ हिंसा, युद्ध अपराधों, अपराधों’’ की कड़ी निंदा करती है. 

युद्ध अपराधों के तौर पर जांच

यह प्रस्ताव संभावित युद्ध अपराधों के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालतों को Vladimir Putin, उनकी सुरक्षा परिषद और सैन्य नेताओं की जांच कराने के लिए प्रेरित करता है. सीनेट में बहुसंख्यक नेता चक शूमर ने कहा, ‘‘इन अत्याचारों की युद्ध अपराधों के तौर पर जांच की जानी चाहिए.’’ अमेरिकी संसद में दोनों दलों के सांसदों ने यूक्रेन में रूस के युद्ध के खिलाफ एकजुटता दिखायी है. सीनेट में इस प्रस्ताव को मंगलवार को निर्विरोध पारित कर दिया गया. 

आज यूक्रेन और रूस के युद्ध का 21वां दिन है. 21 दिनों से चल रही इस जंग ने यूक्रेन के कई शहरों को तबाह कर दिया है. लाखों लोग पलायन कर चुके हैं. इस बीच अमेरिका और उसके सहयोगी देश रूस पर लगातार प्रतिबंध लगा रहे हैं और दोनों देशों के राजनेताओं से बात कर जंग रोकने के प्रयास में लगे हुए हैं. इसी बीच यूक्रेन ने ऐलान कर दिया कि वह नाटो में शामिल नहीं होंगा. 

यूक्रेन के इस ऐलान के बाद माना जा रहा है कि रूस का तेवर नरम हो सकता है. क्योंकि यूक्रेन को नाटो में शामिल होने से रोकना युद्ध के सबसे बड़े कारणों में से था. इसके अलावा आज भी रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत होनी है. 

युद्ध अपराधों के तौर पर जांच

रूस की ओर से भारत को सस्ते में कच्चा तेल ऑफर देने के बाद इस इसे लेकर अमेरिका की प्रतिक्रिया सामने आई है. यह प्रतिक्रिया वाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने दी है. एक्सपर्ट की मानें तो यह ऑफर भविष्य में भारत और अमेरिका के संबंधों की दिशा मोड़ सकता है. आइए विस्तार से समझते हैं पूरा मामला.

कच्चे तेल को सस्ते में देने के रूस के ऑफर को भारत की ओर से स्वीकार किए जाने की संभावना पर वाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने कहा है कि, उस समय जब इतिहास की किताबें लिखी जा रही हैं तो आप कहां खड़े होना चाहते हैं. रूसी नेतृत्व के लिए समर्थन विनाशकारी प्रभाव वाले आक्रमण का समर्थन है.

दरअसल अमेरिका और कई यूरोपीय देशों ने रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद कर दिया है. इसके अलावा रूस पर कई और प्रतिबंध लगाए गए हैं. इन सब वजहों से उसे काफी आर्थिक नुकसान हो रहा है. इसे देखते हुए रूस ने भारत को सस्ते में कच्चा तेल और अन्य कमोडिटीज आइटम उपलब्ध कराने की बात कही है. हालांकि भारत ने अभी इस ऑफर को स्वीकार नहीं किया है, लेकिन चर्चा है कि भारत इसे स्वीकार कर सकता है.

अगर भारत इस ऑफर को ठुकराता है, तो लोगों को महंगाई से बड़ी राहत मिल सकती है. अभी कच्चे तेल की कीमत अधिक होने की वजह से पेट्रोल और डीजल ही नहीं, बल्कि अन्य चीजों के दाम भी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. अगर भारत को सस्ते में तेल मिलेगा तो बाकी चीजें भी सस्ती होंगी. वहीं इसके नुकसान भी हो सकते हैं. दरअसल अमेरिका और दुनिया के अन्य देश जिस तरह से रूस के खिलाफ सख्त हैं औऱ उस पर प्रतिबंध लगा रहे हैं, ऐसे में उसके साथ व्यापार करने वालों के लिए भविष्य में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साथ संबंध अच्छे रखना थोड़ा मुश्किल हो सकता है.

युद्ध रोकने के लिए प्रयास करते दिख रहे हैं Volodymyr Zelensky

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध 21वें दिन में पहुंच चुका है. अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की ओर से लगाए गए तमाम प्रतिबंधों के बाद रूस युद्ध रोकने को तैयार नहीं. इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelensky युद्ध रोकने के लिए प्रयास करते दिख रहे हैं. इसी कड़ी में यूक्रेन ने ऐलान किया है कि वह नाटो (NATO) में शामिल नहीं होगा. इस ऐलान से रूस के तेवर भी नरम हो सकते हैं. क्योंकि यह युद्ध के बड़े कारणों में से एक था. इसके अलावा आज रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत भी होनी है.

यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelensky ने मंगलवार को कहा था कि यूक्रेन नाटो में शामिल नहीं होगा. इसे युद्ध रोकने की कोशिश के रूप में देखा गया है. दरअसल, रूस ने यूक्रेन पर हमले से पहले और हमले के बाद भी इसे एक बड़ा कारण बताया था. रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन भी इस बात को कई बार कह चुके हैं कि वह नहीं चाहते कि यूक्रेन नाटो का सदस्य बने.

युद्ध की सबसे बड़ी वजह भी यही थी. दरअसल कई साल से अमेरिका यूक्रेन को नाटो का सदस्य बनाने की कोशिश में लगा था. यूक्रेन भी सदस्य बनने की तैयारी में था. इस बीच रूस को लगने लगा कि नाटो के जरिए उसे घेरने की तैयारी हो रही है. ऐसे में रूस और यूक्रेन के बीच तनाव बढ़ गया और नतीजा युद्ध तक पहुंच गया. अब जबकि यूक्रेन यह आश्वासन दे रहा है कि वह नाटो में शामिल नहीं होगा, तो रूस इस युद्ध को रोक सकता है.

अधिकतर शहर खंडहर में तब्दील

 इन सबके बीच यूक्रेन के अधिकतर शहर खंडहर में तब्दील हो चुके हैं. खेरसॉन, खारकीव, मारियुपोल, इरपीन जैसे बड़े शहरों में बमबारी और मिसाइल से क्षतिग्रस्त इमारतें. खंडहर घर, स्कूल और अस्पताल खूब नजर आ रहे हैं. रूसी सैनिक अब कीव पर भी लगातार जोर लगाए हुए है. रूसी हमले के खतरे को देखते हुए कीव में कल सुबह तक के लिए सख्त कर्फ्यू लगा दिया गया है. यूक्रेन को लगता है कि रूस की स्पेशल फोर्सेज राष्ट्रपति जेलेंस्की पर हमला कर सकती है. मंगलवार को कीव के बाहरी इलाके में दो अमेरिकी पत्रकारों की गोलीबारी में मौत हो गई थी, जबकि 1 की हालत गंभीर है.

इस बीच यूक्रेन के लोगों को अपना समर्थन देने के लिए तीन पड़ोसी देशों पोलैंड, चेक रिपब्लिक और स्लोवेनिया के प्रधानमंत्री ट्रेन से कीव पहुंचे और जेलेंस्की से मुलाकात की. हालांकि इस बैठक से पहले जेलेंस्की ने फिर से नाटो में शामिल न होने की बात कही, जिससे रूस के नरम पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है. हालांकि इसका कितना असर होगा ये दोनों देशों के बीच आज होने वाली बातचीत के बाद ही पता चलेगा.

24 मार्च को NATO सम्मेलन का आयोजन

रूस और यूक्रेन के बीच के हालात को देखते हुए नाटो ने 24 मार्च को एक सम्मेलन का आयोजन किया है. नाटो के महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने ट्वीट करके इस बात की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि, मैंने 24 मार्च को नाटो मुख्यालय में एक सम्मेलन आयोजित किया है. इसमें रूस का यूक्रेन पर हमले, यूक्रेन के लिए हमारे मजबूत समर्थन और नाटो के प्रतिरोध और रक्षा को और मजबूत करने को लेकर चर्चा होगी. इस महत्वपूर्ण समय में अमेरिका और यूरोप को एक साथ खड़े रहना चाहिए. इस सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन भी शामिल होंगे.

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