Muzaffarnagar में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब: कांवड़ यात्रा ने रचा आस्था का महासंगम, शिवचौक बना भक्ति का केंद्र
मुजफ्फरनगर। (Muzaffarnagar)। श्रावण मास का आगमन होते ही उत्तर भारत में सबसे भव्य धार्मिक आयोजन कांवड़ यात्रा 2025 ने रफ्तार पकड़ ली है। हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर पैदल लौटते करोड़ों शिवभक्तों का कारवां अब मुजफ्फरनगर की पवित्र धरती पर पहुंचने लगा है। शहर का प्रमुख स्थल शिवचौक इन दिनों भक्ति और श्रद्धा का केंद्र बन गया है, जहां चारों ओर सिर्फ एक ही गूंज सुनाई दे रही है – “बोल बम! हर हर महादेव!”
हरिद्वार से शुरू होकर मुजफ्फरनगर बना भक्ति का पड़ाव
हरिद्वार से गंगाजल लेकर आने वाले शिवभक्त कांवड़िए जब मुजफ्फरनगर पहुंचते हैं तो उनका पहला पड़ाव होता है शिवचौक स्थित विशाल शिवमूर्ति। परंपरा के अनुसार, यहां कांवड़िए अपनी कांवड़ के साथ परिक्रमा करते हैं और आगे की यात्रा के लिए आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस बार भी कांवड़ियों की भारी भीड़ शिवचौक में उमड़ पड़ी है।
श्रद्धालु भजन-कीर्तन, डीजे और ढोल-नगाड़ों के साथ शिव की भक्ति में लीन होकर आगे बढ़ रहे हैं। पूरा शहर भगवा रंग में रंगा नजर आ रहा है। लोग अपने घरों और दुकानों पर भगवा झंडे, बैनर और लाइटिंग के जरिए कांवड़ियों का स्वागत कर रहे हैं।
कांवड़ियों के स्वागत में प्रशासन और जनता ने दिखाई एकता
Kanwar Yatra 2025 को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। मुजफ्फरनगर पुलिस, नगर पालिका, और जिला पंचायत ने मिलकर यात्रा की तैयारी को अंतिम रूप दिया है। कांवड़ मार्ग पर जगह-जगह विश्राम स्थल, चिकित्सा शिविर, और भंडारे लगाए गए हैं, ताकि किसी भी शिवभक्त को कोई परेशानी न हो।
सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ कॉमर्स, हिंदू युवा वाहिनी, गौ सेवा दल आदि ने जगह-जगह ठंडे पेय, फल वितरण, छाछ, और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।
शिवचौक और रुड़की रोड बना कांवड़ियों का महाकुंभ
इस समय मुजफ्फरनगर का शिवचौक और रुड़की रोड भक्ति की भीड़ से पट चुका है। यहां हर पल कोई न कोई झांकी या भक्ति जत्था गुजरता दिखाई देता है। डीजे की गूंज, ढोल की थाप और जयकारों की गूंज वातावरण को और भी पावन बना रही है।
रुड़की रोड पर सजाए गए विश्राम शिविर अत्याधुनिक सुविधा से लैस हैं, जहां कांवड़ियों को न केवल भोजन और विश्राम मिल रहा है, बल्कि मोबाइल चार्जिंग, वाटर कूलर और पैर दबाने की मशीनें भी उपलब्ध कराई गई हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी युवाओं का जोश देखने लायक है। भगवा टी-शर्ट, गले में रुद्राक्ष की माला और हाथ में कांवड़ – यही है इन श्रद्धालुओं की पहचान।
प्रशासन की विशेष निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था
यात्रा को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए पुलिस विभाग ने चौकसी बढ़ा दी है। CCTV कैमरों से युक्त कंट्रोल रूम, ड्रोन की मदद से निगरानी और हर चौराहे पर पुलिस बल की तैनाती ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न हो। यातायात पुलिस ने कांवड़ मार्गों पर डायवर्जन प्लान लागू किया है, जिससे यात्रियों और आम नागरिकों को परेशानी न हो।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि “हमारी टीम 24×7 सतर्क है। किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्यवाही के लिए विशेष दल तैनात किए गए हैं।”
शिवभक्तों के रंग में रंगा मुजफ्फरनगर
इस बार की कांवड़ यात्रा कई मायनों में खास है। कोरोना के बाद यह दूसरा पूर्ण रूप से खुला आयोजन है, जिसमें लोगों का जोश और उत्साह दुगुना हो गया है। कांवड़ यात्रियों की संख्या इस बार रिकॉर्ड तोड़ सकती है, ऐसा स्थानीय अधिकारियों का कहना है।
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन ने स्थानीय दुकानों, होटलों और ट्रांसपोर्ट के साथ मिलकर बेहतर सुविधा देने की योजना बनाई है। इससे स्थानीय व्यापारियों को भी सीधा लाभ मिल रहा है। कांवड़ मार्ग पर बनी अस्थाई दुकानों पर पूजा सामग्री, रुद्राक्ष, तिलक, जल पात्र और कांवड़ सजाने की वस्तुएं खूब बिक रही हैं।
कांवड़ यात्रा के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम और झांकियां भी आकर्षण का केंद्र
शिवभक्ति की इस अद्भुत यात्रा में सांस्कृतिक आयोजनों की भी झलक मिलती है। जगह-जगह रामलीला, शिव विवाह, भस्मारती और शिव तांडव जैसी झांकियां लगाई जा रही हैं। विशेषकर बच्चों और महिलाओं के लिए यह कार्यक्रम भक्ति और मनोरंजन का सुंदर संगम बन गए हैं।
शहर में “भक्ति रथ यात्रा” का आयोजन भी किया गया है, जिसमें शिव की झांकी को रथ पर सजा कर नगर भ्रमण कराया जा रहा है।
शिवभक्तों की सेवा में लगी युवा टीमों की प्रेरणादायक कहानियां
कई युवा संगठनों ने अपनी टीम बनाकर कांवड़ियों की सेवा को अपना धर्म बना लिया है। युवा भारत सेवा समिति और भगवा युवा शक्ति संगठन जैसे नामी समूह दिन-रात सेवा में लगे हुए हैं। कोई सुबह 4 बजे उठकर पूड़ी-सब्जी बनाता है, तो कोई शाम को थकान मिटाने के लिए मसाज सेवा देता है। यह समर्पण देखकर हर व्यक्ति का सिर श्रद्धा से झुक जाता है।
मुजफ्फरनगर की पहचान बनी कांवड़ यात्रा
हर वर्ष Kanwar Yatra के दौरान मुजफ्फरनगर की एक अलग ही छवि उभरकर सामने आती है। धर्म, सेवा, एकता और सहयोग की मिसाल पेश करता है यह आयोजन। नगरवासियों का सहयोग, प्रशासन की तत्परता और कांवड़ियों की श्रद्धा – सब कुछ मिलकर इस यात्रा को अविस्मरणीय बना देता है।

