उत्तर प्रदेश

Meerut में सेक्सवर्धक दवाओं के नाम पर 50 लाख की साइबर ठगी का पर्दाफाश, 10 राज्यों के लोग बने शिकार, चार आरोपी गिरफ्तार

Meerut में साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ऑनलाइन सेक्सवर्धक दवाएं उपलब्ध कराने के नाम पर देशभर के लोगों से करीब 50 लाख रुपये की ठगी की गई। इस हाईटेक साइबर फ्रॉड का खुलासा मेरठ साइबर सेल और हस्तिनापुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में हुआ है। पुलिस ने इस मामले में मास्टरमाइंड समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

बताया जा रहा है कि आरोपी पहले एक ऑनलाइन दवा सप्लाई कंपनी में काम करता था और नौकरी छोड़ने के बाद उसने अपने साथियों के साथ मिलकर लोगों को ठगने का संगठित नेटवर्क तैयार कर लिया। आरोपियों ने नोएडा स्थित कंपनी के ग्राहकों का डाटा चोरी कर उसे साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किया। मामले में अब तक दस राज्यों के दर्जनों लोग शिकायत दर्ज करा चुके हैं।


नोएडा की दवा कंपनी का डाटा बना साइबर गैंग का हथियार

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड हस्तिनापुर थाना क्षेत्र की न्यू ब्लॉक कॉलोनी निवासी संजय सरकार है। वह पहले नोएडा सेक्टर-62 स्थित एक ऑनलाइन दवा सप्लाई कंपनी में काम करता था। नौकरी के दौरान उसे कंपनी के ग्राहकों और ऑर्डर सिस्टम की पूरी जानकारी मिल गई थी।

नौकरी छोड़ने के बाद संजय सरकार ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर साइबर ठगी का नेटवर्क तैयार किया। आरोप है कि उसने अपने पूर्व सहकर्मी मुन्ना कुमार शाह की मदद से कंपनी से सेक्सवर्धक दवाएं खरीदने वाले ग्राहकों का निजी डाटा हासिल किया। इस डाटा में ग्राहकों के मोबाइल नंबर, ऑनलाइन पूछताछ और दवा ऑर्डर संबंधी जानकारी शामिल थी।

इसी जानकारी का इस्तेमाल कर आरोपी लोगों से संपर्क करते और उन्हें भरोसे में लेकर ऑनलाइन भुगतान करवाते थे।


ऐसे फंसाते थे लोगों को, QR कोड भेजकर खाते में मंगवाते थे पैसा

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी बेहद सुनियोजित तरीके से लोगों को अपना शिकार बनाते थे। सबसे पहले ग्राहकों को फोन या व्हाट्सएप मैसेज के जरिए संपर्क किया जाता था। उन्हें बताया जाता था कि उनकी ऑर्डर की गई दवा डिस्काउंट ऑफर या विशेष स्कीम के तहत उपलब्ध कराई जाएगी।

इसके बाद आरोपी ग्राहकों को QR कोड भेजते और ऑनलाइन पेमेंट अपने बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लेते। जैसे ही पैसा उनके खाते में पहुंचता, आरोपी तुरंत संबंधित ग्राहक का मोबाइल नंबर ब्लॉक कर देते।

कई लोगों को लंबे समय तक यह समझ ही नहीं आया कि उनके साथ ठगी हो चुकी है। जब दवा की डिलीवरी नहीं हुई तो पीड़ितों ने संबंधित कंपनी से संपर्क किया, जहां उन्हें पता चला कि कंपनी को कोई भुगतान मिला ही नहीं है।


10 राज्यों के लोग बने शिकार, प्रतिबिंब पोर्टल पर पहुंचीं शिकायतें

एसपी देहात अभिजीत कुमार और सीओ पंकज लवानिया ने बताया कि इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के प्रतिबिंब पोर्टल पर इस मामले से जुड़ी कई शिकायतें दर्ज हुई थीं। शिकायतों की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल नंबर और आईएमईआई नंबर ट्रेस किए।

जांच में सामने आया कि गिरोह ने हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के लोगों को निशाना बनाया। अब तक 37 पीड़ितों द्वारा शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है, लेकिन पुलिस को आशंका है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।


चार आरोपी गिरफ्तार, मोबाइल-सिम और नकदी बरामद

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संजय सरकार, मोहित सरकार, सुब्रमण्यम यामलवलसा और हर्ष सरकार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से आठ मोबाइल फोन, दस सिम कार्ड, चार एटीएम कार्ड, 20,210 रुपये नकद, एक बाइक और एयरटेल वाई-फाई डिवाइस बरामद की गई।

दिलचस्प बात यह रही कि पुलिस टीम अन्य सामान के साथ एक इलेक्ट्रिक इंडक्शन भी अपने साथ ले आई। हालांकि अधिकारियों ने साफ किया कि इंडक्शन का इस्तेमाल ठगी में नहीं किया गया था, लेकिन बरामदगी सूची में उसे भी शामिल कर लिया गया।


रोजाना मिलता था ग्राहकों का डाटा, 2500 रुपये में होती थी डील

पुलिस पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि कंपनी में काम करने वाला मुन्ना कुमार शाह रोजाना ग्राहकों का डाटा संजय सरकार को उपलब्ध कराता था। इसके बदले उसे प्रतिदिन 2500 रुपये दिए जाते थे।

मुन्ना उन लोगों की जानकारी साझा करता था, जिन्होंने ऑनलाइन सेक्सवर्धक दवाओं के बारे में पूछताछ की थी या ऑर्डर देने की प्रक्रिया शुरू की थी। चूंकि ग्राहक पहले से दवा खरीदने में रुचि दिखा चुके होते थे, इसलिए आरोपी आसानी से उन्हें झांसे में ले लेते थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल साइबर ठगी नहीं बल्कि ग्राहकों की निजी जानकारी के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण भी है।


ऑनलाइन दवा खरीदने वालों के लिए बड़ा सबक

इस घटना ने एक बार फिर ऑनलाइन खरीदारी और डिजिटल पेमेंट सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोग अक्सर निजी या संवेदनशील दवाओं के मामले में जल्दी भरोसा कर लेते हैं, जिसका फायदा साइबर अपराधी उठाते हैं।

विशेष रूप से सेक्सवर्धक दवाओं, वजन घटाने वाली दवाओं और निजी स्वास्थ्य संबंधी प्रोडक्ट्स के नाम पर ऑनलाइन ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अपराधी लोगों की गोपनीयता और झिझक का फायदा उठाकर उन्हें आसानी से फंसा लेते हैं।


पुलिस ने जारी की चेतावनी, अनजान QR कोड से रहें सावधान

मेरठ पुलिस और साइबर सेल ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति या संदिग्ध नंबर द्वारा भेजे गए QR कोड को स्कैन कर भुगतान न करें। किसी भी ऑनलाइन दवा या सेवा का भुगतान करने से पहले संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट और ग्राहक सेवा नंबर की पुष्टि जरूर करें।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन ठगी का शिकार होता है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। शुरुआती समय में शिकायत मिलने पर कई मामलों में पैसा वापस ट्रेस करने की संभावना बढ़ जाती है।


साइबर अपराध का बदलता चेहरा, डेटा लीक बन रहा बड़ा खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार आज साइबर अपराध केवल बैंक खातों तक सीमित नहीं रह गया है। अब अपराधी कंपनियों के ग्राहक डाटा, निजी जानकारी और डिजिटल रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर बेहद पेशेवर तरीके से लोगों को निशाना बना रहे हैं।

मेरठ का यह मामला दिखाता है कि कैसे किसी कंपनी का अंदरूनी डाटा गलत हाथों में पहुंचने पर हजारों लोग प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे मामलों में कंपनियों की डेटा सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों की निगरानी भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।


मेरठ में सामने आया यह साइबर फ्रॉड केवल ऑनलाइन ठगी का मामला नहीं बल्कि डिजिटल युग में डेटा सुरक्षा की बड़ी चेतावनी भी है। सेक्सवर्धक दवाओं के नाम पर लोगों की निजी जानकारी का इस्तेमाल कर जिस तरह करोड़ों रुपये की ठगी का नेटवर्क चलाया गया, उसने ऑनलाइन लेनदेन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस की कार्रवाई से फिलहाल इस गिरोह का पर्दाफाश हो गया है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि डिजिटल सतर्कता ही ऐसे साइबर अपराधों से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।

 

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