वैश्विक

ISIS का घिनौना चेहरा: भीख और जबरन वसूली से पल रहे आतंकी, फंड से कर रहे अय्याशी

दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकवादी संगठनों में गिना जाने वाला इस्लामिक स्टेट (ISIS) अब खुद आर्थिक बदहाली का शिकार हो चुका है। आतंक फैलाने और इस्लामी खिलाफत का सपना देखने वाला यह संगठन अब अपने खर्चे पूरे करने के लिए भीख मांगने और जबरन वसूली जैसे रास्तों पर उतर आया है।

इराक, सीरिया, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में कभी दहशत का पर्याय बने इस संगठन की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि आतंकवाद के लिए उगाही गया पैसा अब संगठन के नेताओं की अय्याशी और निजी कंपनियों की स्थापना में इस्तेमाल हो रहा है।

भीख और वसूली से चला रहे आतंकी संगठन

सूत्रों के मुताबिक, आईएसआईएस के आतंकी अब अपने खर्चों के लिए स्थानीय मुस्लिम समुदाय से जबरन वसूली कर रहे हैं। इतना ही नहीं, सोशल मीडिया और डार्क वेब के जरिए भी वे दुनिया भर में अपने समर्थकों से चंदा इकट्ठा कर रहे हैं।

ISIS के प्रोपेगेंडा मीडिया नेटवर्क ने हाल ही में एक पोस्टर जारी किया था, जिसमें मुस्लिम समुदाय से संगठन के लिए पैसे दान करने की अपील की गई थी। यह पोस्टर एक अज्ञात संगठन ‘अल-बसाइर’ द्वारा डिजाइन किया गया था, जिसे बाद में ‘फुरसान अल-तरजुमा’ नामक ग्रुप ने फ्रेंच, अंग्रेजी और अन्य भाषाओं में ट्रांसलेट कर प्रचारित किया।

चंदे की रकम से हो रही है ऐश और निजी कंपनी का निर्माण

आईएसआईएस के आतंकी जो भी पैसा चंदे और जबरन वसूली से इकट्ठा कर रहे हैं, वह संगठन की गतिविधियों में कम और आतंकियों की निजी जिंदगी सुधारने में ज्यादा लगाया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ISIS के आतंकी संगठनों में काम करने वाले कुछ प्रमुख लोग अब इन पैसों से अपनी कंपनियां खोल रहे हैं। संगठन की साइबर सुरक्षा के लिए बनाए गए ‘अफाक’ नामक ग्रुप पर आरोप है कि इसने संगठन से जुड़ा धन निजी जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया और इससे खुद का व्यापार खड़ा किया।

आईएसआईएस के आतंकी सिर्फ हथियारों और बमों पर पैसा खर्च नहीं कर रहे, बल्कि आलीशान जिंदगी जीने, महंगे कपड़े पहनने, महंगे गाड़ियां खरीदने और निजी संपत्ति खरीदने में भी लगे हैं।

ISIS के आतंकी खुद के खिलाफ ही खड़े हो रहे

इस पूरे घटनाक्रम से एक और चौंकाने वाली बात यह सामने आ रही है कि ISIS के भीतर ही आंतरिक कलह शुरू हो चुकी है।

ISIS के कई आतंकी अब अपने ही नेताओं से नाराज हो गए हैं, क्योंकि उन्हें संगठन में काम करने के बावजूद पैसा नहीं मिल रहा, जबकि शीर्ष नेताओं के लिए ऐशो-आराम का कोई अंत नहीं है।

इससे पहले भी कई बार खबरें आई हैं कि ISIS के कुछ आतंकियों ने संगठन छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया, क्योंकि उन्हें महसूस हुआ कि वे जिस ‘जिहाद’ के लिए लड़े थे, वह सिर्फ कुछ नेताओं की लालच भरी महत्वाकांक्षा का एक ढोंग था।

डोनर को दी जा रही धमकी, पैसा दो या भुगतो

ISIS के पोस्टरों में एक और खास बात देखने को मिली— इसमें उन डोनर्स को धमकी दी गई थी, जो संगठन को पैसा इकट्ठा करके मनमाने ढंग से खर्च कर रहे थे।

पोस्टर में लिखा गया था कि जो भी लोग ISIS के लिए चंदा इकट्ठा करते हैं और उसे अपने अनुसार खर्च करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इससे साफ जाहिर होता है कि संगठन के भीतर ही भ्रष्टाचार अपने चरम पर है और आतंकी अब खुद एक-दूसरे की गर्दन दबोचने पर उतर आए हैं।

ISIS की कमर टूट चुकी है?

ISIS के लगातार कमजोर होते नेटवर्क को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि अब इसकी जड़ें धीरे-धीरे उखड़ रही हैं।

इसके प्रमुख कारण ये हैं:

  1. संगठन की वित्तीय स्थिति कमजोर हो रही है – पहले जहां ISIS तेल के अवैध व्यापार और फिरौती से पैसा बनाता था, अब उसकी यह कमाई लगभग बंद हो चुकी है।
  2. आतंकी नेताओं की आपसी लड़ाई – संगठन के भीतर ही धन के दुरुपयोग को लेकर टकराव बढ़ रहा है।
  3. डोनर का भरोसा खत्म हो रहा है – जो लोग ISIS को आर्थिक सहायता देते थे, वे अब समझ गए हैं कि उनका पैसा आतंक फैलाने से ज्यादा आतंकी नेताओं की अय्याशी में खर्च हो रहा है।

आगे क्या होगा?

कई विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले कुछ वर्षों में ISIS का प्रभाव बेहद सीमित हो जाएगा।

हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि जब कोई आतंकी संगठन आर्थिक रूप से कमजोर होता है, तब वह किसी बड़े हमले को अंजाम देकर अपनी ताकत दिखाने की कोशिश करता है।

ISIS भले ही कमजोर हो रहा हो, लेकिन यह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसलिए वैश्विक स्तर पर सुरक्षा एजेंसियों को लगातार इस पर नजर रखने और इसके फंडिंग नेटवर्क को खत्म करने की जरूरत है।

News-Desk

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