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Muzaffarnagar शुकतीर्थ में वट अमावस्या पर उमड़ा आस्था का महासैलाब, अक्षय वट की परिक्रमा कर महिलाओं ने मांगी अखंड सौभाग्य की कामना

Muzaffarnagar तीर्थ नगरी शुकतीर्थ में शनिवार को वट अमावस्या के अवसर पर आस्था, श्रद्धा और सनातन परंपरा का भव्य नजारा देखने को मिला। सुबह से ही गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। दूर-दराज के जिलों और राज्यों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने पतित पावनी मां गंगा में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया, वहीं महिलाओं ने वट सावित्री व्रत रखकर अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना की।

शुकतीर्थ का धार्मिक वातावरण मंत्रोच्चार, घंटियों की ध्वनि और भक्ति गीतों से पूरी तरह भक्तिमय नजर आया। गंगा घाटों से लेकर मंदिर परिसरों तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दिखाई दी। खासकर पांडव कालीन माने जाने वाले प्राचीन अक्षय वट वृक्ष के दर्शन और पूजा के लिए महिलाओं में विशेष उत्साह देखा गया।


अक्षय वट वृक्ष की परिक्रमा कर महिलाओं ने मांगा अखंड सौभाग्य

वट सावित्री व्रत को लेकर महिलाओं में सुबह से ही विशेष उत्साह बना रहा। पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने विधि-विधान के साथ व्रत रखा और शुकदेव आश्रम स्थित प्राचीन अक्षय वट वृक्ष की पूजा-अर्चना की।

महिलाओं ने वृक्ष की परिक्रमा करते हुए धागा बांधा, दीपक जलाए और अपने सुहाग की लंबी आयु के लिए प्रार्थना की। कई महिलाओं ने वट सावित्री की कथा सुनकर पूजा संपन्न की। श्रद्धालु महिलाओं का कहना था कि यह व्रत भारतीय संस्कृति और वैवाहिक जीवन की आस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पर्व है।

अक्षय वट वृक्ष के आसपास दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। कई महिलाएं अपने परिवार के साथ यहां पहुंचीं और पूरे श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना करती नजर आईं।


गंगा स्नान के लिए तड़के से पहुंचने लगे श्रद्धालु

वट अमावस्या के पावन अवसर पर श्रद्धालु तड़के सुबह ही गंगा घाटों पर पहुंचने लगे थे। सूर्योदय के साथ ही गंगा स्नान का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने हर-हर गंगे के जयकारों के बीच आस्था की डुबकी लगाई।

धार्मिक मान्यता के अनुसार वट अमावस्या के दिन गंगा स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है। इसी वजह से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शुकतीर्थ पहुंचे। घाटों पर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की भारी भीड़ दिखाई दी।

श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद विभिन्न मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।


शुकदेव मंदिर समेत विभिन्न धार्मिक स्थलों पर उमड़ी भीड़

गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने शुकदेव मंदिर, हनुमद्धाम, गणेश धाम, शिव धाम, दुर्गा धाम, पार्वती धाम, अखंड धाम और गंगा मंदिर सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर दर्शन किए।

मंदिर परिसरों में सुबह से देर शाम तक भक्तों की आवाजाही बनी रही। कई श्रद्धालुओं ने सत्यनारायण भगवान की कथा का आयोजन भी कराया। धार्मिक आयोजनों के चलते पूरी तीर्थ नगरी भक्तिमय माहौल में डूबी नजर आई।

मंदिरों में भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चार से वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया। साधु-संतों और आचार्यों ने श्रद्धालुओं को धर्म, सेवा और संस्कारों का महत्व बताया।


आश्रमों में हुए सत्संग और धार्मिक प्रवचन

शुकतीर्थ के विभिन्न आश्रमों में भी विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। दंडी आश्रम, महाशक्ति सिद्ध पीठ, श्री महेश्वर आश्रम, मां पीतांबरा धाम, अखंड धाम, तिलकधारी आश्रम, खिचड़ी वाले बाबा आश्रम और मानव निर्माण योग आश्रम में दिनभर सत्संग और प्रवचन का आयोजन चलता रहा।

संत-महात्माओं ने श्रद्धालुओं को भारतीय संस्कृति, परिवार व्यवस्था और धार्मिक परंपराओं के महत्व के बारे में बताया। कई स्थानों पर भंडारे और प्रसाद वितरण का भी आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।


वट अमावस्या को लेकर क्या है धार्मिक मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट सावित्री व्रत का संबंध माता सावित्री और सत्यवान की कथा से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि सावित्री ने अपने तप और संकल्प के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत रखती हैं।

आचार्य सुमन कृष्ण शास्त्री ने बताया कि वट वृक्ष को सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है। उन्होंने कहा कि वट अमावस्या त्याग, समर्पण और वैवाहिक निष्ठा का प्रतीक पर्व है। इस दिन वट वृक्ष की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।


शुकतीर्थ में सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। गंगा घाटों, मंदिरों और प्रमुख चौराहों पर पुलिस बल तैनात रहा।

महिला दरोगा अजय यादव पुलिस टीम के साथ लगातार व्यवस्थाओं की निगरानी करती नजर आईं। पुलिस कर्मियों ने श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्नान और दर्शन कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रशासन की ओर से यातायात व्यवस्था को भी नियंत्रित किया गया ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। स्थानीय लोगों ने पुलिस और प्रशासन की व्यवस्थाओं की सराहना की।


शुकतीर्थ में धार्मिक पर्यटन को मिला बढ़ावा

वट अमावस्या जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान शुकतीर्थ में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या स्थानीय व्यापार और धार्मिक पर्यटन के लिए भी सकारात्मक मानी जा रही है। होटल, दुकानों और प्रसाद विक्रेताओं के यहां दिनभर रौनक बनी रही।

धार्मिक पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि शुकतीर्थ धीरे-धीरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। यहां आयोजित होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में लगातार बढ़ती भीड़ इसकी लोकप्रियता को दर्शाती है।


सनातन परंपराओं के प्रति युवाओं में भी बढ़ रही आस्था

इस बार वट अमावस्या पर बड़ी संख्या में युवा श्रद्धालु भी अपने परिवारों के साथ शुकतीर्थ पहुंचे। कई युवाओं ने धार्मिक परंपराओं और संस्कृति से जुड़ने में रुचि दिखाई।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शुकतीर्थ का आध्यात्मिक वातावरण युवाओं को भी अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।


वट अमावस्या के अवसर पर शुकतीर्थ में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने एक बार फिर सनातन आस्था और धार्मिक परंपराओं की गहराई को जीवंत कर दिया। गंगा स्नान, अक्षय वट की पूजा, सत्संग और मंदिरों में गूंजते भक्ति स्वर पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भरते नजर आए। श्रद्धा, संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों से जुड़ा यह पर्व शुकतीर्थ की धार्मिक महत्ता को और अधिक मजबूत करता दिखाई दिया।

 

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