Krishna Janmabhoomi–शाही ईदगाह विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट में अहम सुनवाई, 18 याचिकाओं पर बहस, अगली तारीख 12 मार्च
Krishna Janmabhoomi Shahi Idgah case एक बार फिर कानूनी और धार्मिक विमर्श के केंद्र में आ गया है। मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़े बहुचर्चित विवाद पर शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। इस सुनवाई को न केवल मथुरा, बल्कि पूरे प्रदेश और देश के स्तर पर अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हाईकोर्ट की सिंगल बेंच, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस अवनीश सक्सेना कर रहे हैं, के समक्ष हिंदू पक्ष की ओर से दाखिल कुल 18 वादों पर एक साथ बहस हुई। विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 12 मार्च निर्धारित कर दी है।
🔴 वाद बिंदु तय करने को लेकर केंद्रित रही सुनवाई
इस चरण की सुनवाई में मुख्य रूप से वाद बिंदु निर्धारित किए जाने को लेकर दलीलें रखी गईं। हिंदू पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि जब तक वाद बिंदु तय नहीं होते, तब तक मामले की सुनवाई ठोस रूप से आगे नहीं बढ़ सकती।
पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को निर्देश दिए थे कि वे अपने-अपने जवाब और काउंटर हलफनामे दाखिल करें। कुछ याचिकाओं में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को भी जवाब दाखिल करने का आदेश दिया गया था। सूत्रों के अनुसार, ASI आज या आगामी सुनवाई से पहले अपना पक्ष अदालत में रख सकता है।
🔴 हिंदू पक्ष की मुख्य मांगें क्या हैं
Krishna Janmabhoomi Shahi Idgah case में हिंदू पक्ष की याचिकाओं में वर्ष 1968 में हुए उस समझौते को चुनौती दी गई है, जिसके तहत शाही ईदगाह मस्जिद को जन्मभूमि परिसर से जुड़ी भूमि दी गई थी। हिंदू पक्ष का कहना है कि यह समझौता कानूनी और धार्मिक दोनों दृष्टियों से त्रुटिपूर्ण है।
याचिकाओं में प्रमुख मांग यह है कि उस भूमि को मंदिर ट्रस्ट को वापस सौंपा जाए और श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर से कथित अतिक्रमण हटाया जाए। इसके साथ ही पूरे परिसर का नियंत्रण मंदिर पक्ष को सौंपने की भी मांग की गई है।
🔴 प्रतिनिधि वाद और सुप्रीम कोर्ट का संदर्भ
हिंदू पक्ष की ओर से मुख्य याचिकाकर्ता एडवोकेट महेंद्र प्रताप ने अदालत में दलील दी कि प्रतिनिधि वाद से संबंधित एक मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इसी वजह से इस केस में वाद बिंदु तय करने की प्रक्रिया बाधित हो रही है।
उनका कहना है कि हाईकोर्ट से आग्रह किया जाएगा कि वह इस मामले में स्वतंत्र रूप से वाद बिंदु तय करे, ताकि सुनवाई आगे बढ़ सके और मामला अनावश्यक रूप से लंबित न रहे।
🔴 तकनीकी आपत्तियों पर हिंदू पक्ष का आरोप
हिंदू पक्ष का आरोप है कि ईदगाह पक्ष बार-बार तकनीकी आपत्तियां उठाकर सुनवाई को टालने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना है कि यह मामला वर्षों से अदालतों में है और अब इसे निर्णायक दिशा में आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
आज की सुनवाई में एक जॉइंट एप्लिकेशन भी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की संभावना जताई गई है, जिससे प्रक्रिया को स्पष्ट और सुव्यवस्थित किया जा सके।
🔴 मथुरा में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
Krishna Janmabhoomi Shahi Idgah case की संवेदनशीलता को देखते हुए मथुरा में सुरक्षा और प्रशासनिक स्तर पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। सुनवाई के दौरान न केवल अदालत परिसर, बल्कि मथुरा शहर में भी पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर है।
संभावित प्रतिक्रियाओं और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय प्रशासन ने अतिरिक्त बल तैनात किया है। सोशल मीडिया और सार्वजनिक गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है।
🔴 धार्मिक और कानूनी दृष्टि से क्यों अहम है मामला
यह विवाद केवल जमीन या संरचना तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक व्याख्या और संवैधानिक कानून जुड़े हुए हैं। मथुरा, जिसे भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि माना जाता है, वहां यह मामला सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस केस में हाईकोर्ट के आदेश भविष्य में अन्य धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों के लिए भी एक मिसाल बन सकते हैं।
🔴 12 मार्च की सुनवाई पर टिकी निगाहें
अब सभी पक्षों की निगाहें 12 मार्च पर टिकी हैं, जब अदालत में अगली सुनवाई होगी। इस दौरान वाद बिंदु तय होने, ASI के जवाब और आगे की प्रक्रिया को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
Krishna Janmabhoomi Shahi Idgah case में आने वाला हर आदेश न केवल मथुरा, बल्कि पूरे देश के कानूनी और सामाजिक विमर्श को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।

