सोनीपत के बेटे की Netherlands में दर्दनाक मौत, 25 लाख का कर्ज लेकर गया था विदेश, अब शव भी वतन लौटाने को तरस रहा परिवार
हरियाणा के Sonipat जिले के मोई माजरी गांव के 23 वर्षीय युवक सागर राणा की Netherlands में हुई दर्दनाक मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। Sagar Rana Netherlands death का मामला केवल एक हादसा नहीं, बल्कि उन हजारों भारतीय युवाओं की हकीकत को सामने लाता है, जो बेहतर भविष्य की तलाश में कर्ज लेकर विदेश जाते हैं और कई बार अपनों तक लौट भी नहीं पाते।
सागर राणा चार दिन तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करता रहा, लेकिन आखिरकार 25 मार्च को उसने दम तोड़ दिया। हादसे के बाद अब सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि आर्थिक तंगी से जूझ रहा परिवार अपने बेटे का पार्थिव शरीर भी भारत नहीं ला पा रहा।
परिजन सरकार और प्रशासन से लगातार गुहार लगा रहे हैं कि किसी तरह उनके बेटे का शव वतन लाने में मदद की जाए ताकि वे अंतिम बार उसका चेहरा देख सकें।
Sagar Rana Netherlands death: पेड़ काटते समय हुआ हादसा, सीढ़ी से गिरकर लगी गंभीर चोट
परिवार के अनुसार सागर राणा नीदरलैंड में एक स्थानीय व्यक्ति के यहां पेड़ काटने का काम कर रहा था। 20 और 21 मार्च को छुट्टी के दौरान उसे यह काम दिया गया था।
बताया गया कि काम के दौरान अचानक पेड़ उसकी ओर गिरने लगा। उस समय वह सीढ़ी पर खड़ा था। पेड़ के गिरते ही सीढ़ी उलझ गई और संतुलन बिगड़ने से वह पीछे की ओर जमीन पर गिर पड़ा। गिरते समय उसके सिर में गंभीर चोट लगी और नाक तथा कान से खून बहने लगा।
घटना के तुरंत बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चार दिन तक डॉक्टर उसकी जान बचाने की कोशिश करते रहे, लेकिन हालत लगातार बिगड़ती गई।
चार दिन तक अस्पताल में चला इलाज, फिर टूट गई परिवार की उम्मीद
हादसे के बाद सागर को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती किया गया था। डॉक्टरों ने लगातार उपचार किया, लेकिन सिर में लगी चोट बेहद गंभीर थी।
चार दिनों तक परिवार के सदस्य फोन के जरिए उसकी स्थिति के बारे में जानकारी लेते रहे। आखिरकार 25 मार्च को उसके निधन की सूचना जैसे ही परिवार तक पहुंची, पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
Sagar Rana Netherlands death की खबर ने न केवल परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया।
टूरिस्ट वीजा पर गया था फ्रांस, बेहतर भविष्य का सपना लेकर निकला था घर से
सागर राणा 24 नवंबर 2024 को टूरिस्ट वीजा पर France गया था। परिवार को उम्मीद थी कि वह वहां काम ढूंढकर घर की आर्थिक स्थिति सुधार पाएगा।
वह पेरिस में कुछ समय तक रहा और रोजगार की तलाश करता रहा। लेकिन लंबे समय तक स्थायी काम नहीं मिलने के कारण जनवरी 2026 में वह नीदरलैंड चला गया।
वहां भी शुरुआती महीनों में उसे रोजगार नहीं मिला और लगातार संघर्ष करना पड़ा।
दो महीने तक काम नहीं मिला, फिर पेड़ काटने का काम मिला
परिजनों के अनुसार नीदरलैंड पहुंचने के बाद करीब दो महीने तक सागर को कोई स्थायी रोजगार नहीं मिला। इस दौरान वह छोटे-मोटे काम की तलाश में इधर-उधर भटकता रहा।
करीब 15 दिन पहले उसे एक स्थानीय व्यक्ति के घर पर पेड़ काटने का काम मिला था। परिवार को उम्मीद थी कि अब उसकी स्थिति सुधरेगी और वह धीरे-धीरे कर्ज चुकाने में सक्षम हो जाएगा।
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
Sagar Rana Netherlands death: बिना सुरक्षा उपकरण के कराया गया काम, परिवार ने लगाए आरोप
परिवार का आरोप है कि जिस समय सागर पेड़ काटने का काम कर रहा था, उस दौरान उसे कोई सुरक्षा उपकरण नहीं दिए गए थे।
उनका कहना है कि यदि हेलमेट और अन्य जरूरी सुरक्षा इंतजाम होते, तो शायद यह हादसा टल सकता था। इस घटना ने विदेशों में काम करने वाले असंगठित भारतीय युवाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आर्थिक तंगी ने विदेश जाने को मजबूर किया था सागर को
सागर राणा का परिवार लंबे समय से आर्थिक कठिनाइयों से गुजर रहा था। परिवार के पास केवल एक बीघा जमीन है और कोई स्थायी आय का साधन नहीं है।
पिता किराए की गाड़ी चलाकर परिवार का खर्च चलाते हैं। घर की हालत इतनी खराब है कि परिवार को अपने चाचा के मकान में किराए पर रहना पड़ रहा है।
ऐसे हालात में सागर ने विदेश जाकर परिवार की जिंदगी बदलने का सपना देखा था।
20 से 25 लाख रुपए का कर्ज लेकर भेजा गया था विदेश
परिवार ने सागर को विदेश भेजने के लिए करीब 20 से 25 लाख रुपए तक का कर्ज लिया था। उम्मीद थी कि वह विदेश में कमाकर इस कर्ज को उतार देगा और परिवार के लिए नया मकान बनवाएगा।
सागर रोजाना अपनी मां और भाई से फोन पर बात करता था। लेकिन 20 मार्च को अचानक उसका फोन आना बंद हो गया।
परिवार ने कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। बाद में उसकी मौत की खबर आई।
छोटे भाई ने बताया—परिवार की उम्मीदों का सहारा था सागर
सागर के छोटे भाई कमल राणा ने बताया कि उनका बड़ा भाई पूरे परिवार की उम्मीद था।
उन्होंने कहा कि सागर विदेश जाकर केवल अपनी जिंदगी नहीं, बल्कि पूरे परिवार का भविष्य बदलना चाहता था। वह हर दिन परिवार से बात करता था और उन्हें भरोसा दिलाता था कि जल्द ही सब कुछ ठीक हो जाएगा।
लेकिन अचानक आई इस खबर ने परिवार को अंदर तक तोड़ दिया।
विदेश में फंसा पार्थिव शरीर, सरकार से लगाई मदद की गुहार
वर्तमान में सागर राणा का पार्थिव शरीर नीदरलैंड में ही रखा हुआ है। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि वे खुद शव को भारत नहीं ला सकते।
परिजन लगातार प्रशासन और सरकार से मदद की अपील कर रहे हैं ताकि उनके बेटे का अंतिम संस्कार अपने गांव में हो सके।
Sagar Rana Netherlands death का यह पहलू सबसे ज्यादा भावनात्मक और चिंताजनक माना जा रहा है।
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने भी उठाई मदद की मांग
गांव के लोगों और स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी प्रशासन से अपील की है कि सागर के शव को जल्द से जल्द भारत लाने की व्यवस्था की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे मामलों में सरकार को आगे आकर मदद करनी चाहिए ताकि पीड़ित परिवार को राहत मिल सके।
विदेश जाने वाले युवाओं की बढ़ती संख्या और बढ़ते जोखिम
हरियाणा सहित उत्तर भारत के कई राज्यों से बड़ी संख्या में युवा बेहतर भविष्य की तलाश में यूरोप और अन्य देशों की ओर जा रहे हैं।
लेकिन कई बार बिना पर्याप्त सुरक्षा और वैध रोजगार व्यवस्था के विदेश जाने से जोखिम भी बढ़ जाता है। Sagar Rana Netherlands death जैसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि प्रवासी युवाओं की सुरक्षा के लिए मजबूत तंत्र की जरूरत है।
परिवार की एक ही मांग—आखिरी बार बेटे का चेहरा देखना चाहते हैं माता-पिता
परिवार की सबसे बड़ी इच्छा यही है कि किसी तरह उनके बेटे का पार्थिव शरीर भारत वापस लाया जाए।
माता-पिता का कहना है कि वे अपने बेटे को अंतिम विदाई देना चाहते हैं और अपने हाथों से उसका अंतिम संस्कार करना चाहते हैं।
उनकी यह भावनात्मक अपील पूरे क्षेत्र में लोगों को झकझोर रही है।

