स्वास्थ्य

Pregnancy (गर्भावस्था) में Health care: डर और चिंता नहीं- Homeopathy में है इसका सटीक No. 1 इलाज

Pregnancy (गर्भावस्था) में Health care:  डिलीवरी Pregnancy (गर्भावस्था)  के दौरान किन बातों का रहता है डर (fears and anxiety)- अधिकतर महिलाएं इस बात को लेकर चिंतित रहती हैं कि वो डिलीवरी के दौरान होने वाली दर्द को सहन कर पाएंगी या नहीं? अगर प्रसव सामान्य है तो डिलीवरी के समय दर्द होना स्वभाविक है।

#1. दर्द (Pain)

डिलीवरी Pregnancy (गर्भावस्था) के समय होने वाला दर्द सबसे अधिक चिंता या डर (Delivery ka Dar) का विषय होता है। अधिकतर महिलाएं इस बात को लेकर चिंतित रहती हैं कि वो डिलीवरी के दौरान होने वाली दर्द को सहन कर पाएंगी या नहीं? अगर प्रसव सामान्य है तो डिलीवरी के समय दर्द होना स्वभाविक है।

लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है कि हर गर्भवती महिला को प्रसव Pregnancy (गर्भावस्था) के समय समान पीड़ा हो। यह पीड़ा किसी को अधिक होती है तो किसी को कम। लेकिन चिंता न करें, महिला के शरीर को इसके लिए बनाया गया है यानी आप इस दर्द को पूरी तरह से सहन करने में सक्षम हैं। सबसे पहले खुद को मानसिक रूप से तैयार करें।

सकारात्मक रहें, गर्भावस्था के समय से ही शारीरिक रूप से एक्टिव रहें, पौष्टिक आहार लें और योग करें। इससे जीवन के इस चरण को आप आराम से पार कर लेंगी।साथ ही साथ दिए गए लक्षणानुसार दवाई का प्रयोग करें।

#2. सामान्य या सी-सेक्शन प्रसव Pregnancy (गर्भावस्था)

क्या मेरा सामान्य प्रसव होगा या सी-सेक्शन, गर्भवती महिला के लिए डिलीवरी के समय यह भी एक बहुत बड़ा भय होता है। आजकल के आधुनिक युग में सी-सेक्शन की संभावना बहुत अधिक बढ़ गयी हैं। ऐसे में ऐसा भय कोई असामान्य नहीं है। एक बात जान लें कि अस्सी प्रतिशत मामलों में सामान्य प्रसव की ही संभावना होती है। बहुत कम मामलों में या विषम परिस्थितियों में ही सी-सेक्शन का सहारा लिया जाता है जिनमें से कई बार डॉक्टर प्रसव से ही पहले बता देते हैं कि आपकी डिलीवरी सामान्य होगी या सी-सेक्शन। इसलिए फिक्र न करें और अपने डॉक्टर से पहले ही इस बारे में बात कर लें। इस आर्टिकल्स के लेखक (डॉ वेद प्रकाश) सैकड़ो रोगियों को नार्मल डिलीवरी करवाए हैं उनके बताए गए नुस्खे बिल्कुल सफल हैं।

#3. समय (Time)

होने वाली माताएं खासकर जो पहली बार माँ बन रही होती हैं, उनके मन में एक डर यह भी रहता है कि जब मुझे प्रसव पीड़ा शुरू होगी, तब क्या मैं सही समय पर अस्पताल पहुंच पाऊँगी? दरअसल ऐसे कई किस्से सुनने को मिलते हैं जिसमें कई माताएं अपने बच्चे को अस्पताल पहुंचने से पहले, गाड़ी या घर में ही जन्म दे देती हैं।

ऐसे में इस बात का भय भी हर स्त्री को रहता है। इस बात को लेकर भी आपको परेशान होने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि Pregnancy (गर्भावस्था) प्रसव से पहले महिला को बहुत सी चेतावनियां मिलती हैं। जैसे पीठ में बहुत अधिक दर्द, तीव्र ऐंठन, संकुचन या पानी की थैली का फटना आदि। इन चेतावनियों पर ध्यान दें और अगर कोई समस्या हो तो शीघ्र डॉक्टर से सम्पर्क करें।

जब पति पत्नी का स्नेह व प्रेम से शारीरिक संबंध होता है तब उत्तम आत्मा उस घर में आती हैं | जब वे आपस में प्रेम से संबंधों में बनते हैं | तो उनका आपस में शरीर के साथ मानसिक और आध्यात्मिक संबंध भी होता है | उस समय सृष्टि में ब्रह्मांड में शुभ लक्षण होते हैं |

यह नौ महीने स्त्री के लिए तपस्या के दिन होते हैं | अतः सदेव प्रसन्न रहें ज्यादा इच्छा, वासना ना रखें संतो के दर्शन करें अच्छा प्रेरणादायक साहित्य पढ़े |

 Pregnancyसाथ ही साथ Pregnancy (गर्भावस्था) में स्वस्थ रहने के नियम जो मैं यहां लिख रहा हूं उसे आजमायें।

1. प्रतिदिन सुबह 30 मिनट तक धूप में घूमना चाहिए यह विटामिन डी की कमी को पूरा कर देगा और बच्चे को जन्म के बाद पीलिया की बीमारी से बचायेगा |

2. घूमने के बाद स्नान वगैरा करके 15 मिनट अपने इष्ट देव का ध्यान करें, 5 से 7 मिनट अनुलोम-विलोम प्राणायाम और प्रार्थना करके पांच तुलसी के पत्ते रविवार को छोड़कर रोज खाने चाहिए, प्रतिदिन 5 से 10 नीम के पत्ते खाएं |

3. भोजन दिनचर्या के अनुसार होना चाहिए , भोजन के बाद थोड़ी सी सौंफ जरूर खानी चाहिए जिससे कि भोजन पच सके, भोजन करने के बाद सोना नहीं चाहिए थोड़ा सा टहल लेना चाहिए ताकि भोजन हजम हो सके और बच्चा स्वस्थ रहें |

4. गर्भावस्था के दिनों में नींद की गोली (sleeping pill) का उपयोग बिल्कुल ना करें अगर आप नींद की गोली (sleeping pill) का प्रयोग करते हैं तो बच्चा मंदबुद्धि होगा |

5. प्रतिदिन 2 से 3 मिनट शशांक आसन में मत्था टेककर मूल बंद करने से डिलीवरी के बाद समस्याएं नहीं होती और शरीर जल्दी मजबूत बन जाता है |

6. प्रतिदिन दिन में दो बार दूध अवश्य पियेंं दूध के साथ चवनप्राश का सेवन शारीरिक विकास के लिए हितकर है, इससे बच्चा हष्ट पुष्ट होता है और उसका पेट साफ रहता है |

7. अगर हो सके तो प्रतिदिन एक नारियल पानी अवश्य पीना चाहिए इससे बच्चे का पोषण ठीक से होता है |

8. गर्भवती स्त्री को हमेशा प्रसन्न रहना चाहिए कभी लड़ाई झगड़ा नहीं करना चाहिए | गर्भवती महिला को हमेशा सकारात्मक विचार में चाहिए तर्क कुतर्क से बचे निष्काम भाव से सेवा करें और हिम्मत रखें |

9 . डिलीवरी के बाद नाभि छेदन 2 से 3 मिनट के बाद करना चाहिए क्योंकि इस समय तक प्राण नाभि में होते हैं 2-3 मिनट में यह निष्क्रिय हो जाता है तब काटने से बच्चे को पीड़ा नहीं होती | और वह बच्चा पीड़ा से जन्म नहीं लेता और वह निडर होता है | जिन बच्चों का नाभि छेदन जल्दी होता है उनको पीड़ा होती है और उनमें जन्म से भय के संस्कार पड़ जाते हैं | ऐसे बच्चे हमेशा भयभीत रहता है |

10 . बच्चे के जन्म के बाद जन्म देने वाली मां को 40 दिन तक सादा पानी नहीं पीना चाहिए | अजवायन ,सौंफ़ ,सौंठ ,गर्मी में बड़ी इलायची ,सर्दी में छोटी इलायची , इन वस्तुओं को पानी में उबाल ले और इस मिश्रित जल को छानकर रख ले | इस जल को प्रतिदिन ताज़ा बनाकर 40 दिन तक जन्म देने वाली माँ को पिलाना चाहिए |

इस जल के पिने से गर्भाशय में से सारे जहरीले ,विजातीय द्रव एवं कण निकल जाते है और महिलाओंं को लम्बी आयु तक रोग नहीं होते है |
हल्की घबराहट विशेषतः प्रथम गर्भावस्था में एक सामान्य भावुक प्रतिक्रिया है परंतु बहुत ज्यादा चिंता और भय के कारण निम्न स्थितियां हो सकती है ।

■ गर्भवती मां की सामान्य दिनचर्या में बाधा पड़ सकती है .
■ गर्भवती मां को अनिंद्रा एवं भूख में कमी हो सकती है .
👉🏼 गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है .
👉🏼गर्भवती महिला को गर्भावस्था से संबंधित निम्नलिखित चिंताएं एवं शंकाएं हो सकती है •
👉🏼गर्भापात का डर .
👉🏼अत्यधिक मितली एवं वमन होने के कारण .
👉🏼 स्त्री के शरीर में गर्भावस्था एवं प्रसव उपरांत होने वाले शारीरिक परिवर्तनों के बारे में .
👉🏼प्रसव पीड़ा को सहन करने के संबंध में .
👉🏼 शिशु के स्वास्थ्य एवं कुशलता से संबंधित . ” विशेषकर पहली गर्भधारण करने वाली व कामकाजी माताओं में शिशु के पालन – पोषण से संबंधित चिंताएं . एक चिंतित महिला ।
👉🏼 अपने सामान्य स्वभाव से विपरीत भिन्न हो सकती है . ” बिना किसी कारण के हसना और रोना आता
👉🏼 विस्मरणीय ( भूलने की प्रवृति ) हो सकती है . ■ किसी भी कार्य में लंबे समय तक एकाग्रचित नहीं हो सकती .
👉🏼 अवसाद एवं अत्यधिक चिंता एवं उदासी का शिकार हो सकती है .

इन चिंताओं एवं शंकाओं का सामना करने के लिये कुछ व्यावहारिक सलाह के साथ-साथ होम्योपैथिक उपचार भी आज बताया जाएगा। Pregnancy (गर्भावस्था) में Health care:

🔜स्त्री का शरीर गर्भावस्था एवं प्रसव के योग्य ही बना है , इसलिए इसमें डरने की कोई बात नहीं है .
🔜 अपनी शंकाओं एवं चिंताओं के बारे में अपने पति , मित्रों , रिश्तेदारों तथा परिवारों की प्रौढ़ महिलाओं से चर्चा करें .
🔜 गर्भावस्था एवं प्रसव से संबंधित मिथ्याओं तथा शंकाओं को दूर करने के लिये प्रसवपूर्ण कक्षाओं व सामूहिक चर्चायों में सम्मिलित हों .अब सवाल उठता है कि आखिर चिकित्सक की सलाह कब लें ?
🔜 यदि घबराहट बहुत ज्यादा हो तथा लंबे समय तक रहे .

🔜 यदि घबराहट से गर्भवती महिला की सामान्य दिनचर्या बाधित हो .
होमियोपैथिक उपचार निम्नलिखित औषधियां गर्भावस्था में भय एवं चिंताओं के लिये प्रायः उपयोग में लाई जाती है परंतु किसी भी औषधि के प्रयोग से पहले किसी योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक की सलाह अवश्य लें

  •  छोटी – छोटी तकलीफों पर असामान्य चिंता , भय एवं आकुलता , मौत का एवं भविष्य का भय , बेचैनी , प्रत्येक कार्य जल्दी – जल्दी करना , संगीत के प्रति अनिच्छा , इससे उदासी उत्पन्न होना आदि लक्षण हों तो एकोनाइट नेपेल्स 30 का प्रयोग करें .
  • अवसाद के साथ भारी संकट के स्वप्न होने के लक्षण हों तो सिमिसिफ्यूगा- 30 का प्रयोग कर सकते हैं .
  • बहुत अधिक भावुक होना , सहज ही रो पड़ना , सहज ही निरुत्साहित हो जाना , सहानुभूति अच्छी लगना , सांयकाल में , अकेले रहने से रोग वृद्धि के लक्षण हों तो पल्साटिला – 30 प्रयोग करें .

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Dr. Ved Prakash

डा0 वेद प्रकाश विश्वप्रसिद्ध इलेक्ट्रो होमियोपैथी (MD), के साथ साथ प्राकृतिक एवं घरेलू चिकित्सक के रूप में जाने जाते हैं। जन सामान्य की भाषा में स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी को घर घर पहुँचा रही "समस्या आपकी- समाधान मेरा" , "रसोई चिकित्सा वर्कशाप" , "बिना दवाई के इलाज संभव है" जैसे दर्जनों व्हाट्सएप ग्रुप Dr. Ved Prakash की एक अनूठी पहल हैं। इन्होंने रात्रि 9:00 से 10:00 के बीच का जो समय रखा है वह बाहरी रोगियों की नि:शुल्क चिकित्सा परामर्श के लिए रखा है । इनका मोबाइल नंबर है- 8709871868/8051556455

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