Pakistani महिला टीचर फर्जीवाड़ा बेनकाब: मां-बेटी बनकर सालों तक सरकारी नौकरी, रामपुर में केस दर्ज, जांच में खुलेंगी कई परतें
News-Desk
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Fake Teacher Scam, Government Job Fraud, national security, Pakistani, Pakistani Woman Case, Police Investigation, Rampur news, UP education departmentPakistani woman fake teacher case ने उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक निगरानी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रामपुर और बरेली से शुरू हुआ यह मामला ऐसा है, जिसने हर किसी को चौंका दिया है। जहां लाखों युवा सरकारी नौकरी पाने के लिए सालों मेहनत करते हैं, वहीं पाकिस्तान से आई एक मां-बेटी की जोड़ी कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के सहारे वर्षों तक सरकारी अध्यापक बनकर न केवल नौकरी करती रही, बल्कि सुविधाजनक जीवन भी जीती रही।
अब जब यह मामला सामने आया है, तो अजीमनगर थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच आगे बढ़ते ही कई अधिकारियों और विभागीय कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ रही है।
🔴 बरेली से शुरू हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
इस पूरे प्रकरण की जड़ें बरेली से जुड़ी हैं। यहां एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय माधौपुर में वर्ष 2015 से सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत महिला शुमायला खान की नागरिकता और दस्तावेजों को लेकर सवाल उठे। जांच में सामने आया कि शुमायला खान पाकिस्तान की नागरिक है और उसने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की थी।
जैसे ही मामला उजागर हुआ, पुलिस ने उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर तलाश शुरू कर दी। बाद में अक्टूबर 2024 में उसे सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
🔴 बेटी के बाद मां पर भी गिरी गाज
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे यह मामला केवल बेटी तक सीमित नहीं रहा। पुलिस और शिक्षा विभाग की पड़ताल में सामने आया कि शुमायला की मां माहिरा उर्फ फरजाना भी पहले से ही संदेह के घेरे में रही हैं।
यह खुलासा हुआ कि माहिरा उर्फ फरजाना को बेसिक शिक्षा विभाग वर्ष 2022 में ही अध्यापक पद से बर्खास्त कर चुका है। अब इसी सिलसिले में रामपुर के अजीमनगर थाने में माहिरा उर्फ फरजाना के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
🔴 रामपुर से पाकिस्तान तक फैली कहानी
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार माहिरा उर्फ फरजाना का मायका रामपुर के मोहल्ला आतिशबाजान में है। 17 जून 1979 को उनका निकाह पाकिस्तान के सिबगत अली से हुआ था। शादी के बाद फरजाना पाकिस्तान चली गईं और वहां की नागरिकता प्राप्त कर ली।
पाकिस्तान में रहते हुए फरजाना ने दो बेटियों—शुमायला और आलिमा—को जन्म दिया। कुछ वर्ष बाद उन्हें तीन तलाक दे दिया गया, जिसके बाद वह अपनी दोनों बेटियों को लेकर भारत लौट आईं।
🔴 वीजा खत्म, फिर भी भारत में ठहराव
भारत लौटते समय फरजाना पाकिस्तानी पासपोर्ट पर वीजा लेकर आई थीं। लेकिन वीजा अवधि समाप्त होने के बावजूद वह वापस पाकिस्तान नहीं लौटीं। इसी दौरान 22 जनवरी 1992 को फरजाना बेसिक शिक्षा विभाग में अध्यापक बन गईं।
मामला उस समय भी शासन स्तर तक पहुंचा था, लेकिन जांच कथित तौर पर दबा दी गई। वर्षों बाद 2022 में जब नए सिरे से जांच हुई, तो तथ्य छिपाकर नौकरी करने के आरोप में फरजाना को बर्खास्त कर दिया गया।
🔴 बेटी शुमायला का जन्म पाकिस्तान में
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि शुमायला खान का जन्म पाकिस्तान में हुआ था। जन्म के लगभग दो वर्ष बाद वह भारत आई थी। मां को दोबारा भारतीय नागरिकता न मिलने के कारण शुमायला को भी वैध भारतीय नागरिकता नहीं मिल सकी थी। इसके बावजूद वह सरकारी सेवा में चयनित हो गई, जो पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
🔴 एलआईयू और कोर्ट से जुड़ा पुराना मामला
रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 1983 में एलआईयू ने फरजाना और उसकी बेटियों के खिलाफ बिना वैध अनुमति भारत में रहने को लेकर मामला दर्ज कराया था। एलआईयू की रिपोर्ट पर सीजेएम कोर्ट ने 25 जून 1985 को आदेश दिया था कि कोर्ट की कार्यवाही पूरी होने तक वे अदालत में उपस्थित रहें।
इसके बाद मामला वर्षों तक ठंडे बस्ते में चला गया, लेकिन अब जब जांच दोबारा तेज हुई है, तो पुरानी फाइलें भी खोली जा रही हैं।
🔴 अजीमनगर थाने में दर्ज हुआ मुकदमा
ताजा कार्रवाई में खंड शिक्षा अधिकारी और सहायक कनिष्ठ की तहरीर पर अजीमनगर थाना क्षेत्र में माहिरा उर्फ फरजाना के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच व्यापक स्तर पर की जा रही है और यह भी देखा जा रहा है कि इसमें किन-किन लोगों ने मदद की।
🔴 कई लोगों की भूमिका संदेह के घेरे में
Pakistani woman fake teacher case अब केवल दो महिलाओं तक सीमित नहीं रह गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतने वर्षों तक फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी कैसे चलती रही, सत्यापन किस स्तर पर विफल हुआ और किन अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत इसमें शामिल रही।
🔴 राष्ट्रीय सुरक्षा और सिस्टम पर बड़ा सवाल
यह मामला केवल शिक्षा विभाग की चूक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा गंभीर विषय बन गया है। विदेशी नागरिक का वर्षों तक संवेदनशील सरकारी पद पर रहना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

