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Israel ने गाजा सिटी पर कब्जे के लिए छेड़ा ऑपरेशन ‘गिदोन’स चेरीअट्स-बी’, 1.30 लाख सैनिकों की तैनाती, 10 लाख नागरिकों को खाली करने का आदेश!

तेल अवीव: Israel और गाजा के बीच चल रहे युद्ध में एक नए और भयावह अध्याय की शुरुआत हो गई है। इजराइली रक्षा मंत्रालय ने गाजा सिटी पर पूर्ण सैन्य कब्जे के लिए एक बड़े और विस्तृत अभियान की तैयारी शुरू कर दी है। इस ऑपरेशन, जिसका कोड नाम ‘गिदोन’स चेरीअट्स-बी’ रखा गया है, के तहत इजराइल 1.30 लाख सैनिकों को तैनात करने जा रहा है और गाजा सिटी से लगभग 10 लाख नागरिकों को तत्काल खाली करने का आदेश जारी किया गया है।

रिजर्व सैनिकों की बुलाई जा रही है विशाल खेप

इस बड़े पैमाने की तैयारी के एक हिस्से के रूप में, इजराइली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने 60,000 रिजर्व सैनिकों को तत्काल ड्यूटी पर बुलाने का फैसला किया है। इन सैनिकों को ड्यूटी पर जॉइन करने से कम से कम दो सप्ताह पहले नोटिस दिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, पहली खेप में 2 सितंबर को लगभग 40-50 हजार सैनिकों को बुलाया जाएगा। दूसरी और तीसरी खेप क्रमशः नवंबर-दिसंबर 2025 और फरवरी-मार्च 2026 में बुलाई जाएगी। इसके अलावा, पहले से ही ड्यूटी पर तैनात हजारों रिजर्व सैनिकों की सेवा अवधि को 30-40 दिन और बढ़ा दिया गया है।

5 डिवीजन और 12 ब्रिगेड होगी शामिल

यह सैन्य अभियान अब तक का सबसे बड़ा और सबसे जटिल होगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसमें इजराइल डिफेंस फोर्स (IDF) की 5 पूरी डिवीजनें शामिल होंगी। इन डिवीजनों के अंतर्गत 12 ब्रिगेड-लेवल टीमें काम करेंगी, जिनमें पैदल सेना, टैंक रेजिमेंट, तोपखाना, इंजीनियरिंग कोर और सपोर्ट यूनिट शामिल हैं। गाजा डिवीजन की नॉर्थ और साउथ ब्रिगेड भी इस ऑपरेशन में एक अहम भूमिका निभाएंगी। यह तैयारी इस बात का संकेत है कि इजराइल गाजा सिटी में एक लंबे और कठिन युद्ध की उम्मीद कर रहा है।

नागरिकों के लिए 7 अक्टूबर है अंतिम तिथि

इजराइली सेना ने गाजा सिटी के नागरिकों के लिए एक डेडलाइन जारी की है। शहर को पूरी तरह से खाली करने की अंतिम तिथि 7 अक्टूबर, 2025 निर्धारित की गई है। इस तिथि के बाद, IDF शहर को चारों तरफ से घेरकर अंदर की ओर बढ़ना शुरू कर देगी। नागरिकों को दक्षिणी गाजा की ओर relocate किया जाएगा, जहां उनके लिए राहत केंद्र, टेंट और फील्ड अस्पताल तैयार किए जा रहे हैं। खान यूनिस में स्थित यूरोपियन अस्पताल को भी दोबारा operational बनाया जाएगा ताकि घायलों का इलाज किया जा सके।

हमास के कब्जे वाले इलाके हैं लक्ष्य

इजराइल का प्राथमिक लक्ष्य गाजा सिटी के उन इलाकों में घुसना है, जहां हमास के पास अभी भी कई इजराइली बंधक होने की आशंका है। IDF के अनुसार, गाजा पट्टी के लगभग 75% हिस्से पर उसका नियंत्रण है, लेकिन गाजा सिटी अभी भी उस 25% इलाके में आती है जो उसके कब्जे में नहीं है। ये वे इलाके हैं जहां अब तक इजराइली सेना ने बड़े पैमाने पर ground operation नहीं किया है और जहां हमास के शीर्ष नेता छिपे हो सकते हैं।

युद्धविराम की उम्मीद अभी भी बरकरार

हालांकि, सैन्य तैयारियों के बावजूद, एक संभावना यह भी बनी हुई है कि अगर इजराइल और हमास के बीच कैदियों की रिहाई और एक स्थायी युद्धविराम पर समझौता हो जाता है, तो यह पूरा अभियान टल सकता है। हमास ने already एक प्रस्ताव पर सहमति जता दी है, जिसके तहत शुरुआती 60 दिनों के युद्धविराम के दौरान, वह जिंदा बचे इजराइली कैदियों को दो चरणों में रिहा करेगा। इस प्रस्ताव पर अमेरिका, मिस्र और कतर मध्यस्थता कर रहे हैं। लेकिन इजराइल की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह किसी भी समझौते को तभी स्वीकार करेंगे जब सभी बंधकों को एक साथ रिहा कर दिया जाएगा।

मानवीय संकट गहराता जा रहा है

इस बीच, गाजा में मानवीय संकट दिन-ब-दिन गहराता जा रहा है। यूनिसेफ की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इजराइली बमबारी और मानवीय सहायता रोकने के चलते गाजा में हर दिन औसतन 28 फिलिस्तीनी बच्चों की मौत हो रही है। अक्टूबर 2023 से अब तक 18,000 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है। बीते 24 घंटे में ही 8 लोग भुखमरी से मारे गए हैं, जिनमें एक बच्चा भी शामिल है। कुल मिलाकर, इस युद्ध में अब तक 60,933 लोगों की मौत हो चुकी है और घायलों की संख्या 1.5 लाख से भी अधिक हो गई है।

इजराइल का गाजा सिटी पर कब्जे का यह निर्णय न सिर्फ इस संघर्ष के भविष्य, बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र की स्थिरता के लिए एक गंभीर मोड़ साबित हो सकता है। एक तरफ जहां इजराइल अपने बंधकों को छुड़ाने और हमास की सैन्य क्षमता को खत्म करने पर आमादा है, वहीं दूसरी ओर गाजा का हर नागरिक जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुद� की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह तत्काल मानवीय सहायता सुनिश्चित करे और दोनों पक्षों पर एक स्थायी युद्धविराम के लिए दबाव बनाए। नहीं तो, आने वाले दिनों में मानवता के इतिहास में एक और काला अध्याय जुड़ने वाला है।

 

News-Desk

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