India-EU Free Trade Deal से पाकिस्तान में हड़कंप: एक करोड़ नौकरियों पर खतरे का दावा, यूरोपीय बाजार में बढ़ी भारत की पकड़
India EU FTA impact on Pakistan—यही वाक्य इस समय दक्षिण एशिया और यूरोपीय व्यापारिक गलियारों में गूंज रहा है। भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुए ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) ने न केवल दो महाद्वीपों के बीच आर्थिक रिश्तों को नया आयाम दिया है, बल्कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और उसके निर्यात उद्योगों में भी गहरी चिंता पैदा कर दी है। इस डील को लेकर पाकिस्तान में आशंका जताई जा रही है कि करीब एक करोड़ नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं और अरबों डॉलर का संभावित नुकसान हो सकता है।
🔴 भारत-EU FTA: एक वैश्विक आर्थिक गठजोड़
भारत और यूरोपियन यूनियन ने 27 जनवरी को 18 साल की लंबी बातचीत के बाद इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते को दुनिया की सबसे बड़ी व्यापारिक डील्स में से एक बताया जा रहा है, क्योंकि यह ऐसी दो अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ता है, जो मिलकर दुनिया की करीब 25% आबादी, 25% वैश्विक GDP और लगभग दो अरब लोगों का साझा बाजार बनाती हैं।
इस समझौते के तहत भारत के लगभग 95% लेबर-बेस्ड उत्पादों को यूरोपीय बाजार में बिना टैक्स के पहुंच मिलने की संभावना है, जबकि यूरोप से भारत आने वाली लग्जरी कारें और वाइन जैसी वस्तुएं भी सस्ती हो जाएंगी।
🔴 पाकिस्तान में चिंता: नौकरियों और निर्यात पर मंडराता खतरा
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस डील के बाद पाकिस्तान को डर है कि उसके निर्यात पर बड़ा असर पड़ेगा। पाकिस्तान और EU के बीच कुल व्यापार करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये का बताया जा रहा है। ऐसे में अगर यूरोपीय बाजार में भारत की पहुंच आसान हो जाती है, तो पाकिस्तान की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त कमजोर पड़ सकती है।
पाकिस्तान के पूर्व वाणिज्य मंत्री गोहर एजाज ने सोशल मीडिया पर लिखा कि EU के साथ पाकिस्तान का “जीरो-टैरिफ हनीमून” खत्म हो गया है और करीब एक करोड़ नौकरियां खतरे में हैं। उन्होंने सरकार से उद्योगों को सस्ती बिजली, कम टैक्स और आसान कर्ज देने की मांग की, ताकि वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना कर सकें।
🔴 GSP प्लस योजना: पाकिस्तान की सबसे बड़ी ताकत
पाकिस्तान को लंबे समय से यूरोपीय बाजार में एक विशेष बढ़त मिलती रही है, जिसका कारण EU की GSP Plus योजना है। इस योजना के तहत पाकिस्तान को अपने करीब 66% उत्पाद बिना टैक्स के यूरोप भेजने की सुविधा मिली हुई है।
इसमें खासतौर पर कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट्स जैसे उत्पाद शामिल हैं। जहां पाकिस्तान इन उत्पादों को टैक्स फ्री भेजता रहा, वहीं भारत को ऐसे ही सामान पर 9 से 12% तक टैक्स देना पड़ता था।
🔴 टेक्सटाइल सेक्टर: सबसे बड़ा दांव
पाकिस्तान का टेक्सटाइल सेक्टर उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान का टेक्सटाइल एक्सपोर्ट करीब 6.2 अरब डॉलर रहा, जबकि भारत का टेक्सटाइल एक्सपोर्ट 5.6 अरब डॉलर के आसपास था।
अब भारत-EU FTA के बाद, भारत को भी यूरोपीय बाजार में टैक्स फ्री पहुंच मिलने की उम्मीद है। इससे पाकिस्तान की वह बढ़त लगभग खत्म हो सकती है, जो उसे GSP Plus के जरिए मिली थी।
🔴 2027 का मोड़: GSP Plus का भविष्य अधर में
पाकिस्तान को GSP Plus सुविधा 2014 में मिली थी, जिसकी मियाद दिसंबर 2027 में खत्म होने वाली है। अगर इसे आगे नहीं बढ़ाया गया, तो पाकिस्तान की यह विशेष व्यापारिक सुविधा पूरी तरह खत्म हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे में पाकिस्तान के निर्यातकों को यूरोपीय बाजार में वही टैक्स देना पड़ेगा, जो अन्य देशों को देना होता है—और यही उसकी प्रतिस्पर्धा को और कमजोर कर सकता है।
🔴 EU पाकिस्तान का सबसे बड़ा निर्यात बाजार
EU, पाकिस्तान का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है। ऐसे में कारोबारी वर्ग को डर है कि भारत-EU FTA के लागू होने के बाद यूरोप में उनकी पकड़ ढीली पड़ सकती है।
ऑल पाकिस्तान टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन के प्रमुख कामरान अरशद ने कहा कि भारत अब कई सेक्टर्स में यूरोपीय बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो गया है। वहीं, FPCCI के उपाध्यक्ष साकिब फैयाज मगून ने चेतावनी दी कि एक बार अगर बाजार हाथ से निकल गया, तो उसे वापस पाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
🔴 पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशें
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि GSP Plus योजना पाकिस्तान और EU दोनों के लिए फायदेमंद रही है। इसके जरिए यूरोप को सस्ते कपड़े और रेडीमेड उत्पादों की स्थिर आपूर्ति मिलती रही है।
उन्होंने बताया कि यह मुद्दा पिछले साल हुई रणनीतिक बातचीत में उठा था और इसके बाद ब्रसेल्स स्थित EU मुख्यालय और अलग-अलग सदस्य देशों के साथ कई बैठकों में इस पर चर्चा हुई है। पाकिस्तान लगातार इस मामले को उठाने की कोशिश कर रहा है।
🔴 भारत के लिए फायदे: टैक्स फ्री पहुंच और लग्जरी आयात सस्ता
इस समझौते के लागू होने के बाद भारत के श्रम आधारित उत्पादों को यूरोपीय बाजार में बड़ी राहत मिलने की संभावना है। वहीं, यूरोप से भारत आने वाली लग्जरी कारें और वाइन भी सस्ती होंगी।
विशेष रूप से BMW और मर्सिडीज-बेंज जैसी कंपनियों की इम्पोर्टेड कारों पर टैक्स को 110% से घटाकर 10% करने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, इसके लिए सालाना 2.5 लाख गाड़ियों की सीमा तय की गई है।
🔴 लोकल असेंबली का असर
भारत में मर्सिडीज और BMW की कई लोकप्रिय कारें पहले से ही लोकल असेंबली के जरिए बनती हैं, जिन पर 15 से 16.5% तक ही ड्यूटी लगती है। इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि इन मॉडलों की कीमतों में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आएगा, लेकिन पूरी तरह इम्पोर्टेड लग्जरी कारें जरूर सस्ती हो सकती हैं।
🔴 2027 में लागू होने की संभावना
न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, इस FTA को 2027 में लागू किए जाने की संभावना है। इससे पहले दोनों पक्षों को कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
🔴 वैश्विक व्यापार संतुलन में बदलाव
India EU FTA impact on Pakistan सिर्फ एक देश की चिंता नहीं है, बल्कि यह वैश्विक व्यापार संतुलन में बदलाव का संकेत है। दक्षिण एशिया में भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और यूरोप के साथ उसके गहरे होते रिश्ते क्षेत्रीय भू-राजनीति को भी प्रभावित कर सकते हैं।
🔴 विशेषज्ञों की राय
आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान को अब अपने उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। ऊर्जा की लागत, टैक्स स्ट्रक्चर और वित्तीय सुविधाओं में सुधार के बिना यूरोपीय बाजार में टिके रहना कठिन हो सकता है।

