पाकिस्तान में Lashkar-e-Taiba से जुड़े आतंकी का दावा: ‘3-4 साल में 30 से ज्यादा सदस्य मारे गए’, भारत पर लगाए आरोप; नई बहस शुरू
News-Desk
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हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में कोई स्वतंत्र या आधिकारिक प्रमाण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराया गया है। भारत सरकार भी अतीत में ऐसे सभी आरोपों को लगातार खारिज करती रही है और उन्हें निराधार बताया है।
वीडियो में क्या दावा किया गया?
सोशल मीडिया और विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सामने आए एक वीडियो में रिजवान हनीफ दावा करता दिखाई देता है कि पिछले कुछ वर्षों में उसके संगठन से जुड़े कई लोगों की पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के विभिन्न क्षेत्रों में हत्या की गई।
उसने कहा कि ये घटनाएं पेशावर, कराची, रावलपिंडी, रावलकोट और मुजफ्फराबाद जैसे स्थानों पर हुईं। उसके अनुसार, इन हमलों को अज्ञात हमलावरों ने अंजाम दिया।
रिजवान हनीफ ने आरोप लगाया कि इन कथित हमलों के पीछे भारतीय एजेंसियों से जुड़े लोग थे। हालांकि, उसने अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।
भारत ने पहले भी ऐसे आरोपों को किया है खारिज
पाकिस्तान की ओर से पहले भी कई बार भारत पर सीमा पार कथित लक्षित हत्याओं (Targeted Killings) में शामिल होने के आरोप लगाए जा चुके हैं।
जनवरी 2024 में पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश सचिव मुहम्मद साइरस सज्जाद काजी ने भी दावा किया था कि भारतीय एजेंसियां पाकिस्तान में टारगेट किलिंग में शामिल हैं।
उस समय भारत सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि ऐसे दावों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है।
ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट के बाद भी हुई थी चर्चा
अप्रैल 2024 में ब्रिटिश समाचार पत्र द गार्डियन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि वर्ष 2020 के बाद पाकिस्तान में करीब 20 आतंकियों और उग्रवादियों की अज्ञात हमलावरों द्वारा हत्या की गई।
रिपोर्ट में कहा गया था कि मारे गए लोगों में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन से जुड़े कथित सदस्य भी शामिल थे।
रिपोर्ट में पाकिस्तानी अधिकारियों और कथित खुफिया सूत्रों के हवाले से भारत की एजेंसियों की भूमिका का दावा किया गया था।
हालांकि, इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया था और इसे झूठा तथा भारत-विरोधी प्रचार बताया था।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने क्या कहा था
इन आरोपों के बाद भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी स्पष्ट किया था कि दूसरे देशों में जाकर लक्षित हत्याएं करना भारत सरकार की नीति का हिस्सा नहीं है।
उन्होंने कहा था कि भारत आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख रखता है, लेकिन पाकिस्तान द्वारा लगाए जा रहे आरोपों का कोई विश्वसनीय आधार नहीं है।
भारत का आधिकारिक रुख लगातार यही रहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीतिक मानकों का सम्मान करता है।
लश्कर-ए-तैयबा क्या है?
लश्कर-ए-तैयबा (LeT) की स्थापना 1987 में पाकिस्तान में हुई थी। यह संगठन शुरुआत में सोवियत-अफगान युद्ध के दौरान सक्रिय जिहादी नेटवर्क से जुड़ा माना जाता है।
इसकी शुरुआत मरकज-अद-दावा-वल-इरशाद नामक धार्मिक संगठन के सशस्त्र विंग के रूप में हुई थी। बाद में यही संगठन लश्कर-ए-तैयबा के नाम से जाना जाने लगा।
अरबी भाषा में लश्कर-ए-तैयबा का अर्थ “पवित्र लोगों की सेना” बताया जाता है।
शुरुआती वर्षों में संगठन से जुड़े लड़ाकों को अफगानिस्तान में सोवियत सेना के खिलाफ संघर्ष के लिए भेजा जाता था।
सोवियत युद्ध के बाद बदला संगठन का फोकस
1989 में सोवियत सेना की अफगानिस्तान से वापसी के बाद संगठन की गतिविधियों का केंद्र बदल गया।
इसके बाद संगठन का ध्यान जम्मू-कश्मीर क्षेत्र की ओर केंद्रित होने लगा। इसी अवधि में संगठन के संस्थापकों में शामिल अब्दुल्ला अज्जाम की पेशावर में हुए एक विस्फोट में मृत्यु हो गई।
इसके बाद हाफिज सईद संगठन के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए और लंबे समय तक उसका नेतृत्व करते रहे।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादी संगठन घोषित
भारत, अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र तथा कई अन्य देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा लश्कर-ए-तैयबा को आतंकवादी संगठन घोषित किया जा चुका है।
भारत इस संगठन को कई बड़े आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार मानता है। अमेरिका सहित अनेक पश्चिमी देशों ने भी इस संगठन पर प्रतिबंध लगाए हैं।
भारत, अमेरिका और कई पश्चिमी देशों का लंबे समय से आरोप रहा है कि इस संगठन को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का समर्थन मिलता रहा है।
हालांकि, पाकिस्तान आधिकारिक रूप से इन आरोपों से लगातार इनकार करता रहा है।
आतंकवाद को लेकर भारत का लगातार सख्त रुख
भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाता रहा है।
नई दिल्ली का कहना है कि आतंकवादी संगठनों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई होनी चाहिए और आतंकवाद को किसी भी रूप में संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
भारत ने कई अवसरों पर संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न वैश्विक मंचों पर आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर बनी हुई है नजर
रिजवान हनीफ के हालिया दावों के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा और भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और न ही किसी आधिकारिक जांच एजेंसी ने इस संबंध में सार्वजनिक रूप से कोई पुष्टि की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच और विश्वसनीय साक्ष्यों का इंतजार करना आवश्यक है।
जम्मू-कश्मीर में हाल में हुई कार्रवाई भी रही चर्चा में
हाल के दिनों में जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों द्वारा आतंकवाद के खिलाफ अभियान लगातार जारी है।
इसी क्रम में अनंतनाग जिले में सुरक्षा एजेंसियों ने लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े दो आतंकियों के कथित ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई की थी। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई पुलिसकर्मी की हत्या के मामले में जांच के दौरान की गई।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ अभियान कानून के दायरे में जारी रहेगा और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाते रहेंगे।

