Muzaffarnagar में गैस सिलेंडर पर बवाल: 900 का सिलेंडर 2000 में बेचने का आरोप, एजेंसी के बाहर उपभोक्ताओं का हंगामा
Muzaffarnagar शहर में गैस सिलेंडर ने आम लोगों की परेशानी को गंभीर स्तर तक पहुंचा दिया है। रसोई गैस की कमी और कालाबाजारी के आरोपों ने शुक्रवार को शहर में भारी हंगामा खड़ा कर दिया। कच्ची सड़क स्थित सरवट इंडेन सेवा गैस एजेंसी के कार्यालय के बाहर उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब घंटों लाइन में खड़े रहने के बावजूद कई उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर नहीं मिल पाया। इससे नाराज उपभोक्ताओं ने एजेंसी के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और एजेंसी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए।
गर्मी और रोजे की हालत में लंबी कतारों में खड़ी महिलाओं और रोजेदारों का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। उपभोक्ताओं का कहना है कि शहर में गैस की किल्लत इतनी बढ़ गई है कि लोगों को खाना बनाने के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
900 रुपये का सिलेंडर 1500 से 2000 रुपये में बेचने का आरोप
Muzaffarnagar Gas Cylinder Shortage के बीच उपभोक्ताओं ने गैस एजेंसी और हॉकर्स पर कालाबाजारी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सरकारी दर पर मिलने वाला लगभग 900 रुपये का सिलेंडर चोरी-छिपे 1500 से 2000 रुपये तक में बेचा जा रहा है।
उपभोक्ताओं का आरोप है कि गैस वितरण करने वाले कुछ हॉकर्स और बिचौलिए इस काम में शामिल हैं और उनकी मिलीभगत से कालाबाजारी की जा रही है। जबकि आम उपभोक्ता गैस सिलेंडर के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।
लोगों का कहना है कि जब वे एजेंसी पर सिलेंडर लेने पहुंचते हैं तो उन्हें बताया जाता है कि गैस खत्म हो गई है, लेकिन बाद में वही सिलेंडर अधिक कीमत पर निजी तौर पर बेचे जाते हैं।
घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी नहीं मिला सिलेंडर
शुक्रवार को सरवट इंडेन सेवा एजेंसी के बाहर बड़ी संख्या में उपभोक्ता सुबह से ही गैस सिलेंडर लेने के लिए पहुंच गए थे।
कई लोगों ने बताया कि वे घंटों तक लाइन में खड़े रहे, लेकिन इसके बावजूद उन्हें गैस सिलेंडर नहीं मिला। इससे नाराज लोगों ने एजेंसी के बाहर नारेबाजी शुरू कर दी और एजेंसी प्रबंधन के खिलाफ विरोध जताया।
रोजे की हालत में गर्मी के बीच खड़ी महिलाओं ने कहा कि उन्हें कई दिनों से गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है, जिससे घर में खाना बनाना मुश्किल हो गया है।
बुकिंग सिस्टम पर भी उठे सवाल
Muzaffarnagar Gas Cylinder Shortage के बीच उपभोक्ताओं ने गैस बुकिंग व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं।
लोगों का कहना है कि ऑनलाइन बुकिंग के दौरान अक्सर यह कहा जाता है कि पोर्टल या सर्वर डाउन है, जिसके कारण बुकिंग नहीं हो पा रही है।
जब उपभोक्ता एजेंसी कार्यालय पहुंचते हैं तो उन्हें तकनीकी समस्या का हवाला देकर वापस भेज दिया जाता है। इससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है।
एजेंसी संचालक ने आरोपों से किया इनकार
दूसरी ओर एजेंसी संचालक आलम ने उपभोक्ताओं द्वारा लगाए गए कालाबाजारी के आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
उनका कहना है कि शहर में गैस की किल्लत की आशंका के कारण लोगों में पैनिक बुकिंग बढ़ गई है, जिससे वितरण प्रणाली पर दबाव बढ़ गया है।
उन्होंने कहा कि एजेंसी की ओर से पूरी पारदर्शिता के साथ गैस वितरण किया जा रहा है और कालाबाजारी जैसी कोई बात नहीं है।
जिला पूर्ति विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल
Muzaffarnagar Gas Cylinder Shortage को लेकर जहां शहर में हंगामा मचा हुआ है, वहीं जिला पूर्ति विभाग की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते स्थिति को नियंत्रित नहीं करता तो समस्या और गंभीर हो सकती है।
लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि गैस आपूर्ति जल्द ही सुचारू नहीं हुई और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
गैस संकट से बदली रसोई की आदतें
गैस सिलेंडर की कमी और भविष्य में बढ़ती संभावित समस्याओं को देखते हुए शहर की कई महिलाओं ने अब अपनी रसोई की आदतों में बदलाव करना शुरू कर दिया है।
Muzaffarnagar Gas Cylinder Shortage के कारण अब कई घरों में एलपीजी की खपत कम करने के लिए वैकल्पिक साधनों का उपयोग बढ़ गया है।
महिलाएं अब इलेक्ट्रिक केतली, इंडक्शन चूल्हा और माइक्रोवेव जैसे उपकरणों का अधिक इस्तेमाल करने लगी हैं, ताकि गैस की बचत की जा सके।
छोटे कामों के लिए बढ़ा इलेक्ट्रिक केतली का इस्तेमाल
शहर की निवासी इंदु राठी ने बताया कि चाय-पानी जैसे छोटे कामों के लिए अब वह गैस की जगह इलेक्ट्रिक केतली का उपयोग करने लगी हैं।
उन्होंने कहा कि इससे गैस की खपत कम होती है और रसोई गैस अधिक समय तक चल जाती है।
इसी तरह कई घरों में इंडक्शन चूल्हे का उपयोग भी बढ़ गया है।
गैस बचाने के पारंपरिक तरीके भी अपनाए जा रहे
नीरूपमा गोयल ने बताया कि पहले दूरदर्शन पर गैस बचाने के लिए कई जागरूकता अभियान चलाए जाते थे, जिनमें बताया जाता था कि खाना ढककर पकाएं, धीमी आंच पर पकाएं और प्रेशर कुकर का ज्यादा इस्तेमाल करें।
उनका कहना है कि आज भी इन तरीकों को अपनाकर गैस की खपत को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
खाना बनाने की योजना में भी बदलाव
अभिलाषा कपूर ने बताया कि अब घरों में खाना बनाने की योजना भी बदली जा रही है।
उन्होंने कहा कि कोशिश की जा रही है कि खाना एक बार में ही प्लान करके बनाया जाए, ताकि बार-बार गैस जलाने की जरूरत न पड़े।
इसके अलावा दाल, चावल और अन्य चीजों को पकाने से पहले दो से तीन घंटे तक भिगोकर रखने से भी गैस की खपत कम होती है।

