लंदन में गरीबों के खेल मैदान पर अमीरों का ‘Padel’ कब्जा? मुफ्त स्केटपार्क और बास्केटबॉल कोर्ट बन रहे पे-टू-प्ले, बच्चों के खेल पर बड़ा सवाल
News-Desk
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Barking, london news, London Padel Courts, London Sports, Padel, कैमडन, खेल सुविधाएं, पब्लिक स्पोर्ट्स स्पेस, पे टू प्ले, पैडल, पैडल कोर्ट, पैडल कोर्ट विवाद, बच्चों के खेल मैदान, बार्किंग स्केटपार्क, बास्केटबॉल कोर्ट, ब्रिटेन, युवा खेल, यूके न्यूज़, लंदन, स्केटपार्कलंदन में इन दिनों एक नया खेल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, लेकिन उसकी बढ़ती लोकप्रियता के साथ एक ऐसा विवाद भी खड़ा हो गया है जिसने खेल, सार्वजनिक सुविधाओं और सामाजिक समानता को आमने-सामने ला दिया है। सवाल है—क्या शहर में लोगों के लिए मुफ्त उपलब्ध खेल और मनोरंजन की जगहों को धीरे-धीरे ऐसी निजी सुविधाओं में बदला जा रहा है, जहां खेलने के लिए पहले जेब ढीली करनी होगी?
विवाद के केंद्र में है Padel, जो टेनिस और स्क्वॉश से मिलता-जुलता रैकेट खेल है। ब्रिटेन में पिछले कुछ वर्षों के दौरान पैडल की लोकप्रियता इतनी तेजी से बढ़ी है कि कोर्ट्स की संख्या में कई गुना इजाफा हुआ है। लेकिन इसी विस्तार के दौरान सार्वजनिक स्केटपार्क, बच्चों के खेलने की जगहों और बास्केटबॉल कोर्ट जैसी सुविधाओं को पैडल कोर्ट में बदलने के फैसलों ने स्थानीय लोगों को नाराज कर दिया है।
आलोचकों का आरोप है कि शहर की उन जगहों को, जहां बच्चे और युवा बिना किसी शुल्क के खेल सकते थे, अब ऐसे खेल के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है जिसमें खेलने के लिए मोटी फीस देनी पड़ती है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि सार्वजनिक जमीन सीमित है तो उसका इस्तेमाल किसके लिए होना चाहिए—हर बच्चे और युवा के लिए या उन लोगों के लिए जो महंगी खेल सुविधाओं की फीस वहन कर सकते हैं?
सबसे ज्यादा गुस्सा बार्किंग के उस स्केटपार्क को लेकर है, जिसे बंद करके वहां पैडल कोर्ट विकसित किए जाने की योजना सामने आई है।
बार्किंग स्केटपार्क बंद, बच्चों और स्केटबोर्डरों के सामने बड़ा संकट
बार्किंग स्केटपार्क को इस विवाद का सबसे ताजा उदाहरण माना जा रहा है। यह लंदन का इकलौता फुल-साइज इनडोर स्केटपार्क बताया जाता है। अब इसे स्थायी रूप से बंद कर दिया गया है ताकि वहां पैडल कोर्ट विकसित किए जा सकें।
स्केटबोर्डिंग करने वाले युवाओं और उनके परिवारों के लिए यह फैसला महज एक खेल मैदान बंद होने का मामला नहीं है। खासकर उन खिलाड़ियों के लिए, जो नियमित प्रशिक्षण करते हैं और प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रहे हैं, सुरक्षित इंडोर सुविधा का उपलब्ध होना बेहद महत्वपूर्ण होता है।
बार्किंग की रहने वाली आइवा सैटो जैसी कई माताएं इस फैसले से नाराज हैं। उनकी 11 वर्षीय बेटी टोको राष्ट्रीय स्तर की स्केटबोर्डर है। बच्ची के लिए स्केटबोर्डिंग केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि गंभीर खेल प्रशिक्षण का हिस्सा है। ऐसे में सुरक्षित इंडोर अभ्यास स्थल का बंद हो जाना उसके प्रशिक्षण को सीधे प्रभावित कर सकता है।
एक मां के लिए यह सवाल और भी बड़ा है कि यदि स्थानीय स्तर पर बच्चों के खेलने के लिए सार्वजनिक सुविधाएं ही नहीं बचेंगी, तो वे अपने बच्चों को खेलों में आगे कैसे बढ़ाएंगी?
एक और जिम्नास्टिक सेंटर बंद हुआ, उसकी जगह बना निजी पैडल क्लब
स्थानीय लोगों की नाराजगी केवल बार्किंग स्केटपार्क तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, एक जिम्नास्टिक सेंटर को भी बंद कर दिया गया और उसकी जगह निजी पैडल क्लब विकसित किया गया।
यह उदाहरण स्थानीय समुदाय के उस डर को बढ़ाता है कि खेलों के लिए उपलब्ध सार्वजनिक और सामुदायिक स्थान धीरे-धीरे अधिक कमाई करने वाली गतिविधियों में बदले जा रहे हैं।
जिम्नास्टिक, स्केटबोर्डिंग, बास्केटबॉल और बच्चों के खुले खेल जैसी गतिविधियों की एक खासियत यह है कि इनमें कई बच्चे और युवा बिना किसी बड़े आर्थिक खर्च के भाग ले सकते हैं। लेकिन यदि वही स्थान ऐसे खेल के लिए इस्तेमाल हो जाए जहां प्रति घंटे सैकड़ों पाउंड तक शुल्क लिया जाता है, तो कम आय वाले परिवारों के लिए विकल्प तेजी से सीमित हो सकते हैं।
यही वह बिंदु है जहां पैडल की लोकप्रियता से आगे बढ़कर पूरा विवाद सामाजिक समानता का रूप लेने लगा है।
एक घंटे के पैडल के लिए 51 पाउंड! फीस ने बढ़ाई नाराजगी
लंदन में पैडल कोर्ट की फीस स्थानीय लोगों की चिंता का सबसे बड़ा कारण बन रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, लंदन में एक घंटे के लिए पैडल कोर्ट बुक करने का औसत खर्च लगभग 51 पाउंड बताया जा रहा है। भारतीय मुद्रा में यह करीब 5,400 रुपये के आसपास बैठता है, हालांकि वास्तविक शुल्क स्थान, समय और ऑपरेटर के अनुसार अलग हो सकता है।
एक परिवार के लिए यह राशि मामूली नहीं है। यदि बच्चों को नियमित रूप से प्रशिक्षण देना हो और सप्ताह में कई बार कोर्ट बुक करना पड़े तो खर्च तेजी से बढ़ सकता है।
यही कारण है कि आर्थिक रूप से कमजोर इलाकों में रहने वाले परिवार इस बदलाव को लेकर विशेष रूप से चिंतित हैं।
एक ऐसा खेल मैदान जहां बच्चे मुफ्त में स्केटिंग, बास्केटबॉल या अन्य गतिविधियां कर सकते थे, यदि वहां खेलने के लिए दर्जनों पाउंड प्रति घंटे खर्च करने पड़ें तो बड़ी संख्या में परिवार स्वाभाविक रूप से उससे बाहर हो जाएंगे।
पैडल के खिलाफ नहीं, ‘किसके लिए’ सवाल पर है विवाद
यहां एक महत्वपूर्ण फर्क समझना जरूरी है। स्थानीय लोगों का विरोध जरूरी नहीं कि पैडल खेल के खिलाफ हो। पैडल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और खेल के रूप में इसका अपना महत्व है।
विवाद मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि पैडल कोर्ट बनाने के लिए किस जमीन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
यदि किसी खाली या व्यावसायिक जमीन पर नया पैडल सेंटर बनाया जाता है तो विवाद की संभावना अलग होती है। लेकिन यदि बच्चों के लिए मुफ्त खेल का मैदान, सार्वजनिक स्केटपार्क या सामुदायिक खेल सुविधा को हटाकर उसकी जगह महंगा निजी खेल परिसर बनाया जाता है, तो सवाल सार्वजनिक संसाधनों के इस्तेमाल पर उठता है।
यही कारण है कि स्थानीय लोगों की नाराजगी को केवल ‘पैडल विरोध’ कहना पूरे विवाद को छोटा कर देना होगा।
कैमडन में एक साल के विरोध के बाद रद्द हुआ पैडल कोर्ट प्रस्ताव
लंदन के कैमडन इलाके में भी इसी तरह का विवाद सामने आया। यहां बच्चों के लिए उपलब्ध एक मुफ्त खेल स्थान को हटाकर पैडल कोर्ट बनाने का प्रस्ताव रखा गया था।
स्थानीय लोगों ने इसका लंबे समय तक विरोध किया। लगभग एक साल तक चले विरोध के बाद पिछले सप्ताह इस प्रस्ताव को रद्द कर दिया गया।
यह फैसला स्थानीय समुदाय के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा गया। इससे यह संकेत भी मिला कि यदि स्थानीय लोग किसी सार्वजनिक खेल सुविधा को बचाने के लिए संगठित होकर आवाज उठाते हैं तो योजनाओं पर पुनर्विचार संभव है।
कैमडन का घटनाक्रम अब बार्किंग के लोगों के लिए भी उम्मीद का उदाहरण बन गया है।
बार्किंग स्केटपार्क बचाने के लिए 4,500 से ज्यादा लोगों ने उठाई आवाज
बार्किंग स्केटपार्क को बचाने की कोशिशों में भी स्थानीय समुदाय पीछे नहीं हट रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 4,500 से ज्यादा लोगों ने ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं।
इतनी बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन यह दिखाता है कि मामला केवल कुछ स्केटबोर्डरों तक सीमित नहीं है। बच्चों के माता-पिता, स्थानीय निवासी और सार्वजनिक खेल सुविधाओं के समर्थक भी इस बहस में शामिल हो रहे हैं।
याचिका के पीछे मुख्य भावना यही बताई जा रही है कि यदि किसी सार्वजनिक खेल सुविधा को खत्म किया जाता है तो उसका विकल्प भी सार्वजनिक और सुलभ होना चाहिए।
लोगों का तर्क है कि बच्चों के लिए सुरक्षित खेल की जगह एक बार खत्म हो जाने के बाद उसे वापस पाना बेहद मुश्किल होता है।
प्रशासन का तर्क—पुराने पार्क घाटे में चल रहे थे
दूसरी तरफ प्रशासन और कुछ ऑपरेटर कंपनियों का तर्क है कि पुराने सार्वजनिक खेल पार्क आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं थे। उनका कहना है कि कुछ सुविधाएं घाटे में चल रही थीं और उनके रखरखाव का खर्च लगातार बढ़ रहा था।
यही वह तर्क है जो इस पूरे विवाद को और जटिल बना देता है।
यदि कोई खेल सुविधा लगातार आर्थिक नुकसान में चल रही है तो प्रशासन के सामने उसके रखरखाव का खर्च उठाने का सवाल स्वाभाविक है। लेकिन स्थानीय लोगों का सवाल है कि इसका समाधान यह क्यों हो कि सुविधा को ऐसी गतिविधि में बदल दिया जाए जिसे केवल भुगतान करने वाले लोग इस्तेमाल कर सकें?
क्या पुराने पार्कों को बेहतर मॉडल के साथ चलाया जा सकता था? क्या स्थानीय परिषद, खेल संगठनों और निजी ऑपरेटरों के बीच कोई साझेदारी हो सकती थी? क्या कुछ घंटे मुफ्त और कुछ घंटे भुगतान आधारित किए जा सकते थे? ऐसे विकल्पों पर बहस की मांग भी इसी विवाद से निकलती है।
लंदन में पैडल का विस्फोटक विस्तार
पैडल को लेकर विवाद इसलिए भी बड़ा हो गया है क्योंकि ब्रिटेन में इस खेल का विस्तार बेहद तेज गति से हुआ है।
पैडल को टेनिस और स्क्वॉश से प्रभावित रैकेट खेल माना जाता है। अपेक्षाकृत छोटे कोर्ट, डबल्स आधारित खेल और सामाजिक रूप से खेलने की इसकी शैली ने इसे तेजी से लोकप्रिय बनाया है।
ब्रिटेन में वर्ष 2020 के आसपास पैडल कोर्ट की संख्या केवल 87 बताई जाती थी। अब यह संख्या 2,000 से अधिक पहुंच चुकी है।
यानी कुछ ही वर्षों में कोर्ट्स की संख्या में जबरदस्त वृद्धि हुई है।
यह बदलाव बताता है कि खेल की मांग वास्तविक है। लोग पैडल खेलना चाहते हैं, निवेशक इसमें पैसा लगाना चाहते हैं और निजी क्लब तेजी से खुल रहे हैं।
समस्या तब पैदा होती है जब इस विस्तार के लिए उपलब्ध सार्वजनिक जमीन और पहले से मौजूद सामुदायिक खेल सुविधाओं पर नजर पड़ती है।
छह साल में 87 से 2,000 से ज्यादा कोर्ट—इतनी तेज क्यों बढ़ा पैडल?
पैडल की लोकप्रियता के पीछे कई कारण हैं। यह खेल अपेक्षाकृत छोटे कोर्ट में खेला जाता है और इसे कई लोग सामाजिक खेल के रूप में भी पसंद करते हैं।
टेनिस की तुलना में कोर्ट का आकार छोटा होने के कारण शहरी क्षेत्रों में इसे स्थापित करना कुछ मामलों में आसान हो सकता है। साथ ही चार खिलाड़ियों के साथ खेलने की इसकी संरचना इसे दोस्तों, सहकर्मियों और परिवारों के बीच लोकप्रिय बनाती है।
सोशल मीडिया और सेलिब्रिटी संस्कृति ने भी पैडल को लोकप्रिय बनाने में भूमिका निभाई है। खेल को आधुनिक, सामाजिक और फिटनेस आधारित गतिविधि के रूप में पेश किया जा रहा है।
ब्रिटेन में इसके खिलाड़ियों की संख्या 10 लाख से अधिक पहुंचने की बात कही जा रही है। दुनियाभर में लगभग 3.5 करोड़ लोग पैडल खेलने से जुड़े बताए जाते हैं।
इतनी बड़ी मांग ने खेल को एक तेजी से बढ़ते व्यावसायिक बाजार में बदल दिया है।
पैडल अब सिर्फ खेल नहीं, बड़ा बिजनेस भी बन चुका है
जैसे-जैसे खिलाड़ियों की संख्या बढ़ी, पैडल कोर्ट का कारोबार भी तेजी से बढ़ा। शहरों में खाली जगहों, औद्योगिक परिसरों और अन्य जमीनों को पैडल सुविधाओं में बदलने के लिए निवेश बढ़ा।
लंदन जैसे महंगे और जमीन की कमी वाले शहर में उपलब्ध जगह की कीमत और भी अधिक होती है। ऐसे में निवेशकों की नजर उन स्थानों पर जाना स्वाभाविक है जहां पहले से खेल सुविधाएं मौजूद हैं।
यदि किसी पुराने खेल पार्क की जमीन पर नया व्यवसाय अधिक राजस्व पैदा कर सकता है तो ऑपरेटर के लिए यह आर्थिक रूप से आकर्षक हो सकता है।
लेकिन यही गणित स्थानीय समुदाय के लिए समस्या बन जाता है।
मुफ्त खेल बनाम महंगा खेल—लंदन में नई सामाजिक बहस
यह विवाद अब एक बड़े सामाजिक सवाल में बदल रहा है—क्या खेल केवल उन लोगों के लिए उपलब्ध होना चाहिए जो उसकी फीस दे सकते हैं?
यदि किसी बच्चे के माता-पिता हर सप्ताह 50 पाउंड या उससे ज्यादा खर्च नहीं कर सकते तो क्या उस बच्चे को शहर के आधुनिक खेलों से दूर रहना पड़ेगा?
यह सवाल विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर इलाकों में महत्वपूर्ण है। ऐसे क्षेत्रों में सार्वजनिक खेल मैदान और मुफ्त या कम लागत वाली सुविधाएं बच्चों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं।
खेल केवल शारीरिक गतिविधि नहीं है। यह बच्चों के आत्मविश्वास, अनुशासन, सामाजिक संपर्क और मानसिक विकास में भी भूमिका निभाता है।
इसलिए सार्वजनिक खेल सुविधाओं को खत्म करने का प्रभाव खेल से कहीं अधिक व्यापक हो सकता है।
गरीब परिवारों के बच्चों के लिए खेल का रास्ता बंद होने का डर
राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी बनने वाले कई बच्चे ऐसे परिवारों से आते हैं जो महंगे निजी क्लबों का खर्च नहीं उठा सकते। शुरुआत अक्सर स्थानीय पार्क, सामुदायिक केंद्र या मुफ्त खेल सुविधा से होती है।
11 साल की टोको इसका उदाहरण है। वह राष्ट्रीय स्तर की स्केटबोर्डर है और नियमित अभ्यास के लिए सुरक्षित इंडोर जगह की जरूरत है।
यदि बार्किंग जैसा बड़ा इनडोर स्केटपार्क बंद हो जाता है तो ऐसे बच्चों के सामने दो विकल्प बचते हैं—या तो वे दूर स्थित किसी दूसरी सुविधा तक जाएं या महंगी निजी सुविधा तलाशें।
दोनों ही विकल्प परिवार के लिए अतिरिक्त खर्च और समय की मांग करते हैं।
क्या सार्वजनिक जमीन पर निजी खेल सुविधा सही मॉडल है?
पैडल कोर्ट के विस्तार ने सार्वजनिक जमीन के इस्तेमाल पर भी सवाल खड़ा किया है।
यदि जमीन सार्वजनिक है और उसका उद्देश्य स्थानीय समुदाय को सुविधा देना है, तो किसी निजी व्यवसाय को वहां संचालन का अधिकार देने से पहले कई सवालों पर विचार जरूरी है।
क्या स्थानीय बच्चों को मुफ्त समय मिलेगा?
क्या कम आय वाले परिवारों के लिए रियायती दर होगी?
क्या पुराने खेल की सुविधा पूरी तरह खत्म होगी या उसका कोई विकल्प तैयार किया जाएगा?
क्या ऑपरेटर स्थानीय समुदाय के साथ राजस्व या सुविधा साझा करेगा?
ऐसे सवालों के जवाब तय कर सकते हैं कि नया पैडल कोर्ट समुदाय के लिए अवसर है या सार्वजनिक सुविधा का नुकसान।
प्रीमियर पैडल टूर्नामेंट में भारी लोकप्रियता
पैडल की लोकप्रियता का अंदाजा लंदन में हाल ही में आयोजित प्रीमियर पैडल टूर्नामेंट से भी लगाया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, टूर्नामेंट के टिकट तेजी से बिक गए।
इससे पता चलता है कि पैडल अब केवल स्थानीय क्लबों तक सीमित खेल नहीं है। इसके आसपास प्रोफेशनल टूर्नामेंट, दर्शक, प्रायोजन और व्यावसायिक अवसरों का बाजार भी विकसित हो रहा है।
यह खेल ब्रिटेन के खेल उद्योग में एक नए व्यावसायिक क्षेत्र के रूप में उभर रहा है।
लेकिन जैसे-जैसे इसका व्यवसाय बढ़ेगा, सार्वजनिक जमीन और निजी निवेश के बीच संतुलन का सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।
क्या पैडल को गरीब और अमीर दोनों के लिए बनाया जा सकता है?
पैडल के समर्थकों का तर्क हो सकता है कि नया खेल भी खेलों की दुनिया का हिस्सा है और उसे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। यह तर्क अपने आप में गलत नहीं है।
समस्या यह है कि किसी नए खेल को बढ़ावा देने का तरीका ऐसा होना चाहिए जिसमें पुराने खेलों के खिलाड़ियों और बच्चों की जगह पूरी तरह खत्म न हो।
सरकार और स्थानीय परिषद चाहें तो सार्वजनिक-निजी साझेदारी का ऐसा मॉडल बना सकती हैं जिसमें कुछ समय पैडल के लिए हो और कुछ समय स्थानीय बच्चों के लिए मुफ्त या कम शुल्क पर।
इसी तरह कम आय वाले परिवारों के लिए सब्सिडी या सामुदायिक पास की व्यवस्था भी की जा सकती है।
क्या खेल सुविधाएं ‘लक्जरी’ बनती जा रही हैं?
लंदन जैसे शहर में जमीन और संपत्ति की कीमत पहले ही बहुत अधिक है। ऐसे में यदि सार्वजनिक खेल सुविधाएं भी लगातार निजी और महंगी होती गईं तो खेल धीरे-धीरे मध्यम और उच्च आय वाले परिवारों तक सीमित होने का खतरा पैदा कर सकता है।
एक तरफ शहर फिटनेस, मानसिक स्वास्थ्य और युवाओं को सक्रिय रखने के लिए खेल को बढ़ावा देता है। दूसरी तरफ यदि खेल के लिए मुफ्त जगहें खत्म होती जाएं तो इन नीतियों के बीच विरोधाभास पैदा हो सकता है।
बच्चों से यह कहना कि वे सक्रिय रहें और खेलें आसान है। लेकिन इसके लिए सुरक्षित और किफायती जगह उपलब्ध कराना उससे कहीं बड़ी चुनौती है।
स्केटबोर्डिंग, बास्केटबॉल और जिम्नास्टिक जैसे खेलों की समस्या
पैडल कोर्ट का विवाद उन खेलों के भविष्य पर भी सवाल खड़ा करता है जिनके लिए महंगे निजी क्लबों की बजाय सार्वजनिक सुविधाओं की आवश्यकता होती है।
स्केटबोर्डिंग के लिए विशेष रैंप और सुरक्षित जगह चाहिए। बास्केटबॉल के लिए कोर्ट चाहिए। जिम्नास्टिक के लिए उपकरण और प्रशिक्षित सुविधा चाहिए।
यदि इन सुविधाओं को खत्म कर दिया जाता है तो बच्चे केवल घर के आसपास सामान्य खेल गतिविधियों से प्रतिस्थापित नहीं कर सकते।
यही वजह है कि स्थानीय माता-पिता इस मुद्दे को बच्चों के भविष्य से जोड़ रहे हैं।
कैमडन का फैसला बार्किंग के लिए बना उम्मीद का संकेत
कैमडन में लंबे विरोध के बाद पैडल कोर्ट की योजना रद्द होना स्थानीय समुदायों के लिए महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है।
इससे यह संदेश गया कि स्थानीय लोगों की संगठित आवाज योजनाओं पर असर डाल सकती है। अब बार्किंग में भी लोग उम्मीद कर रहे हैं कि स्केटपार्क को बचाने की कोशिशों पर प्रशासन और ऑपरेटर पुनर्विचार करेंगे।
4,500 से ज्यादा लोगों का ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर करना बताता है कि इस मुद्दे को लेकर स्थानीय समर्थन व्यापक हो सकता है।
पैडल का भविष्य उज्ज्वल, लेकिन मॉडल पर सवाल
ब्रिटेन में पैडल की लोकप्रियता को रोकना शायद संभव भी नहीं और जरूरी भी नहीं। 87 से 2,000 से ज्यादा कोर्ट तक पहुंचने की रफ्तार बताती है कि इस खेल की मांग मजबूत है।
10 लाख से ज्यादा ब्रिटिश खिलाड़ियों और दुनिया भर में लगभग 3.5 करोड़ खिलाड़ियों के आंकड़े इसे तेजी से बढ़ते वैश्विक खेलों में शामिल करते हैं।
लेकिन किसी खेल की लोकप्रियता उसे सार्वजनिक संसाधनों पर स्वतः प्राथमिकता नहीं देती।
लंदन की असली चुनौती यह है कि पैडल का विस्तार कैसे हो, लेकिन उसके साथ बच्चों के लिए मुफ्त खेल की जगह भी बनी रहे।
‘पे-टू-प्ले’ मॉडल पर जनता क्यों नाराज है?
पे-टू-प्ले मॉडल का अर्थ है कि सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए शुल्क देना होगा। निजी क्लबों के लिए यह व्यावसायिक रूप से सामान्य मॉडल है।
लेकिन जब ऐसी सुविधा उस जमीन पर बनाई जाती है जहां पहले लोग मुफ्त में खेल सकते थे, तो स्थानीय लोगों की नजर में यह बदलाव अलग अर्थ रखता है।
यही कारण है कि लोगों का विरोध केवल फीस के खिलाफ नहीं है। असली शिकायत यह है कि सार्वजनिक सुविधा को निजी भुगतान आधारित सुविधा में बदलने से समुदाय के एक बड़े हिस्से की पहुंच समाप्त हो रही है।
लंदन को अब एक संतुलन तलाशना होगा
लंदन में पैडल का भविष्य तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। लेकिन शहर को यह भी तय करना होगा कि इस विकास के साथ सार्वजनिक खेल सुविधाओं का क्या होगा।
क्या नए पैडल कोर्ट खाली व्यावसायिक जमीन पर बनाए जा सकते हैं?
क्या पुराने सार्वजनिक खेल मैदानों को खत्म करने के बजाय उनका आधुनिकीकरण किया जा सकता है?
क्या निजी ऑपरेटरों को सामुदायिक उपयोग के लिए कुछ घंटे अनिवार्य रूप से देने चाहिए?
क्या बच्चों और कम आय वाले परिवारों के लिए मुफ्त या सब्सिडी वाली सुविधाएं बनाई जा सकती हैं?
इन सवालों का जवाब आने वाले वर्षों में लंदन की खेल नीति को प्रभावित कर सकता है।
एक तरफ 3.5 करोड़ खिलाड़ी, दूसरी तरफ बच्चों के लिए जगह का संकट
पैडल की वैश्विक लोकप्रियता और सार्वजनिक खेल सुविधाओं का संकट पहली नजर में अलग-अलग मुद्दे लगते हैं। लेकिन लंदन में दोनों अब एक ही जमीन पर आकर टकरा रहे हैं।
एक तरफ करोड़ों खिलाड़ी और तेजी से बढ़ता खेल बाजार है। दूसरी तरफ ऐसे बच्चे हैं जिन्हें खेलने के लिए मुफ्त जगह चाहिए।
एक तरफ निवेशक और ऑपरेटर आर्थिक रूप से टिकाऊ खेल सुविधाएं चाहते हैं। दूसरी तरफ स्थानीय परिवार चाहते हैं कि उनके बच्चों के लिए सामुदायिक स्थान बचा रहे।
यह बहस आने वाले समय में सिर्फ लंदन तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। जैसे-जैसे पैडल और अन्य नए खेल तेजी से लोकप्रिय होंगे, दुनिया के बड़े शहरों में भी सार्वजनिक जमीन और निजी खेल व्यवसाय के बीच संतुलन का सवाल उठ सकता है।
लंदन में पैडल की जीत तभी पूरी होगी जब बच्चे हारेंगे नहीं
पैडल का बढ़ना खेल की लोकप्रियता की कहानी है, लेकिन बार्किंग और कैमडन की घटनाएं यह भी पूछ रही हैं कि इस सफलता की कीमत कौन चुका रहा है। यदि नए कोर्ट बनते हैं और साथ ही पुराने मुफ्त खेल मैदान गायब होते जाते हैं, तो शहर में खेल की उपलब्धता बढ़ने के बजाय उसका सामाजिक विभाजन बढ़ सकता है।
11 वर्षीय टोको जैसे बच्चों के लिए खेल केवल मनोरंजन नहीं बल्कि भविष्य का सपना है। राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनने के लिए उसे अभ्यास की जगह चाहिए, और वह जगह केवल उन्हीं बच्चों के लिए उपलब्ध नहीं होनी चाहिए जिनके परिवार हर सप्ताह महंगी फीस दे सकते हैं।
लंदन में पैडल का बाजार बढ़ रहा है, कोर्ट्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है और खेल को लेकर दर्शकों तथा खिलाड़ियों का उत्साह भी बढ़ रहा है। लेकिन इस पूरे उछाल के बीच एक सवाल लगातार सामने खड़ा है—क्या शहर ऐसा मॉडल बना सकता है जिसमें पैडल भी बढ़े और बच्चों की मुफ्त खेल की दुनिया भी बची रहे?

