Moradabad Satta King Murder Case: 11 साल बाद इंसाफ, बिट्टू हत्याकांड में हिस्ट्रीशीटर साबिर कालिया समेत 4 को उम्रकैद
Moradabad murder case में करीब 11 साल बाद इंसाफ की घड़ी आई है। सट्टा किंग के नाम से कुख्यात रहे जुल्फिकार अली उर्फ बिट्टू की सनसनीखेज हत्या के मामले में सोमवार को मुरादाबाद की एडीजे-11 छाया शर्मा की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने हिस्ट्रीशीटर साबिर कालिया, उसके पिता मिट्ठन, बेटे शाकिर और रिजवान उर्फ इरफान को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
इसके साथ ही अदालत ने चारों दोषियों पर 27-27 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला मुरादाबाद के आपराधिक इतिहास में सट्टा कारोबार से जुड़ी सबसे चर्चित हत्याओं में से एक पर अंतिम मुहर माना जा रहा है।
सट्टे के धंधे की दुश्मनी बनी हत्या की वजह
यह Moradabad murder case नौ अक्तूबर 2014 की सुबह मझोला थाना क्षेत्र में हुई उस वारदात से जुड़ा है, जिसने पूरे शहर को दहला दिया था। सट्टे के अवैध कारोबार को लेकर वर्चस्व की लड़ाई में आज़ाद नगर स्थित गुलफाम मस्जिद के पास तड़के करीब 4:30 बजे जुल्फिकार अली उर्फ बिट्टू पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई गई थीं।
बिट्टू उस दौर में मुरादाबाद में सट्टा कारोबार का बड़ा नाम माना जाता था। इसी अवैध धंधे को लेकर पुरानी रंजिशें, गैंगवार और धमकियों का सिलसिला चल रहा था, जो अंततः उसकी हत्या में बदल गया।
बेटे की आंखों के सामने गोलियों से छलनी हुआ पिता
इस Moradabad murder case की सबसे दर्दनाक कड़ी वह है, जब बिट्टू को उसके बेटे की आंखों के सामने गोली मारी गई।
मृतक के बेटे इस्तेकार ने प्राथमिकी में बताया था कि वह अपने पिता बिट्टू और रिश्तेदार तनवीर के साथ आज़ाद नगर स्थित अपने कारखाने पर गया था।
इस्तेकार और तनवीर जैसे ही कारखाने का गेट खोलने लगे, बिट्टू सड़क पर खड़े होकर सिगरेट पी रहे थे। तभी अचानक कई हथियारबंद लोग वहां पहुंचे और बिना किसी चेतावनी के फायरिंग शुरू कर दी।
एक साथ पहुंचे कई हमलावर, ताबड़तोड़ फायरिंग
एफआईआर के अनुसार मौके पर पहुंचे हमलावरों में—
बारादरी निवासी अजीम
उसका भाई अय्यूब
कटघर के करबला गली नंबर-5 निवासी हिस्ट्रीशीटर साबिर कालिया
उसका बेटा शाकिर
पिता मिट्ठन
मझोला लाइनपार निवासी चंचल गुप्ता
उपदेश गुप्ता
शामिल बताए गए थे। हमलावरों ने बिट्टू पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
दिल्ली में इलाज के दौरान मौत, शहर में फैली सनसनी
गंभीर हालत में बिट्टू को पहले मुरादाबाद और फिर दिल्ली ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
इस हत्या के बाद Moradabad murder case ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी थी। सट्टा कारोबार, गैंगवार और अपराधियों के नेटवर्क पर एक बार फिर सवाल उठने लगे थे।
विवेचना के बाद बदली तस्वीर, कुछ नाम बाहर हुए
पुलिस ने मामले की विवेचना के बाद अजीम, साबिर कालिया, शाकिर, मिट्ठन और भोजपुर के कोरबाकू निवासी रिजवान उर्फ इरफान के खिलाफ हत्या में चार्जशीट दाखिल की।
हालांकि, जांच के दौरान चंचल गुप्ता, उपदेश गुप्ता और अय्यूब के नाम विवेचना से बाहर कर दिए गए।
यह पहलू भी Moradabad murder case को लेकर काफी चर्चा में रहा, क्योंकि शुरुआती एफआईआर में इन सभी के नाम शामिल थे।
लंबी सुनवाई, गवाह, जिरह और कानूनी पेच
इस केस की सुनवाई एडीजे-11 छाया शर्मा की अदालत में लंबे समय तक चली। अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से कई गवाह पेश किए गए। दस्तावेजी साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट और चश्मदीद बयानों पर विस्तार से बहस हुई।
इस दौरान आरोपी अजीम के लगातार गैरहाजिर रहने के चलते उसकी फाइल अलग अदालत में स्थानांतरित कर दी गई।
बाकी आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही।
अदालत का सख्त रुख, चार दोषियों को उम्रकैद
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने हिस्ट्रीशीटर साबिर कालिया, उसके पिता मिट्ठन, बेटे शाकिर और रिजवान को दोषी ठहराया।
अदालत ने माना कि हत्या सुनियोजित थी और सट्टे के अवैध कारोबार को लेकर रंजिश इसका मुख्य कारण बनी।
न्यायालय ने चारों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि संगठित अपराध और गैंगवार को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सट्टा, अपराध और शहर की कानून-व्यवस्था पर असर
यह Moradabad murder case केवल एक हत्या का मामला नहीं रहा, बल्कि इसने शहर में चल रहे सट्टे के अवैध नेटवर्क और अपराध की जड़ों को भी उजागर किया।
बिट्टू की हत्या के बाद पुलिस ने सट्टा कारोबार पर कई कार्रवाई की थीं, हालांकि यह धंधा अलग-अलग रूपों में अब भी चुनौती बना हुआ है।
11 साल बाद फैसले से पीड़ित परिवार को मिली राहत
करीब 11 साल तक चले इस केस के बाद आए फैसले से बिट्टू के परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है। बेटे इस्तेकार और परिजनों के लिए यह फैसला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि भावनात्मक राहत भी है।

