उत्तर प्रदेश

Hathras: छात्रा से दुष्कर्म के प्रयास के आरोप में जेल गए ट्यूशन शिक्षक को अदालत ने किया बरी, साक्ष्य के अभाव में मिला संदेह का लाभ

Hathras न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दुष्कर्म के प्रयास के आरोप में जेल गए एक ट्यूशन शिक्षक को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका, इसलिए आरोपी को संदेह का लाभ दिया जाता है।

यह मामला हाथरस जिले के एक गांव का है, जहां अक्टूबर 2024 में दर्ज हुई शिकायत के बाद पुलिस ने ट्यूशन शिक्षक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। लंबे समय तक चले न्यायिक परीक्षण के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया।


कक्षा दो की छात्रा से जुड़ा था मामला

घटना 16 अक्टूबर 2024 की बताई गई थी। उस दिन कक्षा दो में पढ़ने वाली छह वर्षीय छात्रा गांव में ही ट्यूशन पढ़ने के लिए गई थी।

परिजनों के अनुसार जब बच्ची ट्यूशन से घर लौटी तो उसने बताया कि ट्यूशन पढ़ाने वाले शिक्षक ने उसके साथ अशोभनीय हरकत की। बच्ची की बात सुनने के बाद परिवार के लोग बेहद चिंतित हो गए और मामले की जानकारी पुलिस को दी गई।


दादा की तहरीर पर दर्ज हुआ मुकदमा

परिवार की ओर से छात्रा के दादा ने पुलिस को लिखित तहरीर दी। इस तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपी ट्यूशन शिक्षक के खिलाफ दुष्कर्म के प्रयास और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया।

मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के अगले ही दिन उसे न्यायालय में पेश किया गया और बाद में जेल भेज दिया गया।


पुलिस ने कराई चिकित्सकीय जांच

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने छात्रा का चिकित्सकीय परीक्षण भी कराया। इसके साथ ही बच्ची के बयान भी दर्ज किए गए।

जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी थी, जिसके बाद मामला न्यायालय में विचाराधीन हो गया।


पॉक्सो अदालत में चला मामला

यह मामला विशेष न्यायाधीश पॉक्सो-प्रथम की अदालत में सुनवाई के लिए पहुंचा। न्यायालय में ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष दोनों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं।

सुनवाई के दौरान कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए और मामले से जुड़े दस्तावेजों को भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया।


विचारण में सामने आया अलग पक्ष

न्यायालय में चली सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया। बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि ट्यूशन के दौरान बच्ची ने होमवर्क पूरा नहीं किया था, जिस कारण शिक्षक ने उसे डांटा था।

बचाव पक्ष का दावा था कि इसी घटना के बाद गलतफहमी की स्थिति बनी और शिक्षक पर गंभीर आरोप लगा दिए गए।


अभियोजन पक्ष ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका

Hathras Tuition Teacher Case की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष ऐसा कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका जिससे आरोपी शिक्षक के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि हो सके।

अदालत ने यह भी माना कि केवल आरोप के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि उसके समर्थन में स्पष्ट और विश्वसनीय साक्ष्य मौजूद न हों।


6 मार्च को सुनाया गया फैसला

मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद 6 मार्च को अदालत ने अपना फैसला सुनाया। न्यायालय ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी साबित नहीं किया जा सकता।

इसी आधार पर अदालत ने आरोपी ट्यूशन शिक्षक को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया और उसे रिहा करने के आदेश जारी किए।


न्यायालय के फैसले के बाद चर्चा

अदालत के इस फैसले के बाद यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। जहां एक ओर अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया, वहीं इस घटना ने समाज में बच्चों की सुरक्षा और ऐसे मामलों की संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों से जुड़े मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया अत्यंत सावधानी और संवेदनशीलता के साथ की जानी चाहिए, ताकि सच सामने आ सके और किसी निर्दोष को नुकसान न हो।


हाथरस की इस घटना में अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी ट्यूशन शिक्षक को दोषमुक्त कर दिया है। न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को केवल आरोपों के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि आरोपों को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध न हों। यह मामला न्यायिक प्रक्रिया की उस व्यवस्था को भी रेखांकित करता है, जहां हर आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई और न्याय पाने का अधिकार प्राप्त है।

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