NEET Exam में ब्राह्मण छात्र का जनेऊ उतरवाने का आरोप, कर्नाटक में उबाल, विरोध प्रदर्शन तेज
कर्नाटक में NEET Exam 2025 के दौरान एक बार फिर से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली घटना ने तूल पकड़ लिया है। कलबुर्गी के सेंट मैरी स्कूल स्थित परीक्षा केंद्र पर एक ब्राह्मण छात्र श्रीपद पाटिल से जबरन उसका जनेऊ उतरवाए जाने का गंभीर आरोप सामने आया है। यह मामला सामने आते ही ब्राह्मण समाज में आक्रोश फैल गया और सैकड़ों लोग केंद्र के बाहर विरोध में उतर आए।
परिवार और समुदाय ने इस घटना को हिंदू धार्मिक रीति-रिवाजों का अपमान बताया और राज्य सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की। श्रीपद के पिता सुधीर पाटिल ने बताया कि जब उनका बेटा परीक्षा देने केंद्र पहुंचा तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने पहले उससे जनेऊ उतारने को कहा और जब वह मना करने लगा तो उसे परीक्षा से वंचित करने की धमकी दी गई। ऐसे में, मजबूरी में छात्र ने अपने पिता को जनेऊ सौंपा और परीक्षा देने चला गया।
बढ़ता विवाद और राज्यव्यापी विरोध
यह पहली बार नहीं है जब कर्नाटक में NEET exam janeu controversy सामने आई है। कुछ हफ्तों पहले CET परीक्षा के दौरान भी शिवमोगा, बीदर, गडग और धारवाड़ में इसी तरह की घटनाएं दर्ज की गई थीं, जहां ब्राह्मण समुदाय के छात्रों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश से पहले या तो जनेऊ उतारने के लिए मजबूर किया गया या परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया।
इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या परीक्षा केंद्रों में धर्म और परंपरा की स्वतंत्रता सुरक्षित है या नहीं।
बीदर जिले में एक छात्रा को भी इसी प्रकार परीक्षा से वंचित किया गया था। जब छात्रा के परिजनों ने जिला प्रशासन से शिकायत की तो साईं स्पूर्ति पीयू कॉलेज के प्रिंसिपल और एक सहायक कर्मचारी को बर्खास्त कर दिया गया। यह निर्णय जिला उपायुक्त द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण के बाद लिया गया था।
जनेऊ: आस्था और पहचान का प्रतीक
जनेऊ, जिसे यज्ञोपवीत भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में विशेष रूप से ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य जातियों के लिए एक पवित्र धागा माना जाता है। यह न केवल धार्मिक पहचान है, बल्कि इसे पहनने वाला व्यक्ति धार्मिक दायित्वों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध माना जाता है।
NEET exam janeu removal जैसी घटनाएं न केवल आस्था पर हमला मानी जा रही हैं, बल्कि इससे धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
राजनीतिक हलचल और मांगें
घटना के बाद कई राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है। अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा और अन्य संगठनों ने इसे हिंदू धर्म के खिलाफ एक साजिश बताया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं ने घटना की निंदा करते हुए मुख्यमंत्री से मांग की कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए और परीक्षा केंद्रों पर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
परीक्षा प्रणाली पर उठते सवाल
NEET 2025 controversy केवल धार्मिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह परीक्षा प्रणाली की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक सजगता पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। क्या सुरक्षा जांच की प्रक्रिया इतनी कठोर हो चुकी है कि उसमें धार्मिक प्रतीकों को भी संदेह की दृष्टि से देखा जाने लगा है?
छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि मेटल डिटेक्टर और अन्य जांच के बावजूद धार्मिक प्रतीकों को टारगेट करना भेदभावपूर्ण है। ऐसे मामलों में कर्मचारियों को संवेदनशीलता की ट्रेनिंग देने की जरूरत बताई जा रही है।
सोशल मीडिया पर बवाल
घटना के बाद ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर #NEETJaneuRow और #RespectHinduTraditions ट्रेंड करने लगे। लोगों ने तस्वीरें और वीडियो साझा कर प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
कई यूज़र्स ने इसे “ब्राह्मणों के अपमान” की संज्ञा दी और कहा कि धार्मिक पहचान पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
शिक्षा मंत्रालय की प्रतिक्रिया और आगे की राह
घटना के तूल पकड़ने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है। यह भी संकेत दिए जा रहे हैं कि केंद्र जल्द ही NEET Exam Guidelines में धार्मिक प्रतीकों को लेकर एक अलग स्पष्ट प्रावधान जोड़ सकता है ताकि भविष्य में किसी छात्र को अपनी आस्था छोड़ने की मजबूरी ना झेलनी पड़े।
राज्य शिक्षा विभाग ने भी संकेत दिए हैं कि वह सभी परीक्षा केंद्रों के लिए एक कोड ऑफ कंडक्ट जारी करेगा, जिसमें छात्रों के धार्मिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
निष्पक्षता बनाम धार्मिक स्वतंत्रता: एक बहस
परीक्षा की निष्पक्षता और निष्कलंकता बनाए रखना एक प्राथमिकता है, पर क्या इसके नाम पर धार्मिक स्वतंत्रता कुचल दी जाए? यह सवाल अब खुलकर पूछा जा रहा है।
क्या केवल ब्राह्मण समुदाय के प्रतीकों को ही लक्षित किया जा रहा है या यह एक व्यापक प्रशासनिक असंवेदनशीलता का हिस्सा है? यह जांच का विषय है और इसके जवाबों की मांग अब पूरे देश में गूंज रही है।
निष्कर्ष के बिना एक सीधा सवाल
NEET exam janeu controversy अब केवल एक छात्र की व्यक्तिगत पीड़ा नहीं रही, यह एक समुदाय, एक संस्कृति, और धार्मिक स्वतंत्रता की लड़ाई बन चुकी है। क्या हमारी परीक्षा प्रणाली इतने कठोर नियमों की आड़ में धार्मिक भावनाओं का अपमान करती रहेगी? यह मुद्दा अब कानूनी, सामाजिक और नैतिक बहस का केंद्र बन चुका है, जिसका जवाब आने वाले दिनों में देश को देना होगा।

