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केतु का उपाय: धर्म तंत्र

अमृत मंथन के समय भगवान विष्णु जी ने एक राक्षस का सिर और धड़ अलग कर दिया था, जो राहु केतु के नाम से जाना जाता है,
केतु के उपाय मे सबसे कारगर उपाय है चींटियों को भोजन (चीनी और चावल का पीसा आटा) डाला जाए तो केतु के प्रभाव कम किये जा सकते है

कहते है चीटियों पर भगवान विष्णुजी का प्रभाव रहता है अगर देखा जाए तो राहु केतु को अलग करने वाले विष्णुजी है, इस भोजन से केतु का प्रभाव/दोष शांत हो जाते है या शुभ परिणाम मे बदल जाता है

दूसरा कारण चावल पर चन्द्रमा का, चीनी पर शुक्र का प्रभाव है, चींटी छोटा जीव है, चंद्रमा और शुक्र का भोजन वो भी सबसे छोटे जीव को, जरूरतमन्द को, भोजन देना शुभ रहता है,शुक्र भोतिक लाभ देता है

केतु एक उत्प्रेरक (catalyst) की तरह भी काम करता है, विशेषकर सूर्य, चन्द्रमा के छुपे हुए दोषों को केतु प्रभावी करता है, केतु इन ग्रहों के साथ भी शुभ फल नही देता है,और इनके शुभवत्व के विपरीत कार्य करता है क्योकि सूर्य चन्द्रमा ने अमृत मंथन के समय पहचान लिया था

अचानक अशांति या मन दुखी,, बीमारी, भय, विपदा, दोष आदि लक्षण है , रुके हुए काम, बाधाएं, रोग,अशांति आदि के समाधान का रास्ता खुलता है

कहते है सबसे ज्यादा दुआएं चीटियां देती है, और एक वैज्ञानिक तथ्य है जब आप उनका भोजन एक निश्चित स्थान देते है तो वो आपका इंतजार करती है

ग्रहों मे काली चीटिया शनि प्रधान है और मान्यताओं के अनुसार शुभ भी है, इस प्रकार शनि देव की कृपा बन जाती है,ह्रदय रोगी सुबह टहलते वक़्त किसी स्थान पर चींटियों को भोजन देते रहे

 
रोज प्रातःघर के बाहर किसी पेड़ या जहाँ चीटियां को भोजन डालते रहे इस प्रकार से दोष मुक्त होकर शुभ परिणाम की संभावना बढ़ जाती है,
भगवान विष्णु जी का आशीर्वाद मिलता है

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