पटाखों की दुकानों पर लटके ताले, दस करोड़ का कारोबार प्रभावित
मुजफ्फरनगर। आतिशबाजी बिक्री पर एनजीटी के आदेश पर डीएम द्वारा पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने का आदेश जारी किए जाने के बाद नगर में प्रमुख आतिशबाजी विक्रेताओं की दुकानों पर ताले लटक गए। आतिशबाजी विक्रेती भोपा रोड पर एक साथ ही बैठे हुए दिखाई दिए।
मुजफ्फरनगर में आतिशबाजी का कारोबार करीब दस करोड रुपए का है। हालांकि प्रतिबंध लगने से पूर्व करीब दो करोड की आतिशबाजी बेची भी जा चुकी है।
मुजफ्फरनगर में जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे.ने एनजीटी के आदेशों का हवाला देते हुए जिले में आतिशबाजी की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
इस आदेश का अनुपालन करने के लिए पुलिस भी दिन में सक्रिय दिखाई दी। जिलाधिकारी द्वारा कुल 17 आतिशबाजी वितरकों को स्थाई लाइसेंस जारी किया गया है। हालांकि दीपावली से पूर्व धनतेरस पर भी करीब दो सौ लाइसेंस अस्थाई रूप से आतिशबाजी बेचने के बनाए जाते रहे हैं
जो केवल तीन दिन के लिए वैध होते थे। अब एनजीटी के आदेश पर पटाखों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगने के बाद नगर में आतिशबाजी की प्रमुख दुकानों पर ताले लटक गए हैं।
पटाखों कारोबारियों के नेता सचिन अग्रवाल के साथ ही अन्य पटाखा कारोबारियों ने अपनी दुकानों को पूरी तरह से बंद कर दिया है। सचिन अग्रवाल, मधुसूदन अग्रवाल, ललित गोयल, रविकांत अग्रवाल, राजीव गर्ग, संदीप गर्ग, सुमित अग्रवाल आदि पटाखा कारोबारियों का कहना है कि वह 18 प्रतिशत जीएसटी का भुगतान कर अपनी आतिशबाजी खरीदकर ला चुके हैं
ऐसे में पटाखों की बिक्री बंद होने से इसका असर किसी और पर नही बल्कि केवल उन पर पडेगा। सरकार को उसका टैक्स मिल गया है ओर बनाने वाली कंपनी को उसका दाम मिल चुका है।
उन्होंने नगर में ग्रीन पटाखों की बिक्री में छूट देने की मांग की है। दिनभर भोपा रोड पर बैठकर पटाखा कारोबारी मुजफ्फरनगर की आबोहवा को चौक करने में जुटे रहे। हालांकि जिन जनपदों में पटाखे की बिक्री पर प्रतिबंध लगा है उनमें मुजफ्फरनगर का एक्यूआई सबसे ठीक है।

