छात्रों ने कार्बनिक (आर्गेनिक) कीटनाशी तैयार करने का दावा किया
मुजफ्फरनगर। श्रीराम कालेज के कृषि विभाग के छात्रों ने कार्बनिक (आर्गेनिक) कीटनाशी तैयार करने का दावा किया है। विभाग के अध्यापकों तथा छात्रों ने खेती में प्रयोग हो रहे रसायन को कम करने के लिए कीटनाशी तैयार किया है। इसकी विशेषताओं को बताते हुए प्रयोग भी किया।
छात्रों ने कीटनाशक तैयार करने का दावा करते हुए कालेज के अधिकारियों और शिक्षकों को बताया कि आज के समय में रसायनों का प्रयोग अधिक हो रहा है, जिसका दुष्प्रभाव हमें देखने को मिल रहा है। ये जहरीले पदार्थ किसी भी रूप में हमारे तथा पालतू पशुओं के अंदर प्रवेश करते हैं, जिससे खतरनाक बीमारियां फैलती है। इनके प्रयोग से मिट्टी के अंदर तथा वाह्य रहने वाले लाभदायक सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं, जो फसल उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
छात्राओं ने बताया कि इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए इस कीटनाशी घोल को तैयार किया गया। इस घोल को तैयार करने के लिए पांच किलो पार्थेनियम घास, पांच किलो नीम की पत्ती, ५०० ग्राम गोमूत्र, ५० ग्राम रीठा पावडर, तीन किलो १० दिन पुरानी लस्सी ली गयी। पहले पार्थेनियम तथा नीम के पत्तों को पांच लीटर पानी में पकाया।
पानी पकते हुए जब एक लीटर के आसपास रह गया तो इसे छान लिया। इस पानी को ठंडा होने के बाद इसमें बाकी सामग्री को मिश्रित किया गया और १० दिन के लिए रख दिया गया। १० दिन बाद इसको छान लिया। प्राप्त घोल एक कीटनाशी के रूप में प्राप्त हुआ। इस घोल से ५०० ग्राम लिया ओर १५ लीटर पानी के साथ स्प्रेयर की सहायता से छिड़काव किया गया।
इस दौरान बताया कि इस कीटनाशी को किसान घर पर ही तैयार कर सकते हैं। कृषि विभागाध्यक्ष डा. नईम ने बताया की इस कीटनाशी को तैयार करने में लगी सामग्री पूरी तरह आर्गेनिक है, जिसमें किसी तरह का कोई रसायन नहीं मिलाया गया।
हमारे जीवन में बीमारियों से बचने के लिए आर्गेनिक खेती की क्रिया को अपनाना होगा। आर्गेनिक फसल उत्पादन से आय भी बढ़ाई जा सकती है। इस अवसर पर डा. सौरभ जैन, डा. विनीत शर्मा, आबिद, मुकुल, श्रेया, हिमांशु गौतम, अनमोल, रोहित एवं कृषि विभाग के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

