Putin पुतिन का बड़ा बयान: “भारत ग्रेट पावर है, मोदी किसी दबाव में नहीं आते”—रूस ने दुनिया को दिखाया भारत का असली कद
News-Desk
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India economic growth 7.7, India global power, India Russia future deals, india russia relations, Modi leadership praise, Putin, Putin India praise, Putin India visit plans, Putin Modi interview, Putin on US policy, SCO summit Modi Putinरूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin (व्लादिमीर पुतिन) ने भारत को “ग्रेट पावर” बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं आते। उन्होंने यह बयान मॉस्को में इंडिया टुडे को दिए एक विस्तृत इंटरव्यू में दिया, जिसमें उन्होंने भारत-रूस संबंधों, वैश्विक शक्ति संतुलन, अमेरिकी नीतियों और आने वाले वर्षों में भारत की भूमिका पर खुलकर राय रखी।
पुतिन ने कहा—“भारत 77 सालों में जिस तेजी से विकसित हुआ है, वह पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा है। यह भारत की क्षमता, उसकी लोकतांत्रिक शक्ति और पीएम मोदी की लीडरशिप का परिणाम है।”
“मोदी दबाव में नहीं आते”—पुतिन ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का किया सम्मान
इंटरव्यू में जब पुतिन से पूछा गया कि क्या अमेरिका भारत पर नया दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, खासकर टैरिफ और रणनीतिक मुद्दों के जरिए, तो रूसी राष्ट्रपति ने साफ कहा—
“भारत अपनी इंडिपेंडेंट पॉलिसी पर चलता है। वहां के नेता दबाव में आने वाले नहीं हैं।”
पुतिन ने माना कि आज के दौर में दुनिया के कुछ देश अपने प्रभाव से दूसरों पर फैसला थोपना चाहते हैं, लेकिन भारत उन कुछ देशों में से है जो अपनी रणनीति, अपने हित और अपने निर्णयों पर खुद चलते हैं।
अमेरिका पर पुतिन का निशाना—‘रेडिएशन हमसे खरीदते हैं और ज्ञान देने की कोशिश करते हैं’
इंटरव्यू के दौरान पुतिन ने अमेरिका की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा—
“वॉशिंगटन हमसे न्यूक्लियर एनर्जी खरीदता है और फिर दुनिया को ज्ञान देने लगता है। भारत पर रूस से तेल खरीदने को लेकर आरोप लगाना दोहरे रवैये का उदाहरण है।”
उन्होंने आगे कहा कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अब इस ‘दोहरे व्यवहार’ को पहचान रही हैं।
यह पुतिन का स्पष्ट संदेश था कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नैतिकता का दावा करने वाले देश खुद कई मामलों में विरोधाभासी कदम उठाते हैं।
SCO समिट में 45 मिनट की कार बातचीत—दो नेताओं की दोस्ती का नया अध्याय
पुतिन ने इंटरव्यू में यह भी बताया कि सितंबर में चीन यात्रा के दौरान उनकी और पीएम मोदी की कार में 45 मिनट की बातचीत हुई थी।
यह बातचीत बिल्कुल अनौपचारिक रही—
“हम बाहर निकले, कार वहीं थी, और मैंने कहा कि हम साथ चलें। हम ड्राइव के दौरान लगातार बात करते रहे, बाद में भी कार के भीतर बैठे और बातें जारी रहीं।”
पुतिन ने कहा कि यह किसी औपचारिक बैठक का हिस्सा नहीं था, बल्कि दो मित्र देशों के नेताओं के बीच का सहज संवाद था।
भारत यात्रा को लेकर उत्साहित—”मोदी से मिलने का इंतजार है”
रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि वे भारत आने को लेकर बेहद “एक्साइटेड” हैं।
दोनों देशों के बीच—
रक्षा
स्पेस
उपग्रह तकनीक
न्यूक्लियर सबमरीन
AI तकनीक
एविएशन
जैसे क्षेत्रों में बड़े समझौते लगभग तैयार हैं।
यह आगामी दशक में भारत-रूस संबंधों के सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकते हैं।
भारत की 7.7% ग्रोथ रेट—पुतिन बोले, “नतीजे खुद बोलते हैं”
भारत की आर्थिक स्थापना पर बात करते हुए पुतिन ने कहा—
“भारत को अपनी प्रगति पर गर्व होना चाहिए। 7.7% की ग्रोथ किसी भी तरह से साधारण नहीं है। यह राष्ट्र की मजबूती और कुशल नेतृत्व का परिणाम है।”
उन्होंने कहा कि हमेशा कुछ लोग आलोचना करते रहेंगे, लेकिन वास्तविकता यह है कि भारत ने सिर्फ 77 सालों में वह छलांग लगाई है, जिसे कई देश शताब्दियों में भी हासिल नहीं कर पाए।
भारत-रूस व्यापार—90% से अधिक लेनदेन सफल
पुतिन ने बताया कि दोनों देशों के बीच होने वाला लगभग 90% व्यापार सफलतापूर्वक पूरा हुआ है।
इससे संकेत मिलता है कि भारत और रूस के आर्थिक संबंध न सिर्फ स्थिर हैं, बल्कि निरंतर मजबूत हो रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया अब मल्टी-पोलर ऑर्डर की ओर बढ़ रही है, और भारत इस नई व्यवस्था का एक अहम स्तंभ होगा।
ग्लोबल पॉलिटिक्स में भारत की भूमिका—पुतिन का स्पष्ट संदेश
पुतिन ने माना कि आने वाले वर्षों में—
ऊर्जा सहयोग
डिफेंस
तकनीकी साझेदारी
सामरिक संतुलन
जैसे क्षेत्रों में भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।
उन्होंने कहा कि भारत का बढ़ता प्रभाव उन देशों के लिए असुविधाजनक हो सकता है जो अभी भी एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था के आदी हैं।
25 साल के शासन पर सवाल—“मैं पीछे मुड़कर नहीं देखता”
इंटरव्यू के अंत में पुतिन से पूछा गया कि क्या उन्हें अपने लंबे शासनकाल में किसी बात का पछतावा है। उन्होंने शांत स्वर में कहा—“मैं कभी पीछे मुड़कर नहीं देखता। मेरा विश्वास हमेशा आगे बढ़ने में है।”
यह बयान पुतिन की नेतृत्व शैली को दर्शाता है—आत्मविश्वास, दृढ़ता और विवादों को नजरअंदाज करते हुए आगे बढ़ने का संकल्प।

