उत्तर प्रदेश

Fatehpur में पीएचसी में मरीज की मौत, पेट दर्द से तड़पते रहे आधे घंटे; लापरवाही का आरोप, ग्रामीणों में हंगामा

Fatehpur के बहुआ कस्बे में सनसनी फैला दी। पीएचसी के चबूतरे पर पेट दर्द से तड़पते हुए रामआसरे कुशवाहा (50) नामक हलवाई की मौत हो गई। घटना के बाद मरीज के परिजनों और ग्रामीणों ने पीएचसी में हंगामा किया और चिकित्सक व स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया। मृतक अविवाहित थे और आजाद नगर में रहते थे।

घटना के अनुसार दोपहर करीब ढाई बजे अचानक तेज पेट दर्द होने पर परिजन रामआसरे कुशवाहा को पीएचसी ले गए। भतीजे हरिश्चंद्र ने बताया कि मरीज को चबूतरे पर लिटाकर इलाज के लिए स्टाफ को बुलाया गया, लेकिन करीब आधे घंटे तक कोई भी कर्मी उपस्थित नहीं हुआ। इस दौरान उनकी तड़पती मौत हो गई।


पीएचसी प्रभारी मौजूद, स्टाफ की निष्क्रियता पर सवाल

घटना के समय पीएचसी प्रभारी डॉ. शैलेंद्र गौतम मौजूद थे, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्टाफ ने ध्यान नहीं दिया। सूचना मिलने पर चेयरमैन के प्रतिनिधि कामता सोनी घटनास्थल पहुंचे और चिकित्सक व स्टाफ को कर्तव्य पालन की नसीहत दी। परिजन शव लेकर घर चले गए।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पीएचसी में डॉक्टर और स्टाफ अक्सर अनुपस्थित रहते हैं, जिससे मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ता है। ग्रामीणों में आलोक गौतम, राजू, संतोष कुमार, अनिल कुमार, आजम, इदरीस आदि शामिल थे, जिन्होंने प्रशासनिक लापरवाही पर चिंता व्यक्त की।


मरीज की तड़प और प्रशासनिक जवाबदेही पर विवाद

भतीजे हरिश्चंद्र ने कहा कि चबूतरे पर लिटाकर इलाज के लिए लगातार मदद के लिए आवाज़ लगाने के बावजूद स्टाफ नहीं आया। ग्रामीणों ने कहा कि स्वास्थ्य केंद्र में इस तरह की लापरवाही आम है और इससे आम जनता की जान खतरे में पड़ती है।

पीएचसी प्रभारी डॉ. शैलेंद्र गौतम ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि वे लंच के बाद बाहर गए थे और उस समय कोई मरीज दिखाई नहीं दिया। उन्होंने कहा कि मामले की सूचना मिलने पर उन्होंने तत्काल जांच करने का भरोसा दिया है।


ग्रामीणों ने सीएमओ से की शिकायत, पीएचसी व्यवस्था पर सवाल

घटना के बाद ग्रामीणों ने सीएमओ से फोन पर शिकायत की। उनका आरोप है कि स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है और प्रशासनिक तंत्र में सुधार की सख्त जरूरत है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसी लापरवाही जारी रही तो आने वाले समय में और भी जानलेवा घटनाएं हो सकती हैं। उन्होंने प्रशासन से तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की।


पीएचसी में सुधार और जवाबदेही की आवश्यकता

घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ की अनुपस्थिति और लापरवाही गंभीर समस्या है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केवल चिकित्सा सुविधा ही नहीं बल्कि आपातकालीन स्थिति में जीवनरक्षक भी हैं।

इसलिए स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ की उपस्थिति, त्वरित आपातकालीन प्रतिक्रिया और जवाबदेही सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। प्रशासनिक निगरानी और नियमित निरीक्षण से ही ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकती है।


फतेहपुर के बहुआ कस्बे में पीएचसी में पेट दर्द से तड़पते हुए हलवाई रामआसरे कुशवाहा की मौत ने स्वास्थ्य केंद्रों में लापरवाही और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच हुए विवाद ने यह दिखाया कि आपातकालीन स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई कितना महत्वपूर्ण है। घटना के बाद प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ समय पर उपस्थित रहें और मरीजों को उचित इलाज तुरंत उपलब्ध हो।

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