नगरपालिका परिषद मुजफ्फरनगर में घोटालो की बहार, मची हैं लूट- सभासद ने दिये सबूत
मुजफ्फरनगर। वार्ड 31 की सभासद श्रीमती पूनम शर्मा ने आरोप लगाया है कि नगरपालिका परिषद के कर्ता धर्ताओं ने अनेकों बार अति उत्साह में ऐसे निर्णय लिये है जिनके कारण जहां एक ओर बोर्ड की छवि धूमिल हुई है वहीं पर पालिका प्रशासन को भी अपने कदम पीछे खीचंने पर मजबूर होना पड़ा है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पीस लाइब्रेरी और उद्यान विभाग का प्रकरण ओर मूर्ति प्रकरण इसके ज्वलंत उदाहरण है।प्रकाश चौक स्थित एक रेस्टोरेंट में पत्रकारां से बातचीत करते हुए श्रीमती पूनम शर्मा ने आरोप लगाया कि उन्होंने नगरपालिका परिषद के स्टेनों पद पर कार्य करते हुए स्टेनो गोपाल त्यागी के विरूद्ध शासन को जो शिकायते भेजी थी उसके विरोध में उनके वार्डवासियों के कार्यो का हनन किया जा रहा है।
सफाईकर्मचारियों और सफाई नायकों के तबादले कर दिये गये है और अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बनाया जा रहा है कि वे अपनी शिकायते वापस ले ले। उन्होंने यह भी बताया कि उपरोक्त मामलों को लेकर उनकी ओर से दो रिट याचिकाएं इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल कर दी गयी है
और स्वायत्त शासन कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष और महामंत्री को पार्टी बनाकर नोटिस भी सर्व करा दिया गया है। जिस पर अब पुलिस कार्यवाही की तलवार दोनें पर लटकी हुई है।
श्रीमती पूनम शर्मा ने कहा कि उन्होंने अनेकों बार बोर्ड की बैठकों में जनहित के मुद्दों पर अपनी आवाज उठाई लेकिन बोर्ड की प्रोसेडिंग रजिस्टर में स्टेनों द्वारा उन्हे अंकित नहीं किया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाते हुए बताया कि पालिका में तैनात एक स्टेनो नियम के विरूद्ध स्टेनों पद पर कायम है जबकि इनका पद बोर्ड के प्रस्ताव के मुताबिक जगदीश भाटिया के कार्यकाल के साथ ही समाप्त कर दिया गया था और बाद में तत्कालीन चेयरमैन पंकज अग्रवाल ने भी इसका संदर्भ लेते हुए जिला प्रशासन को पत्र लिखा लेकिन ऊंचे रसूख और पहुंच वाले स्टेनों ने उन फाइलों को दबा लिया
और आज भी वे स्टेनों के पद पर कायम रहते हुए वेतन ले रहे है जिसकी जांच होनी आवश्यक है। उन्होंने बताया कि वे भ्रष्टाचार के विरूद्ध है और पद समाप्ति का प्रकरण तत्कालीन अपर जिलाधिकारी इन्द्रमणि त्रिपाठी की संस्तुति पर किया गया था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी प्रकार के दबाव में कोई कार्य नहीं करेगी। एक अन्य प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि हाल ही में पालिका की चेयरमैन ने लगभग तीस लाख रूपये का भुगतान एक ऐसे ठेकेदार के पुत्र को कर दिया जिसमें ठेकेदार की मृत्यु हो गयी और उसके पुत्र को अभी सक्षम न्यायालय द्वारा उत्तराधिकारी सर्टिफिकेट भी नहीं मिला
केवल मृत्यु प्रमाण पत्रों के आधार पर ही यह भुगतान करा दिया गया जिसकी जांच होनी आवश्यक है। श्रीमती पूनम शर्मा ने जिला प्रशासन के साथ-साथ उत्तर प्रदेश सरकार से भी मांग की है कि उपरोक्त सभी मामलों की किसी बड़ी गुप्तचर इकाई द्वारा जांच करायी जाये
उनके पास जो साक्षय है उसे भी वे जांच कर्ताओं के समक्ष प्रस्तुत करेगी। पत्रकार वार्ता में सुरेश त्यागी, मनोज शर्मा, अमीन साहब, संजय त्यागी, गिरीश त्यागी, इलम चंद, शिवनंदन शर्मा, अरविंद काला और गजे सिंह आदि मौजूद रहे।
