Muzaffarnagar रोहाना खुर्द मार्ग की बदहाली बनी दुर्घटनाओं की वजह: दो वर्षों से टूटी पड़ी सड़क, विभाग बना मूकदर्शक
Muzaffarnagar-सहारनपुर स्टेट हाईवे से जुड़ने वाला रोहाना खुर्द मार्ग पिछले दो वर्षों से पूरी तरह टूटा पड़ा है। इस 2 किलोमीटर लंबे संपर्क मार्ग की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि अब यह एक गड्ढों से भरी हुई पटरी जैसा नजर आता है।
स्थानीय लोग आए दिन यहां दुर्घटनाओं के शिकार हो रहे हैं, विशेषकर बाइक सवार इस खस्ताहाल सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। इसके बावजूद लोक निर्माण विभाग (PWD) की ओर से कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है।
एक बार फिर उजागर हुई लोक निर्माण विभाग की लापरवाही
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने अवर अभियंता (JE) कृष्ण कुमार को कई बार इस टूटी सड़क की जानकारी दी, लेकिन आज तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है।
ग्रामीण पंकज भगत, अनुज त्यागी, कुक्कू और राजबीर सैनी ने बताया कि “सड़क की मरम्मत लगभग दो वर्ष पूर्व करवाई गई थी, लेकिन पिछले एक वर्ष से यह मार्ग पूरी तरह टूट चुका है। अब हालात ऐसे हो चुके हैं कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।”
गांवों को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग, लेकिन हालत दयनीय
यह मार्ग न केवल रोहाना खुर्द को जोड़ता है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण जंक्शन की भूमिका निभाता है। यहां से सड़कें चरथावल, थानाभवन, शामली और पानीपत की ओर जाती हैं।
साथ ही, यह मार्ग देवबंद, बरला और प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटक स्थल शुक्रताल से भी जुड़ता है। इसके अलावा, रोहाना से होकर आधा दर्जन गांवों के किसान गन्ना मिलों तक आपूर्ति के लिए इसी मार्ग का प्रयोग करते हैं।
लेकिन सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि भारी वाहनों के साथ-साथ निजी वाहन भी अब इस पर से गुजरने में डरते हैं। लोग टोल बचाने के लिए इस रास्ते का प्रयोग करते हैं, लेकिन अब यह मार्ग भी विकल्प नहीं रहा।
अनेक दुर्घटनाओं के बाद भी प्रशासन नहीं जागा
ग्रामीणों ने बताया कि हर सप्ताह कोई न कोई दोपहिया वाहन चालक इस मार्ग पर गिरकर घायल हो जाता है। तेज़ रफ्तार में चलने वाले वाहन अक्सर इन गड्ढों में फंसकर या असंतुलित होकर पलट जाते हैं।
“बड़ी दुर्घटना हो जाए, तब शायद प्रशासन की नींद टूटे”, ऐसा कहना है स्थानीय निवासी अनुज त्यागी का। उन्होंने बताया कि बारिश के मौसम में यह मार्ग कीचड़ और जलभराव से और भी खतरनाक हो जाता है।
विकास की बातें, लेकिन ज़मीनी सच्चाई बेहाल सड़कें
सरकार की ओर से सड़क, संपर्क और ग्रामीण विकास की योजनाएं तो अखबारों और विज्ञापनों में दिखाई देती हैं, लेकिन रोहाना खुर्द जैसे ग्रामीण इलाकों की सच्चाई बिलकुल उलट है।
बड़े-बड़े दावे करने वाला लोक निर्माण विभाग इस सड़क की दुर्दशा को देखकर भी खामोश बैठा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे प्रदर्शन और चक्का जाम करने पर विवश होंगे।
स्थानीय जनप्रतिनिधि भी नहीं ले रहे जिम्मेदारी
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इस मुद्दे पर मौन हैं। ना तो किसी विधायक ने दौरा किया और ना ही किसी अधिकारी ने मौके का निरीक्षण किया।
ऐसे में लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। क्षेत्र की उपेक्षा से लोगों का सिस्टम से विश्वास उठता जा रहा है।
क्या बोले जेई कृष्ण कुमार?
जब इस मामले पर अवर अभियंता कृष्ण कुमार से जानकारी ली गई, तो उन्होंने कहा कि “सड़क के मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, जल्द ही काम शुरू होगा।”
हालांकि, ग्रामीणों का मानना है कि ऐसे वादे वे पहले भी कई बार सुन चुके हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है।

