Allahabad High Court

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Allahabad High Court का बड़ा फैसला: सरकारी कर्मचारी के खिलाफ FIR से पहले सुनना होगा पक्ष, डॉ. राहुल वर्मा को मिली राहत

Allahabad High Court ने डॉ. राहुल वर्मा को बड़ी राहत देते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारी के आधिकारिक कर्तव्य से जुड़े कथित अपराध में एफआईआर का आदेश देने से पहले उसका पक्ष सुनना जरूरी है। अदालत ने BNSS की धारा 175(4) के तहत मिली वैधानिक सुरक्षा की अनदेखी को गंभीर माना और 12 अगस्त 2026 का मजिस्ट्रेट आदेश रद्द कर दिया।

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उमाकांत यादव को Allahabad High Court से जमानत, 6 साल से जेल में बंद पूर्व सांसद को मिली बड़ी राहत

Allahabad High Court ने पूर्व सांसद उमाकांत यादव को जौनपुर के लाइन बाजार थाने में दर्ज धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज के मामले में जमानत दी है। अदालत ने खास तौर पर उनकी करीब छह साल की हिरासत और अब तक आरोप तय नहीं होने को महत्वपूर्ण माना। हालांकि, अन्य मामलों में हिरासत के कारण उन्हें फिलहाल जेल से बाहर आने का लाभ नहीं मिल सकेगा।

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Allahabad High Court ने डॉक्टर राकेश सिंह के तबादले पर लगाई रोक, सीएचसी राल में अधीक्षक पद पर बहाली के आदेश

Allahabad High Court ने फिलहाल राकेश सिंह के तबादले पर अंतरिम रोक लगाते हुए उन्हें सीएचसी राल में चिकित्सा अधीक्षक पद पर बहाल करने और वेतन भुगतान के निर्देश दिए हैं। साथ ही जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से तीन सप्ताह में व्यक्तिगत हलफनामा मांगा गया है। अब अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि चिकित्सक के तबादले में जिलाधिकारी के निर्देश का कानूनी आधार क्या था।

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Mahoba की 18.14 एकड़ जमीन पर 45 साल पुराने कब्रिस्तान विवाद का फैसला, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दूसरी अपील की खारिज

Mahoba की 18.14 एकड़ जमीन से जुड़े करीब 45 साल पुराने विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दूसरी अपील खारिज कर दी। बाबूलाल बनाम शहाबुद्दीन मामले में कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों और मौके की जांच रिपोर्ट के आधार पर जमीन को लंबे समय से कब्रिस्तान के रूप में इस्तेमाल किए जाने का निष्कर्ष निकाला था और इस रिपोर्ट को प्रभावी ढंग से चुनौती नहीं दी गई। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नियम 8 सीपीसी के तहत अदालत की अनुमति के बिना दायर मुकदमा पूरी मुस्लिम बिरादरी की ओर से प्रतिनिधि वाद नहीं माना जा सकता और उसका प्रभाव केवल संबंधित पक्षकारों तक सीमित रहेगा।

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CRPF कांस्टेबल को दूसरी शादी पड़ी भारी! पहली पत्नी के रहते बिना विभागीय अनुमति विवाह पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी को ठहराया सही

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहली पत्नी के जीवित रहते बिना विभागीय अनुमति दूसरी शादी करने वाले CRPF कांस्टेबल की बर्खास्तगी को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकल पीठ ने कहा कि ऐसी स्थिति में दूसरी शादी करना CRPF के सेवा नियमों का उल्लंघन और गंभीर कदाचार माना जा सकता है। संबंधित कर्मचारी ने वर्ष 1976 में उर्मिला देवी से विवाह किया था और बाद में वर्ष 1989 में उनके बच्चों के साथ घर छोड़कर चले जाने का दावा किया।

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39 साल बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 1983 के Farrukhabad दोहरे हत्याकांड में ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा, जीवित बचे आरोपी रमाकांत बरी

Farrukhabad दोहरे हत्याकांड में सुनाए गए इस फैसले में स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि केवल ठोस, विश्वसनीय और संदेह से परे सिद्ध किए गए साक्ष्यों के आधार पर ही कायम रह सकती है। अदालत ने पाया कि प्रत्यक्षदर्शी गवाहों की विश्वसनीयता तथा जांच में मौजूद कमियों के कारण अभियोजन अपना मामला आवश्यक कानूनी मानकों के अनुरूप साबित नहीं कर सका। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट का फैसला निरस्त करते हुए जीवित बचे आरोपी रमाकांत को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।

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Allahabad High Court का अहम फैसला: केवल लंबित आपराधिक मुकदमे के आधार पर चरित्र प्रमाणपत्र से इनकार नहीं किया जा सकता

Allahabad High Court ने अपने इस महत्वपूर्ण निर्णय में दोहराया है कि केवल किसी आपराधिक मुकदमे के लंबित होने के आधार पर किसी व्यक्ति के चरित्र प्रमाणपत्र को अस्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि जब तक सक्षम न्यायालय किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं करता, तब तक उसे दोषी मानकर उसके चरित्र पर प्रतिकूल प्रभाव डालना उचित नहीं है। इसी सिद्धांत के आधार पर जालौन निवासी भरत लाल गुप्ता की याचिका स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट का आदेश निरस्त किया और तीन सप्ताह के भीतर निर्धारित प्रारूप में चरित्र प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया।

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Allahabad High Court का अहम फैसला: पत्नी की सुविधा या भरण-पोषण का लंबित मामला ही मुकदमा ट्रांसफर करने का आधार नहीं

Allahabad High Court ने अपने इस निर्णय में स्पष्ट किया है कि वैवाहिक मामलों में मुकदमे के स्थानांतरण का अधिकार केवल न्यायहित की रक्षा के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए, न कि किसी एक पक्ष की सुविधा के आधार पर। अदालत ने कहा कि यदि यह सिद्ध नहीं होता कि वर्तमान न्यायालय में निष्पक्ष न्याय संभव नहीं है, तो केवल यात्रा की असुविधा, नाबालिग बच्चे की देखभाल या किसी अन्य जिले में लंबित भरण-पोषण का मामला स्थानांतरण का पर्याप्त आधार नहीं बन सकता। साथ ही अलीगढ़ परिवार न्यायालय को संबंधित मामले का शीघ्र निस्तारण करने का निर्देश भी दिया गया है।

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Allahabad High Court की सख्ती: आदेशों की अनदेखी पर हरदोई की बीएसए तलब, 30 हजार रुपये का हर्जाना; 6 अगस्त को व्यक्तिगत पेशी के निर्देश

Allahabad High Court की लखनऊ पीठ द्वारा पारित यह आदेश न्यायालय के निर्देशों के समयबद्ध अनुपालन और प्रशासनिक जवाबदेही के महत्व को रेखांकित करता है। फिलहाल अदालत ने हरदोई की बेसिक शिक्षा अधिकारी को 6 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जांच रिपोर्ट तथा आदेशों के पालन में हुई देरी का स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं। मामले में आगे की कार्रवाई अगली सुनवाई और प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर तय होगी।

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Allahabad High Court में बड़ा घटनाक्रम: कोडीन कफ सिरप मामले से खुद को अलग किया जज ने, बोले- न्यायाधीश तक पहुंचने की कोशिश न्यायपालिका पर हमला

Allahabad High Court के न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने कोडीन कफ सिरप मामले से संबंधित 74 जमानत याचिकाओं की सुनवाई से स्वयं को अलग करते हुए कहा कि किसी भी लंबित मामले को प्रभावित करने या न्यायाधीश तक पहुंच बनाने का प्रयास न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। उन्होंने सभी मामलों को नई पीठ के गठन के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजने का निर्देश दिया है। मामले के गुण-दोष पर अंतिम निर्णय संबंधित नई पीठ द्वारा सुनवाई के बाद लिया जाएगा।

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मदरसा आधुनिकीकरण योजना में कथित ₹2.14 लाख गबन मामला: Allahabad High Court ने शिक्षकों के खिलाफ FIR रद्द करने से किया इनकार

Allahabad High Court ने आजमगढ़ के मदरसा आधुनिकीकरण योजना से जुड़े कथित ₹2.14 लाख गबन मामले में एफआईआर रद्द करने से इनकार किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश आरोपों को सिद्ध मानने का नहीं है, बल्कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच जारी रखने की आवश्यकता को देखते हुए पारित किया गया है। मामले का अंतिम निष्कर्ष जांच और आगामी न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

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