Kanpur के प्ले स्कूल में ढाई साल की बच्ची से हैवानियत: मासूम को टीचर ने बेरहमी से पीटा, CCTV फुटेज देख कांप उठे मां-बाप
Kanpur किदवई नगर स्थित फर्स्ट क्राई इंटेलिटॉट्स प्री स्कूल से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है जिसने पूरे शहर में सनसनी फैला दी है। यहां मात्र ढाई साल की मासूम बच्ची को एक शिक्षिका ने बेरहमी से पीटा, जिससे बच्ची के चेहरे पर चोट के निशान आ गए और वह डरी-सहमी हालत में घर लौटी।
बच्ची के रोते हुए बयान और उसके चेहरे पर पड़े निशानों ने उसके माता-पिता के होश उड़ा दिए। उन्होंने तत्काल स्कूल प्रशासन से सीसीटीवी फुटेज की मांग की और जब फुटेज सामने आया, तो पूरे मामले की दरिंदगी और मानसिक प्रताड़ना की तस्वीरें सामने आ गईं।
डरी-सहमी बच्ची के चेहरे पर पड़े थे गालों पर तमाचे के निशान
बच्ची के पिता ने बताया कि जब उनकी बेटी स्कूल से लौटी तो वह लगातार रो रही थी और उसके चेहरे पर लाल निशान थे। परिजनों ने बच्ची को जब प्यार से पूछा कि क्या हुआ, तो उसने रोते हुए बताया कि टीचर ने मारा।
यह सुनते ही माता-पिता भागते हुए स्कूल पहुंचे और स्कूल से पूरी जानकारी ली। जब सीसीटीवी फुटेज देखा गया तो उसमें साफ-साफ नजर आया कि एक शिक्षिका ने बच्ची को कई बार थप्पड़ मारे, उसे डांटा-फटकारा और डराया।
CCTV फुटेज में दिखी अमानवीयता, बच्ची पर किया गया शारीरिक और मानसिक हमला
सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि शिक्षिका ने बच्ची को बार-बार धमकाया, थप्पड़ मारे और उसका हाथ झटके से खींचा। बच्ची की उम्र मात्र ढाई साल है, ऐसे में इस तरह का बर्ताव न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि कानूनन भी दंडनीय है।
परिवार का कहना है कि बच्ची की शारीरिक चोट से ज्यादा चिंता इस बात की है कि उसके कोमल मन पर कितना गहरा मानसिक आघात पड़ा होगा।
स्कूल प्रबंधन ने जताया खेद, लेकिन परिजनों ने उठाई कार्रवाई की मांग
फर्स्ट क्राई इंटेलिटॉट्स प्री स्कूल की ओर से एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि उन्हें इस घटना पर बेहद खेद है और वे इस विषय में कठोर कदम उठाएंगे। स्कूल प्रबंधन ने यह भी कहा कि उनकी प्राथमिकता बच्चों की सुरक्षा है और वे इस तरह के किसी भी दुर्व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
हालांकि, परिजनों का कहना है कि खेद प्रकट करना पर्याप्त नहीं है। इस तरह की घटनाओं पर केवल चेतावनी या निलंबन से काम नहीं चलेगा। वे आरोपी शिक्षिका के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
पुलिस ने शुरू की जांच, स्कूल को जारी किया गया नोटिस
किदवई नगर थाने के प्रभारी ने बताया कि उन्हें मामले की शिकायत मिल गई है और CCTV फुटेज की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि बच्ची को संभवतः कक्षा में ध्यान न देने या हल्का शोर करने की वजह से पीटा गया।
पुलिस ने स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी कर इस पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच शुरू कर दी है। आरोपी शिक्षिका से भी पूछताछ की जा रही है और यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो उसे कठोर सज़ा मिलेगी।
इतनी मासूम उम्र में हिंसा क्यों? परवरिश के केंद्रों में डर का माहौल!
इस घटना ने न केवल कानपुर बल्कि पूरे देश में अभिभावकों के मन में डर बैठा दिया है। प्ले स्कूल, जहां बच्चों को प्यार, संरक्षण और शिक्षा मिलनी चाहिए, वहां अगर शारीरिक प्रताड़ना होने लगे तो माता-पिता किस पर भरोसा करें?
कई विशेषज्ञों ने इस बात पर चिंता जताई है कि अब समय आ गया है जब प्ले स्कूलों में भी कड़ी निगरानी व्यवस्था और प्रशिक्षित शिक्षकों की अनिवार्यता लागू की जाए। केवल सुंदर इमारत और फैंसी नामों से शिक्षा नहीं दी जा सकती।
बच्चों की सुरक्षा पर सवाल, क्या पर्याप्त हैं मौजूदा व्यवस्थाएं?
फर्स्ट क्राई जैसे ब्रांडेड प्री स्कूल में ऐसी घटना होना यह दर्शाता है कि सिर्फ नाम नहीं, बल्कि व्यवस्था और सतर्कता भी मायने रखती है। हर स्कूल में यह अनिवार्य किया जाना चाहिए कि:
स्कूल स्टाफ का क्रिमिनल बैकग्राउंड वेरिफिकेशन हो।
प्रत्येक क्लास में CCTV कैमरे चालू हालत में रहें और पैरेंट्स को फुटेज देखने का अधिकार मिले।
शिक्षकों के लिए बाल मनोविज्ञान का प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाए।
बच्चों के साथ किसी भी दुर्व्यवहार पर Zero Tolerance Policy अपनाई जाए।
अभिभावकों की गुहार: “कानूनी सजा जरूरी, ताकि कोई और मासूम शिकार न बने”
बच्ची के माता-पिता और स्थानीय लोगों का कहना है कि आरोपी टीचर पर सख्त कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। बच्ची अभी भी सदमे में है और रात में डर के मारे उठकर रोने लगती है।
माता-पिता ने कहा, “हमने अपनी बच्ची को स्कूल इसलिए भेजा ताकि वह कुछ सीख सके, सुरक्षित रहे। लेकिन आज हमें विश्वास ही नहीं हो रहा कि एक प्ले स्कूल टीचर इस कदर हिंसक हो सकती है।”
मानवाधिकार और बाल संरक्षण आयोग की भी होनी चाहिए निगरानी
इस घटना की गूंज कानपुर से आगे भी पहुंचनी चाहिए ताकि राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग और मानवाधिकार आयोग भी इन मामलों पर एक्शन ले। स्कूलों की समय-समय पर निगरानी और शिक्षकों के लिए मनोवैज्ञानिक परीक्षण अनिवार्य किया जाना चाहिए।

