उत्तर प्रदेश

Aligarh स्कूल बस हादसा: छात्रा की मौत पर आरटीओ प्रवर्तन वंदना सिंह निलंबित, परमिट-बीमा विहीन बस पर कड़ी कार्रवाई

Aligarh स्कूल बस हादसा ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। कासगंज सीमा से सटे नगला साधु गांव में हुई इस दर्दनाक घटना में एक छात्रा की बस से गिरकर मौत हो गई। जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आने के बाद परिवहन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है।

रविवार को अलीगढ़ की आरटीओ प्रवर्तन वंदना सिंह और तत्कालीन सम्भागीय निरीक्षक (प्राविधिक) चंपालाल को निलंबित कर दिया गया। चंपालाल वर्तमान में सिद्धार्थनगर में तैनात हैं। दोनों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी किए गए हैं।


🔴 28 फरवरी का दर्दनाक हादसा: फर्श टूटा, बच्ची गिरी, पहिया चढ़ा

परिवहन आयुक्त किंजल सिंह के अनुसार 28 फरवरी को अलीगढ़ सीमा से सटे कासगंज के ग्राम नगला साधु में स्कूल बस का फर्श अचानक टूट गया। बस में बैठी एक बच्ची नीचे सड़क पर गिर गई और उसके ऊपर बस का पहिया चढ़ गया। हादसा इतना भयावह था कि मौके पर अफरा-तफरी मच गई। बच्ची को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

यह घटना न केवल परिवहन व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि स्कूल वाहनों की फिटनेस और निगरानी तंत्र की गंभीर खामियों को भी उजागर करती है।


🔴 बीमा नहीं, परमिट भी खत्म: जांच में खुला बड़ा खुलासा

अलीगढ़ स्कूल बस हादसा की जांच में सामने आया कि संबंधित बस का बीमा वैध नहीं था। इतना ही नहीं, बस का परमिट भी समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद वाहन स्कूल बच्चों को ढो रहा था।

इस गंभीर चूक को देखते हुए मामले का संज्ञान परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने स्वयं लिया। उन्होंने जिम्मेदारी तय करने और दोषियों पर कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए।


🔴 कई अफसरों को नोटिस, तीन दिन में जवाब तलब

मामले में उप परिवहन आयुक्त (परिक्षेत्र) आगरा, एआरटीओ (प्रशासन/प्रवर्तन) अलीगढ़, एआरटीओ (प्रशासन/प्रवर्तन) कासगंज और अलीगढ़ के यात्रीकर अधिकारी को नोटिस जारी किया गया है। तीन दिन के भीतर उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है।

स्पष्टीकरण के आधार पर आगे की जिम्मेदारी तय की जाएगी। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि लापरवाही प्रमाणित हुई तो और भी कड़ी कार्रवाई संभव है।


🔴 स्कूल प्रबंधन पर भी कार्रवाई की तैयारी

परिवहन विभाग ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर दी है। यह देखा जा रहा है कि स्कूल प्रशासन ने वाहन की वैधता और सुरक्षा मानकों की जांच क्यों नहीं की।

विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल बसों के संचालन में दोहरी जिम्मेदारी होती है—एक परिवहन विभाग की निगरानी और दूसरी स्कूल प्रबंधन की सतर्कता। यदि दोनों में चूक हो तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं।


🔴 सड़क सुरक्षा और स्कूल बसों की हालत पर उठे सवाल

अलीगढ़ स्कूल बस हादसा ने प्रदेश भर में स्कूल वाहनों की फिटनेस पर बहस छेड़ दी है। कई अभिभावकों ने सवाल उठाया है कि क्या नियमित रूप से बसों की जांच होती है? क्या बीमा और परमिट की वैधता की पुष्टि की जाती है?

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हर स्कूल वाहन की समय-समय पर तकनीकी जांच, ब्रेक सिस्टम, फर्श और सीटिंग संरचना की मजबूती की अनिवार्य जांच होनी चाहिए।


🔴 प्रशासन का सख्त संदेश

परिवहन विभाग का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। विभागीय जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक की जा सकती है।

यह मामला केवल एक हादसा नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही की परीक्षा बन गया है।


अलीगढ़ स्कूल बस हादसा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि लापरवाही की छोटी सी चूक भी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है। छात्रा की मौत ने प्रशासन और समाज दोनों को झकझोर दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद दोषियों पर क्या अंतिम कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

 

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