Muzaffarnagar में बैंककर्मियों का बड़ा आंदोलन: सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग की मांग पर एसबीआई शाखा पर गूंजे नारे, सरकार से फैसले की अपील
Muzaffarnagar bank strike ने सोमवार को शहर के रेलवे रोड क्षेत्र को आंदोलन और नारों की गूंज से भर दिया। सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की मुख्य शाखा पर एकजुट होकर विशाल प्रदर्शन किया। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) के बैनर तले आयोजित इस आंदोलन में सैकड़ों बैंककर्मियों ने सरकार और बैंक प्रबंधन के खिलाफ अपना रोष जाहिर किया और अपनी मांगों को लेकर स्पष्ट संदेश दिया कि जब तक फैसला नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
🔴 रेलवे रोड पर जुटा बैंककर्मियों का सैलाब
सुबह से ही रेलवे रोड स्थित एसबीआई शाखा के बाहर बैंक कर्मचारी और अधिकारी एकत्र होने लगे। हाथों में तख्तियां, बैनर और पोस्टर लेकर आए कर्मचारियों ने एक सुर में नारेबाजी शुरू की। “पांच दिन बैंकिंग हमारा अधिकार है” और “न्यायपूर्ण मांगें पूरी करो” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।
Muzaffarnagar bank strike के इस प्रदर्शन में न केवल एसबीआई, बल्कि जिले में कार्यरत विभिन्न बैंकों के कर्मचारी और अधिकारी भी शामिल हुए। यह आंदोलन उस साझा मंच का प्रतीक बना, जहां नौ प्रमुख बैंक यूनियनों ने मिलकर अपनी आवाज बुलंद की।
🔴 यूएफबीयू के बैनर तले एकजुटता का प्रदर्शन
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी गौरव किशोर, सचिन चौधरी सहित कई यूनियन नेताओं की मौजूदगी रही। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल कर्मचारियों के हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि बैंकिंग प्रणाली को अधिक संतुलित और प्रभावी बनाने की दिशा में एक कदम है।
उनका कहना था कि सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था से कर्मचारियों को बेहतर कार्य-जीवन संतुलन मिलेगा, जिससे उनकी कार्यक्षमता और ग्राहक सेवा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
🔴 द्विपक्षीय समझौते का हवाला और सरकार से सवाल
प्रदर्शन की शुरुआत करते हुए यूपीबीयू मुज़फ्फरनगर के साथी आर. पी. शर्मा ने 8 मार्च 2024 को हुए द्विपक्षीय समझौते का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस समझौते के तहत बैंक प्रबंधन और यूनियन के बीच सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था पर सहमति बनी थी और इस प्रस्ताव को संस्तुति के साथ केंद्र सरकार को भेजा गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर उदासीनता दिखाई है और अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। Muzaffarnagar bank strike इसी निराशा और आक्रोश का परिणाम है, जो पूरे देश के बैंक कर्मचारियों के बीच व्याप्त है।
🔴 एक दिवसीय हड़ताल का ऐलान
आर. पी. शर्मा ने मंच से घोषणा की कि 27 जनवरी 2026 को सभी बैंक कर्मचारी और अधिकारी पूरे दिन एक दिवसीय हड़ताल पर रहे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह आंदोलनात्मक कार्यक्रम तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी न्यायपूर्ण मांगें पूरी नहीं होतीं।
उनका यह बयान प्रदर्शन में मौजूद कर्मचारियों के बीच जोश और एकजुटता का प्रतीक बन गया। कई कर्मचारियों ने कहा कि यह केवल अधिकारों की लड़ाई नहीं, बल्कि सम्मान और संतुलित कार्यप्रणाली की मांग है।
🔴 यूनियन नेताओं के संबोधन और समर्थन की गूंज
Muzaffarnagar bank strike के दौरान कई यूनियन नेताओं ने मंच से कर्मचारियों को संबोधित किया। पीएनबीपीए के अध्यक्ष तेजराज गुप्ता, यूएफबीयू के सीओ कन्वीनर गौरव किशोर, एआईपीएनबीओए मुज़फ्फरनगर के अध्यक्ष फतेह सिंह, डीजीएस मेरठ मॉड्यूल स्टेट बैंक के सचिन चौधरी, एसबीआई जोनल सेक्रेटरी अनंगपाल और जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष यशवीर सिंह ने अपने विचार रखे।
सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि बैंक कर्मचारी देश की आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी मांगों को नजरअंदाज करना पूरे सिस्टम को कमजोर कर सकता है। उन्होंने सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील की।
🔴 कर्मचारियों का रोष और नारेबाजी
प्रदर्शन में शामिल सैकड़ों बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने सरकार और बैंक प्रबंधन के खिलाफ जोरदार नारे लगाए। कई कर्मचारियों का कहना था कि बढ़ते कार्यभार, डिजिटल बैंकिंग की चुनौतियों और ग्राहकों की बढ़ती अपेक्षाओं के बीच कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
उनके अनुसार, सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू होने से न केवल कर्मचारियों को राहत मिलेगी, बल्कि वे ग्राहकों को बेहतर सेवाएं भी दे पाएंगे।
🔴 आंदोलन को सफल बनाने में सहयोगियों की भूमिका
इस विशाल प्रदर्शन को सफल बनाने में वरिष्ठ साथी राजीव जैन, बी. के. सूर्यवंशी, रविन्द्र सिंह (इलाहाबाद बैंक), डी. के. बंसल, प्रदीप मलिक, संजय, कपिल, मोनू, राजेश, रजनीश गुप्ता, दीपांकर, अनुज शर्मा और संजीव जैन सहित कई कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा।
उनकी सक्रियता और संगठनात्मक क्षमता ने इस आंदोलन को एक मजबूत और अनुशासित रूप दिया, जिससे यह केवल स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की मांग का हिस्सा बन गया।
🔴 आमजन पर असर और ग्राहकों की प्रतिक्रिया
Muzaffarnagar bank strike के कारण शहर के कई इलाकों में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहीं। ग्राहकों को नकद लेनदेन, चेक क्लियरेंस और अन्य सेवाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा।
हालांकि, कुछ ग्राहकों ने कर्मचारियों की मांगों को जायज बताया और कहा कि बेहतर कार्य-जीवन संतुलन से कर्मचारियों की सेवा गुणवत्ता में सुधार होगा। वहीं, कुछ लोगों ने जल्द समाधान की उम्मीद जताई, ताकि आमजन को असुविधा न हो।
🔴 देशव्यापी आंदोलन का हिस्सा बना मुज़फ्फरनगर
यह प्रदर्शन केवल मुज़फ्फरनगर तक सीमित नहीं रहा। देशभर के कई शहरों में बैंक कर्मचारी इसी मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। यूनियन नेताओं का कहना है कि यह एक राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है, जिस पर केंद्र सरकार को जल्द निर्णय लेना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मांग स्वीकार होती है, तो यह बैंकिंग सेक्टर के कामकाज में एक बड़ा बदलाव ला सकती है।
🔴 भविष्य की रणनीति और अगला कदम
प्रदर्शन के अंत में यूनियन नेताओं ने संकेत दिया कि यदि सरकार ने जल्द कोई निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसमें चरणबद्ध हड़ताल, जन जागरूकता अभियान और अन्य लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी मांगों को आगे बढ़ाने की योजना शामिल है।
Muzaffarnagar bank strike ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बैंक कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह संगठित और दृढ़ हैं।
🔴 बैंकिंग व्यवस्था और समाज की जिम्मेदारी
इस आंदोलन ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि बैंकिंग व्यवस्था को कैसे अधिक संतुलित और मानवीय बनाया जाए। कर्मचारियों और ग्राहकों दोनों की जरूरतों के बीच सामंजस्य बनाना सरकार और बैंक प्रबंधन की बड़ी जिम्मेदारी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि संवाद और पारदर्शिता के माध्यम से ही इस तरह के मुद्दों का स्थायी समाधान संभव है।

