Allahabad High Court

उत्तर प्रदेश

Allahabad High Court ने नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी की 10 साल की सजा रखी बरकरार, कहा—पीड़िता की भरोसेमंद गवाही पर्याप्त

Allahabad High Court ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषी की 10 साल की सजा बरकरार रखते हुए कहा कि पीड़िता की विश्वसनीय गवाही दोषसिद्धि का पर्याप्त आधार हो सकती है। अदालत ने मेडिकल जांच में चोट न मिलने और प्राथमिकी में देरी को अपने आप में गवाही खारिज करने का निर्णायक आधार मानने से इनकार किया।

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Allahabad High Court का बड़ा फैसला: बालिग युवती को अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने का अधिकार

Allahabad High Court ने स्पष्ट किया कि वयस्क व्यक्ति को अपनी इच्छा के अनुसार जीवन जीने और साथी चुनने का अधिकार है। अस्थि परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर युवती को बालिग मानते हुए अदालत ने उसे रिहा कर अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ जाने की अनुमति दे दी।

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Allahabad High Court का बड़ा फैसला: भदोही में बजपेयी ढाबे की कुर्की रद्द, कहा- अपराध में नाम होना संपत्ति जब्त करने के लिए काफी नहीं

Allahabad High Court ने भदोही के बजपेयी ढाबे की कुर्की रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि गैंगस्टर एक्ट के तहत संपत्ति जब्त करने के लिए केवल आपराधिक मामले में नाम होना पर्याप्त नहीं है। प्रशासन को यह दिखाने के लिए ठोस आधार प्रस्तुत करना होगा कि संपत्ति अपराध से अर्जित धन से बनाई गई है। अदालत ने कुर्की के दोनों आदेश रद्द कर ढाबा तत्काल अपीलकर्ता को वापस सौंपने का निर्देश दिया।

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Allahabad High Court का बड़ा फैसला: गैंगस्टर एक्ट में कुर्क संपत्ति रिलीज से इन्कार किया तो डीएम को कोर्ट भेजना होगा मामला

Allahabad High Court के इस आदेश ने गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क संपत्तियों की रिहाई से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट की है। कोर्ट ने कहा कि डीएम द्वारा रिलीज से इन्कार करने के बाद मामले को कानून के मुताबिक संबंधित सक्षम कोर्ट में भेजना जरूरी है। इस प्रक्रिया का पालन नहीं होने पर डीएम का आदेश टिक नहीं सकता। अब फिरोजाबाद के इस मामले में जिलाधिकारी को हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार दो महीने के भीतर अभ्यावेदन पर नए सिरे से फैसला करना होगा।

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Allahabad High Court का बड़ा फैसला: सरकारी कर्मचारी के खिलाफ FIR से पहले सुनना होगा पक्ष, डॉ. राहुल वर्मा को मिली राहत

Allahabad High Court ने डॉ. राहुल वर्मा को बड़ी राहत देते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारी के आधिकारिक कर्तव्य से जुड़े कथित अपराध में एफआईआर का आदेश देने से पहले उसका पक्ष सुनना जरूरी है। अदालत ने BNSS की धारा 175(4) के तहत मिली वैधानिक सुरक्षा की अनदेखी को गंभीर माना और 12 अगस्त 2026 का मजिस्ट्रेट आदेश रद्द कर दिया।

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उमाकांत यादव को Allahabad High Court से जमानत, 6 साल से जेल में बंद पूर्व सांसद को मिली बड़ी राहत

Allahabad High Court ने पूर्व सांसद उमाकांत यादव को जौनपुर के लाइन बाजार थाने में दर्ज धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज के मामले में जमानत दी है। अदालत ने खास तौर पर उनकी करीब छह साल की हिरासत और अब तक आरोप तय नहीं होने को महत्वपूर्ण माना। हालांकि, अन्य मामलों में हिरासत के कारण उन्हें फिलहाल जेल से बाहर आने का लाभ नहीं मिल सकेगा।

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Allahabad High Court ने डॉक्टर राकेश सिंह के तबादले पर लगाई रोक, सीएचसी राल में अधीक्षक पद पर बहाली के आदेश

Allahabad High Court ने फिलहाल राकेश सिंह के तबादले पर अंतरिम रोक लगाते हुए उन्हें सीएचसी राल में चिकित्सा अधीक्षक पद पर बहाल करने और वेतन भुगतान के निर्देश दिए हैं। साथ ही जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से तीन सप्ताह में व्यक्तिगत हलफनामा मांगा गया है। अब अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि चिकित्सक के तबादले में जिलाधिकारी के निर्देश का कानूनी आधार क्या था।

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Mahoba की 18.14 एकड़ जमीन पर 45 साल पुराने कब्रिस्तान विवाद का फैसला, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दूसरी अपील की खारिज

Mahoba की 18.14 एकड़ जमीन से जुड़े करीब 45 साल पुराने विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दूसरी अपील खारिज कर दी। बाबूलाल बनाम शहाबुद्दीन मामले में कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों और मौके की जांच रिपोर्ट के आधार पर जमीन को लंबे समय से कब्रिस्तान के रूप में इस्तेमाल किए जाने का निष्कर्ष निकाला था और इस रिपोर्ट को प्रभावी ढंग से चुनौती नहीं दी गई। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नियम 8 सीपीसी के तहत अदालत की अनुमति के बिना दायर मुकदमा पूरी मुस्लिम बिरादरी की ओर से प्रतिनिधि वाद नहीं माना जा सकता और उसका प्रभाव केवल संबंधित पक्षकारों तक सीमित रहेगा।

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CRPF कांस्टेबल को दूसरी शादी पड़ी भारी! पहली पत्नी के रहते बिना विभागीय अनुमति विवाह पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी को ठहराया सही

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहली पत्नी के जीवित रहते बिना विभागीय अनुमति दूसरी शादी करने वाले CRPF कांस्टेबल की बर्खास्तगी को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकल पीठ ने कहा कि ऐसी स्थिति में दूसरी शादी करना CRPF के सेवा नियमों का उल्लंघन और गंभीर कदाचार माना जा सकता है। संबंधित कर्मचारी ने वर्ष 1976 में उर्मिला देवी से विवाह किया था और बाद में वर्ष 1989 में उनके बच्चों के साथ घर छोड़कर चले जाने का दावा किया।

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39 साल बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 1983 के Farrukhabad दोहरे हत्याकांड में ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा, जीवित बचे आरोपी रमाकांत बरी

Farrukhabad दोहरे हत्याकांड में सुनाए गए इस फैसले में स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि केवल ठोस, विश्वसनीय और संदेह से परे सिद्ध किए गए साक्ष्यों के आधार पर ही कायम रह सकती है। अदालत ने पाया कि प्रत्यक्षदर्शी गवाहों की विश्वसनीयता तथा जांच में मौजूद कमियों के कारण अभियोजन अपना मामला आवश्यक कानूनी मानकों के अनुरूप साबित नहीं कर सका। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट का फैसला निरस्त करते हुए जीवित बचे आरोपी रमाकांत को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।

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Allahabad High Court का अहम फैसला: केवल लंबित आपराधिक मुकदमे के आधार पर चरित्र प्रमाणपत्र से इनकार नहीं किया जा सकता

Allahabad High Court ने अपने इस महत्वपूर्ण निर्णय में दोहराया है कि केवल किसी आपराधिक मुकदमे के लंबित होने के आधार पर किसी व्यक्ति के चरित्र प्रमाणपत्र को अस्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि जब तक सक्षम न्यायालय किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं करता, तब तक उसे दोषी मानकर उसके चरित्र पर प्रतिकूल प्रभाव डालना उचित नहीं है। इसी सिद्धांत के आधार पर जालौन निवासी भरत लाल गुप्ता की याचिका स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट का आदेश निरस्त किया और तीन सप्ताह के भीतर निर्धारित प्रारूप में चरित्र प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया।

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