Kanpur: वकील को हिरासत से छुड़ाने थाने पहुंचा मेयर का बेटा, इंस्पेक्टर से हुई बहस, पुलिस ने लिखापढ़ी कर छोड़ा
News-Desk
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Anurag Pandey Kanpur, Education Scam India, Fake Degree Racket, Kanpur LLB Degree Scam, Kanpur News, Kanpur police investigation, LLB Degree Scam, Shamshad Ali Lawyer, Uttar Pradesh Crime NewsKanpur LLB Degree Scam ने उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में कानून व्यवस्था और शिक्षा प्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फर्जी एलएलबी डिग्री खरीदने के मामले में पुलिस की जांच के दौरान सोमवार शाम एक नया विवाद सामने आया, जब बाबूपुरवा निवासी अधिवक्ता शमशाद अली को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया।
जैसे ही यह खबर फैली कि पुलिस ने शमशाद अली को किदवईनगर थाने लाया है, वहां अचानक कई लोग पहुंच गए। हालात तब और गर्म हो गए जब महापौर के बेटे और अधिवक्ता अनुराग पांडेय अपने कुछ साथियों के साथ थाने पहुंच गए और पुलिस कार्रवाई का विरोध करने लगे।
करीब एक घंटे तक चले इस पूरे घटनाक्रम के दौरान थाने में बहस और हंगामे का माहौल बना रहा। बाद में पुलिस ने औपचारिक लिखापढ़ी के बाद शमशाद अली को अनुराग पांडेय के साथ जाने दिया। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी मंगलवार को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होता रहा।
फर्जी एलएलबी डिग्री रैकेट का खुलासा
Kanpur LLB Degree Scam की जड़ें उस समय सामने आईं जब किदवईनगर पुलिस ने 18 फरवरी को जूही कलां स्थित शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन के कार्यालय पर छापा मारा।
इस कार्रवाई के दौरान पुलिस को भारी मात्रा में संदिग्ध दस्तावेज मिले। जांच में सामने आया कि यहां से उत्तर प्रदेश समेत नौ राज्यों के 14 प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों की मार्कशीट और डिग्रियां बरामद हुईं।
इन दस्तावेजों के मिलने के बाद यह शक मजबूत हो गया कि यहां से बड़े स्तर पर फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र तैयार कर बेचे जा रहे थे।
गिरोह के सरगना समेत कई आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने छापेमारी के दौरान इस गिरोह के कथित सरगना रायबरेली के ऊंचाहार निवासी शैलेंद्र कुमार ओझा को गिरफ्तार किया।
इसके अलावा इस मामले में तीन अन्य आरोपियों को भी हिरासत में लिया गया, जिनमें गाजियाबाद निवासी जोगेंद्र, कौशांबी निवासी नागेंद्र मणि त्रिपाठी और शुक्लागंज निवासी अश्वनी कुमार शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार ये लोग मिलकर फर्जी डिग्री तैयार करने और उन्हें बेचने का नेटवर्क चला रहे थे।
कई अन्य आरोपियों की तलाश जारी
जांच के दौरान पुलिस को इस रैकेट में शामिल कई अन्य लोगों के नाम भी पता चले।
इनमें शुभम दुबे, शेखू, छतरपुर निवासी मयंक भारद्वाज, हैदराबाद निवासी मनीष उर्फ रवि और गाजियाबाद निवासी विनीत का नाम सामने आया है।
पुलिस फिलहाल इन सभी आरोपियों की तलाश कर रही है और उनके संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
अधिवक्ताओं को बेची गई थीं फर्जी डिग्रियां
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई।
आरोपियों ने बताया कि उन्होंने बाबूपुरवा के अजीतगंज निवासी अधिवक्ता शमशाद अली सहित करीब 10 अधिवक्ताओं को एलएलबी की डिग्री बेची थी।
इस खुलासे के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिवक्ताओं से पूछताछ शुरू की।
शमशाद अली को पूछताछ के लिए थाने लाया गया
इसी कड़ी में मंगलवार को किदवईनगर पुलिस अधिवक्ता शमशाद अली को पूछताछ के लिए थाने लेकर आई थी।
पुलिस का कहना था कि उनसे फर्जी डिग्री मामले में कुछ अहम सवाल पूछे जाने थे।
लेकिन जैसे ही यह खबर बाहर पहुंची, कई लोग थाने पहुंच गए और उन्हें छोड़ने की मांग करने लगे।
महापौर के बेटे अनुराग पांडेय पहुंचे थाने
स्थिति तब और ज्यादा तनावपूर्ण हो गई जब महापौर के अधिवक्ता बेटे अनुराग पांडेय भी अन्य अधिवक्ताओं के साथ किदवईनगर थाने पहुंच गए।
उन्होंने शमशाद अली को थाने लाए जाने पर आपत्ति जताई और पुलिस कार्रवाई का विरोध किया।
इस दौरान अनुराग पांडेय और थाने के इंस्पेक्टर धर्मेंद्र कुमार राम के बीच तीखी बहस भी हुई।
“कोई फोन नहीं उठा रहा है” – अनुराग पांडेय
बहस के दौरान इंस्पेक्टर धर्मेंद्र कुमार राम ने अनुराग पांडेय से कहा कि वे इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों से बात कर लें।
इस पर अनुराग पांडेय ने जवाब दिया कि वे अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कोई फोन नहीं उठा रहा है।
थाने के भीतर यह बातचीत और बहस काफी देर तक चलती रही, जिससे माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
“ये वकील हैं, कोई अपराधी नहीं”
इस दौरान अनुराग पांडेय ने पुलिस से कहा कि शमशाद अली कोई अपराधी या हत्यारा नहीं हैं बल्कि एक अधिवक्ता हैं।
उन्होंने कहा,
“ये भी वकील हैं, कोई हत्यारा या मुल्जिम नहीं हैं। मैं इनका हाथ पकड़े हूं, अगर ये भाग जाएं तो मेरे ऊपर मुकदमा लिख देना।”
इस पर इंस्पेक्टर ने जवाब दिया कि आरोपी कहीं भाग नहीं पाएंगे और उन्हें वहीं बैठने को कहा।
थाने के अंदर चली बातचीत
करीब आधे घंटे बाद अधिकारियों के आने की बात कही गई। इसके बाद अनुराग पांडेय और उनके कुछ साथी पुलिसकर्मियों के साथ थाने के अंदर चले गए।
इस दौरान पुलिस ने अन्य लोगों को थाने के बाहर ही रोक दिया ताकि स्थिति को नियंत्रित रखा जा सके।
लिखापढ़ी के बाद शमशाद अली को जाने दिया गया
करीब एक घंटे तक चले इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस ने औपचारिक लिखापढ़ी पूरी की।
इसके बाद अधिवक्ता शमशाद अली को अनुराग पांडेय के साथ जाने की अनुमति दे दी गई।
हालांकि पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे भी जरूरत पड़ने पर उनसे दोबारा पूछताछ की जा सकती है।
डीसीपी साउथ ने दी आधिकारिक जानकारी
इस मामले पर डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि शमशाद अली को केवल पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया था।
उन्होंने कहा कि पुलिस फर्जी डिग्री मामले की गहराई से जांच कर रही है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
शिक्षा व्यवस्था और कानून व्यवस्था पर उठे सवाल
Kanpur LLB Degree Scam ने शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और कानून पेशे की विश्वसनीयता को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
यदि अधिवक्ताओं के पास फर्जी डिग्री होने के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न्याय प्रणाली के लिए भी एक गंभीर चिंता का विषय बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सख्त जांच और पारदर्शी कार्रवाई जरूरी है ताकि भविष्य में इस तरह के रैकेट पनपने की संभावना को रोका जा सके।

