पाकिस्तान: भारत के लिए बंद की सभी डाक सेवाएं
भारतीय डाक अधिकारियों ने पाकिस्तान जाने वाले पत्रों को ‘ऑन होल्ड’ मार्क कर दिया है। दिल्ली के डाक सेवाओं के निदेशक (मेल और बिजनेस डेवलपमेंट) आरवी चौधरी ने कहा, ‘यह उनकी तरफ से लिया गया एकतरफा फैसला है। यह पहली बार है जब उन्होंने इस तरह का कदम उठाया है। हमें नहीं पता कि वह कब हमारे पत्रों के कंसाइनमेंट को स्वीकार करेंगे।’ देश में 28 फॉरेन पोस्ट ऑफिस (एफपीओ) हैं जहां विदेशी कंसाइनमेंट आते हैं। जिसमें से केवल दिल्ली और मुंबई के एफपीओ को पाकिस्तान पत्र भेजने और पत्र स्वीकार करने के लिए अधिकृत किया गया है।
#WATCH "For the last two months, Pakistan has stopped postal service from India. It's directly in contravention of the World Postal Union's norms," says, Union Minister Ravi Shankar Prasad pic.twitter.com/gm04ITuq3z
— ANI (@ANI) October 21, 2019
पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच होने वाले पत्र व्यवहार को रोक दिया है। डेढ़ महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है लेकिन पाकिस्तान ने भारत से जाने वाले किसी भी पत्र को स्वीकार नहीं किया है। 27 अगस्त को उसने आखिरी बार भारत के पत्रों के कंसाइनमेंट (ढेर सारे पत्रों का अंबार) को लिया था। यह पहली बार है जब दोनों देशों के बीच पत्र व्यवहार को रोका गया है। यह विभाजन, तीन युद्ध, तनाव, यातायात सेवा बंद होने के दौरान भी कभी नहीं रुका था। हालांकि जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लिए जाने के बाद पाकिस्तान ने यह कदम उठाया है।

केंद्रीय दिल्ली के कोटला मार्ग पर बना एफपीओ छह राज्यों के कंसाइनमेंट के लिए नोडल एजेंसी के तौर पर कार्य करता है। वह जम्मू-कश्मीर के अलावा राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश से पत्रों को स्वीकार करता है। वहीं मुंबई का एफपीओ बाकी देश के लिए एक्सचेंज ऑफिस के तौर पर कार्य करता है। दिल्ली एफपीओ के अधीक्षक सतीश कुमार ने कहा, ‘पाकिस्तान के अधिकांश डाक इस कार्यालय द्वारा भेजे जाते हैं और उनमें से अधिकांश पंजाब और जम्मू और कश्मीर से होते हैं। यह ज्यादातर अकादमिक और साहित्यिक सामग्री वाले होते हैं।’
Union Minister Ravi Shankar Prasad: For the last two months, Pakistan has stopped postal service from India. It's directly in contravention of the World Postal Union's norms. pic.twitter.com/uRrQ0nrwwX
— ANI (@ANI) October 21, 2019
पाकिस्तान के भारत में मौजूद प्रेस अटैच ख्वाजा मार तारीक का कहना है कि उन्हें इस मामले के बारे में कुछ भी मालूम नहीं है। भारत और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में मौजूद साहित्यिक संघों और प्रकाशन घरों को समस्या के शीघ्र समाधान की उम्मीद है। खासतौर से गुरू नानक देव के 550वें प्रकाशोत्सव के लिए। पाकिस्तान इंडिया पीपुल्स फोरम फॉर पीस एंड डेमोक्रेसी के सदस्य जतिन देसाई ने कहा कि ऐसे समय पर इस तरह के प्रथिबंध लगाना बेमानी है जब संचार इंटरनेट से होने लगा है। पत्र अभिव्यक्ति का एक माध्यम हैं।
उन्होंने कहा, ‘कोई भी देश इस तरह का अधिकार वापस नहीं ले सकता। मुझे अतीत में इस तरह की कोई घटना याद नहीं आती है। यहां तक की 1965 और कारगिल युद्ध के दौरान भी डाक सेवाओं पर प्रतिबंध नहीं लगा था।’ देसाई ने कहा कि कुछ आधिकारिक संचार डाक सेवाओं के जरिए होता है। जैसे यदि कोई भारतीय मछुआरा गिरफ्तार होता है तो उसका वकील पावर ऑफ एटॉर्नी को कुरियर के जरिए भेजता है क्योंकि अदालतें ईमेल्स को स्वीकार नहीं करती हैं।
