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Middle East युद्ध के बीच फंसे अमेरिकी डॉक्टर की फिल्मी वापसी: दोहा से टैक्सी में 9 घंटे का सफर कर बचाई जान

Middle East War Travel Crisis के बीच एक अमेरिकी डॉक्टर की घर वापसी की कहानी दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गई है। अमेरिका के न्यू ऑरलियन्स के रहने वाले डॉक्टर जेय मिलर के लिए भारत से लौटते समय शुरू हुई यात्रा अचानक एक डरावने अनुभव में बदल गई।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव, एयरस्पेस बंद होने और लगातार हो रहे हमलों के बीच वे कतर में फंस गए थे। लेकिन परिस्थितियों से हार मानने के बजाय उन्होंने खुद ही रास्ता ढूंढा और कई देशों से गुजरते हुए आखिरकार अपने घर न्यू ऑरलियन्स पहुंच गए। यह पूरी यात्रा किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगती।


भारत से छुट्टियां मनाकर लौट रहे थे डॉक्टर

Middle East War Travel Crisis से जुड़ी यह घटना 28 फरवरी की है। डॉक्टर जेय मिलर अपनी पारिवारिक छुट्टियां बिताने के बाद भारत से अमेरिका लौट रहे थे।

वे भारत से कतर की राजधानी दोहा पहुंचे थे, जहां से उन्हें डलास के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़नी थी। लेकिन उसी दौरान मिडिल ईस्ट में अचानक हालात बदल गए।

इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमला किया था, जिसके जवाब में ईरान ने कई जगहों पर रॉकेट और ड्रोन हमले शुरू कर दिए। इस तनाव के कारण कतर समेत पूरे मिडिल ईस्ट के कई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद कर दिए


एक घंटे बाद वापस लौटा विमान

डॉ. मिलर ने बताया कि वे दोहा से डलास के लिए उड़ान भर चुके थे, लेकिन उड़ान के लगभग एक घंटे बाद विमान को वापस दोहा लौटना पड़ा

उस समय कई देशों ने अचानक एयरस्पेस बंद कर दिया था और सभी फ्लाइट्स रद्द या डायवर्ट होने लगी थीं। हजारों यात्री विभिन्न एयरपोर्ट पर फंस गए।

डॉ. मिलर के अनुसार यह स्थिति बेहद तनावपूर्ण थी क्योंकि किसी को यह पता नहीं था कि आगे क्या होगा।


पत्नी को फोन कर कहा – ‘आई लव यू’

इस दौरान डॉक्टर मिलर ने अपनी पत्नी को फोन किया।

उन्होंने बताया कि उस समय उन्हें हालात की गंभीरता का अंदाजा हो गया था, इसलिए उन्होंने अपनी पत्नी से सिर्फ इतना कहा कि “मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं”

उन्होंने बाद में बताया कि उस समय उन्हें यह भी नहीं पता था कि वे सुरक्षित घर लौट पाएंगे या नहीं।


दोहा में कई दिनों तक फंसे रहे

डॉ. मिलर पेशे से 45 वर्षीय पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट हैं। वे मरीजों के पास जल्दी लौटने के लिए अपनी पत्नी स्वाथी नर्रा और पांच साल की बेटी देवी से एक सप्ताह पहले ही भारत से निकल गए थे।

दोहा पहुंचने के बाद वे एंडाज दोहा होटल में ठहरे।

इस दौरान उन्होंने अमेरिकी विदेश विभाग से संपर्क किया, कई फॉर्म भरे और लुइसियाना के स्थानीय नेताओं से भी मदद मांगी।

लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट सहायता नहीं मिली।


सरकार ने कहा – खुद इंतजाम करें

डॉ. मिलर के मुताबिक अमेरिकी विदेश विभाग ने यात्रियों से कहा कि वे अपनी सुरक्षा के लिए सरकार पर पूरी तरह निर्भर न रहें।

इसके बाद उन्होंने खुद ही बाहर निकलने का रास्ता तलाशने का फैसला किया।


दोहा से रियाद तक 9 घंटे का सफर

Middle East War Travel Crisis के बीच डॉक्टर मिलर ने दोहा से निकलने के लिए एक अलग रास्ता अपनाया।

दोहा एयरपोर्ट बंद होने के कारण उन्होंने सऊदी अरब की राजधानी रियाद तक टैक्सी से जाने का फैसला किया।

इस सफर में उन्हें करीब 9 घंटे का समय लगा। रास्ते में उन्हें तीन अलग-अलग कारें बदलनी पड़ीं और इसके लिए लगभग 2.5 लाख रुपये खर्च करने पड़े।


रियाद से इथियोपिया की उड़ान

रियाद पहुंचने के बाद उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट मिली जो उन्हें इथियोपिया की राजधानी अदिस अबाबा लेकर गई।

वहां उन्हें लगभग 15 घंटे तक रुकना पड़ा, क्योंकि आगे की उड़ान का इंतजार करना था।


इटली होते हुए अमेरिका पहुंचे

इथियोपिया से उड़ान भरने के बाद विमान को ईंधन भरने के लिए इटली के रोम शहर में भी रुकना पड़ा।

इसके बाद फ्लाइट शिकागो पहुंची और अंत में डॉक्टर मिलर अपने गृहनगर न्यू ऑरलियन्स पहुंच सके।


युद्ध का असर यात्रियों पर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष का असर केवल राजनीतिक और सैन्य स्तर तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव आम यात्रियों और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी पड़ रहा है।

कई देशों के एयरस्पेस बंद होने के कारण हजारों यात्री अलग-अलग देशों के एयरपोर्ट पर फंस गए। कई फ्लाइट्स को डायवर्ट या रद्द करना पड़ा।


डॉक्टर की कहानी बनी चर्चा का विषय

Middle East War Travel Crisis के बीच डॉक्टर जेय मिलर की यह कहानी सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में तेजी से वायरल हो रही है।

कई लोगों ने इसे साहस, धैर्य और संकट के समय खुद रास्ता निकालने की मिसाल बताया है।


मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच हजारों यात्रियों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। डॉक्टर जेय मिलर की घर वापसी की यह कहानी बताती है कि संकट के समय धैर्य और साहस कितना महत्वपूर्ण होता है। युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव दुनिया भर के आम लोगों की यात्राओं और जीवन पर भी गहराई से पड़ता है।

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