खेल जगत

हेप्टाथलॉन गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय डोप टेस्ट में पॉजिटिव: Swapna Barman को NADA ने सस्पेंड किया; इसी महीने संन्यास लिया था

भारतीय एथलेटिक्स की चर्चित स्टार और 2018 जकार्ता एशियन गेम्स में इतिहास रचने वाली Swapna Barman एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका शानदार खेल प्रदर्शन नहीं बल्कि डोपिंग से जुड़ा मामला है। नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA) ने स्वप्ना बर्मन को प्रोविजनल तौर पर सस्पेंड किया है। उनके सैंपल में प्रतिबंधित पदार्थ Boldenone पाए जाने की जानकारी सामने आई है।

यह घटनाक्रम इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि स्वप्ना ने इसी महीने प्रतिस्पर्धी एथलेटिक्स से संन्यास लेने की घोषणा की थी। 31 जुलाई को उन्होंने अपने लंबे और चुनौतीपूर्ण करियर को विराम देने का ऐलान किया था। लगातार चोटों और शरीर के साथ नहीं देने को उन्होंने अपने फैसले की प्रमुख वजह बताया था।

हालांकि यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि NADA की कार्रवाई फिलहाल प्रोविजनल सस्पेंशन तक है। इसका अर्थ यह नहीं है कि स्वप्ना को अंतिम रूप से डोपिंग उल्लंघन का दोषी ठहरा दिया गया है। आगे की एंटी-डोपिंग प्रक्रिया में मामले की जांच और सुनवाई होगी, जिसके बाद अंतिम निर्णय सामने आएगा।

डोप टेस्ट में मिला Boldenone, NADA की सूची में नाम

NADA की ताजा प्रोविजनल सस्पेंशन सूची में स्वप्ना बर्मन का नाम शामिल किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक उनके नमूने में Boldenone पाया गया, जो एनाबॉलिक-एंड्रोजेनिक स्टेरॉयड की श्रेणी में आने वाला प्रतिबंधित पदार्थ है।

Boldenone को विश्व एंटी-डोपिंग नियमों के तहत प्रतिबंधित एनाबॉलिक एजेंटों में शामिल किया गया है। इसका नाम 2026 की प्रतिबंधित पदार्थों की सूची में भी दर्ज है।

डोपिंग मामलों में किसी खिलाड़ी के सैंपल में प्रतिबंधित पदार्थ मिलना गंभीर विषय होता है, लेकिन पॉजिटिव टेस्ट के बाद भी खिलाड़ी को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अधिकार होता है।

यही वजह है कि स्वप्ना के मामले में भी फिलहाल ‘प्रोविजनल सस्पेंशन’ को अंतिम सजा या अंतिम दोषसिद्धि के तौर पर देखना उचित नहीं होगा।

संन्यास की घोषणा के कुछ ही दिन बाद आया डोपिंग मामला

स्वप्ना बर्मन ने जुलाई के अंतिम दिनों में अपने करियर को अलविदा कहने का फैसला किया था। 31 जुलाई को उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने संन्यास की घोषणा की थी।

उन्होंने अपने संदेश में बताया था कि एथलेटिक्स उनके लिए केवल खेल नहीं बल्कि उनकी पहचान, जुनून और सपना रहा है। लेकिन लगातार चोटों के कारण उनका शरीर पहले की तरह साथ नहीं दे रहा था।

उनके करियर में स्लिप्ड डिस्क और घुटने से जुड़ी चोटों ने उन्हें परेशान किया। इसके बावजूद वह लंबे समय तक प्रतिस्पर्धा करती रहीं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया।

इसी पृष्ठभूमि में अब डोप टेस्ट का मामला सामने आने से उनके संन्यास के तुरंत बाद उनके करियर की आखिरी तस्वीर पर एक नई और गंभीर चर्चा शुरू हो गई है।

2018 में स्वप्ना ने रचा था भारतीय एथलेटिक्स का इतिहास

स्वप्ना बर्मन का नाम भारतीय खेल इतिहास में विशेष स्थान रखता है। 2018 जकार्ता एशियन गेम्स में उन्होंने महिला हेप्टाथलॉन में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा था।

वह एशियन गेम्स में हेप्टाथलॉन का गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बनी थीं। यह उपलब्धि भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ी उपलब्धियों में गिनी जाती है।

जकार्ता में स्वप्ना ने 6,026 अंक हासिल किए थे और चोट के बावजूद प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया था। उनके इस प्रदर्शन ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई।

इसके बाद उन्हें 2019 में अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

हेप्टाथलॉन क्या होता है?

हेप्टाथलॉन एथलेटिक्स की सबसे चुनौतीपूर्ण बहु-इवेंट प्रतियोगिताओं में से एक है। इसमें महिला खिलाड़ी दो दिनों में सात अलग-अलग स्पर्धाओं में हिस्सा लेती हैं।

इन सात स्पर्धाओं में 100 मीटर बाधा दौड़, ऊंची कूद, गोला फेंक, 200 मीटर दौड़, लंबी कूद, भाला फेंक और 800 मीटर दौड़ शामिल हैं।

इस प्रतियोगिता की खासियत यह है कि खिलाड़ी को केवल एक क्षेत्र में उत्कृष्ट होना पर्याप्त नहीं होता। उसे गति, ताकत, तकनीक, छलांग लगाने की क्षमता और सहनशक्ति—सभी में संतुलन बनाना पड़ता है।

यही वजह है कि हेप्टाथलॉन में किसी खिलाड़ी की सफलता को बेहद कठिन उपलब्धि माना जाता है।

2017 में एशियन चैंपियन बनकर दी थी दस्तक

स्वप्ना बर्मन ने जकार्ता में इतिहास रचने से पहले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता का संकेत दे दिया था।

2017 में उन्होंने भुवनेश्वर में आयोजित एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हेप्टाथलॉन का गोल्ड मेडल जीता था। प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और भारतीय एथलेटिक्स में अपनी जगह मजबूत की।

इसके एक साल बाद 2018 एशियन गेम्स में उन्होंने उससे भी बड़ी उपलब्धि हासिल की और एशियन गेम्स के इतिहास में भारत की पहली महिला हेप्टाथलॉन गोल्ड मेडलिस्ट बन गईं।

चोटों के बावजूद नहीं छोड़ा था संघर्ष

स्वप्ना बर्मन का करियर केवल पदकों की कहानी नहीं रहा। इसके साथ चोटों और शारीरिक चुनौतियों का लंबा दौर भी जुड़ा रहा।

उन्होंने कई मौकों पर चोटों के बावजूद प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। उनके करियर के बाद के वर्षों में घुटने और पीठ से जुड़ी परेशानियां लगातार चर्चा में रहीं।

2023 में भी उन्होंने एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता। इसी तरह 2023 एशियन इंडोर चैंपियनशिप में उन्होंने पेंटाथलॉन में सिल्वर हासिल किया।

यानी जकार्ता के ऐतिहासिक गोल्ड के बाद भी उनका प्रतिस्पर्धी सफर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था।

हांगझोउ एशियन गेम्स में पदक से बस चार अंक दूर रह गई थीं

2023 हांगझोउ एशियन गेम्स में स्वप्ना बर्मन अपने खिताब को दोहराने में सफल नहीं हो सकीं। वह चौथे स्थान पर रहीं।

इस प्रतियोगिता में वह कांस्य पदक से सिर्फ चार अंक पीछे रह गई थीं। भारत की नंदिनी अगासरा ने कांस्य पदक हासिल किया था।

यह प्रदर्शन भी दिखाता है कि स्वप्ना अपने करियर के अंतिम दौर तक एशियाई स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता रखती थीं।

2025 में आखिरी प्रतिस्पर्धी प्रदर्शन

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार स्वप्ना बर्मन का अंतिम प्रतिस्पर्धी प्रदर्शन 2025 नेशनल ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हुआ था, जहां उन्होंने तीसरा स्थान हासिल किया।

इसके बाद चोटों और शारीरिक समस्याओं के बीच उन्होंने प्रतिस्पर्धी एथलेटिक्स को अलविदा कहने का फैसला किया।

उनका संन्यास संदेश भावनात्मक था। उन्होंने स्वीकार किया था कि जिस खेल से उन्होंने अपनी पहचान बनाई, उससे दूर होना आसान फैसला नहीं था।

स्वप्ना ने कहा था—शरीर अब पहले की तरह साथ नहीं दे रहा

अपने संन्यास के समय स्वप्ना ने चोटों का उल्लेख करते हुए कहा था कि शरीर अब उन्हें उसी तरह समर्थन नहीं दे रहा जैसा पहले देता था। उन्होंने स्लिप्ड डिस्क और घुटने की चोटों का भी जिक्र किया था।

एक खिलाड़ी के लिए अपने करियर के उस मुकाम पर पहुंचकर संन्यास लेना भावनात्मक रूप से बेहद कठिन हो सकता है, खासकर तब जब उसने वर्षों तक चोटों के बावजूद प्रतिस्पर्धा की हो।

स्वप्ना के मामले में भी उनके संन्यास के पीछे यही संघर्ष प्रमुख कारण के रूप में सामने आया था।

डोपिंग मामले के कारण अब करियर के अंतिम अध्याय पर सवाल

अब जब उनके सैंपल में Boldenone पाए जाने और NADA द्वारा प्रोविजनल सस्पेंशन की जानकारी सामने आई है, तो स्वप्ना के करियर का अंतिम अध्याय एक नए विवाद से जुड़ गया है।

लेकिन यहां यह दोहराना जरूरी है कि प्रोविजनल सस्पेंशन अंतिम दोषसिद्धि नहीं है

एंटी-डोपिंग नियमों के तहत खिलाड़ी के पास निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपने मामले का जवाब देने का अधिकार होता है। जांच और सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अंतिम निर्णय क्या होता है।

इसलिए फिलहाल उनके खिलाफ आरोप और NADA की कार्रवाई को उसी स्थिति में रिपोर्ट करना जिम्मेदार पत्रकारिता होगी, जिसमें मामला मौजूद है।

Boldenone क्या है और डोपिंग में क्यों गंभीर माना जाता है?

Boldenone एक एनाबॉलिक-एंड्रोजेनिक स्टेरॉयड है। इसका उपयोग मूल रूप से पशु चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ा रहा है और यह शरीर में एनाबॉलिक प्रभाव पैदा करने वाले स्टेरॉयड समूह से संबंधित है।

खेलों में एनाबॉलिक एजेंटों पर विशेष रूप से कड़ा नियंत्रण रहता है क्योंकि इनसे शरीर की मांसपेशियों और प्रदर्शन से जुड़े प्रभाव हो सकते हैं।

विश्व एंटी-डोपिंग नियमों के तहत Boldenone प्रतिबंधित पदार्थों में शामिल है।

हालांकि किसी खिलाड़ी के सैंपल में कोई पदार्थ पाए जाने के पीछे परिस्थितियां अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए किसी खास खिलाड़ी ने पदार्थ जानबूझकर लिया या वह किसी अन्य माध्यम से शरीर में पहुंचा, यह निर्धारित करना जांच और सुनवाई की प्रक्रिया का हिस्सा होता है।

डोप टेस्ट पॉजिटिव होने का मतलब तुरंत अंतिम दोषी होना नहीं

खेल प्रशंसकों के लिए यह अंतर समझना बेहद जरूरी है।

किसी खिलाड़ी का डोप टेस्ट पॉजिटिव आना गंभीर मामला है, लेकिन यह प्रक्रिया का पहला महत्वपूर्ण चरण है। इसके बाद खिलाड़ी को नियमों के तहत अपना पक्ष रखने और मामले की सुनवाई का अवसर मिलता है।

स्वप्ना के मामले में उपलब्ध जानकारी के अनुसार अभी प्रोविजनल सस्पेंशन की कार्रवाई सामने आई है। अंतिम दोषसिद्धि की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

इसलिए फिलहाल उन्हें ‘डोपिंग की दोषी खिलाड़ी’ कहना जल्दबाजी होगी। सही शब्दावली यही होगी कि वह डोप टेस्ट में प्रतिबंधित पदार्थ के लिए पॉजिटिव पाई गई हैं और NADA ने उन्हें प्रोविजनली सस्पेंड किया है।

संन्यास लेने के बाद भी डोपिंग कार्रवाई क्यों जारी रह सकती है?

किसी खिलाड़ी के संन्यास की घोषणा से उसके पिछले या हालिया डोपिंग मामले की प्रक्रिया स्वतः समाप्त नहीं हो जाती।

यदि किसी खिलाड़ी का नमूना लिया गया था और बाद में उसमें प्रतिबंधित पदार्थ पाया गया, तो संबंधित एंटी-डोपिंग प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है, भले ही खिलाड़ी ने इस बीच प्रतिस्पर्धी खेल से संन्यास की घोषणा कर दी हो। स्वप्ना के मामले में भी यही स्थिति सामने आई है।

इसका मतलब यह नहीं कि उनके संन्यास की घोषणा ही डोपिंग मामले से जुड़ी थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने संन्यास की वजह चोटों और शरीर के साथ नहीं देने को बताया था।

स्वप्ना का करियर सिर्फ इस विवाद से नहीं आंका जा सकता

डोपिंग मामले की गंभीरता अपनी जगह है, लेकिन स्वप्ना बर्मन के पूरे खेल करियर को केवल इस घटनाक्रम से परिभाषित करना भी उचित नहीं होगा।

2018 एशियन गेम्स में भारत के लिए पहला हेप्टाथलॉन गोल्ड जीतना एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी। वह एशियन चैंपियन रह चुकी हैं, ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और उन्हें अर्जुन पुरस्कार भी मिल चुका है।

उनका करियर चोटों से संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय पदकों के बीच आगे बढ़ा।

अब डोपिंग मामले का अंतिम परिणाम उनके करियर रिकॉर्ड और भविष्य की खेल-संबंधी स्थिति पर अलग प्रभाव डाल सकता है, लेकिन जब तक प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

2016 रियो ओलिंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था

स्वप्ना बर्मन सिर्फ एशियन गेम्स की गोल्ड मेडलिस्ट ही नहीं रहीं। उन्होंने 2016 रियो ओलिंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था।

ओलिंपिक तक पहुंचना किसी भी एथलीट के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है। स्वप्ना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रतिस्पर्धा करते हुए भारत की हेप्टाथलॉन पहचान को मजबूत किया।

उनके करियर की शुरुआती उपलब्धियों से लेकर जकार्ता के ऐतिहासिक गोल्ड तक का सफर भारतीय एथलेटिक्स में उनकी अलग पहचान बनाता है।

एथलेटिक्स के बाद राजनीति में भी उतरीं स्वप्ना

खेल के मैदान के बाद स्वप्ना बर्मन ने राजनीति में भी कदम रखा।

2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्होंने राजगंज विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्हें भारतीय जनता पार्टी के दिनेश सरकार ने 21,477 वोटों के अंतर से हराया था।

इस तरह खेल के बाद सार्वजनिक जीवन में भी उनकी सक्रियता देखने को मिली।

राजनीतिक सफर और खेल करियर का अलग-अलग संदर्भ

स्वप्ना का राजनीतिक मैदान में उतरना उनके सार्वजनिक जीवन का एक नया अध्याय था। वह एक लोकप्रिय खेल चेहरा होने के कारण पहले से ही लोगों के बीच पहचानी जाती थीं।

विधानसभा चुनाव में उनका उतरना इस बात का संकेत था कि वह खेल के मैदान से आगे भी सार्वजनिक भूमिका निभाने की कोशिश कर रही थीं।

हालांकि चुनावी राजनीति और खेल करियर दोनों अलग-अलग क्षेत्र हैं और इन्हें अलग संदर्भों में देखा जाना चाहिए।

अब सबसे बड़ा सवाल—आगे क्या होगा?

NADA की प्रोविजनल कार्रवाई के बाद स्वप्ना के मामले में आगे की एंटी-डोपिंग प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा और संबंधित प्राधिकरण उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले को आगे बढ़ाएंगे।

अंतिम फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि जांच और सुनवाई में क्या तथ्य सामने आते हैं।

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस मामले का अंतिम परिणाम क्या होगा।

भारतीय खेल जगत के लिए भी मामला महत्वपूर्ण

स्वप्ना बर्मन देश की बड़ी एथलेटिक्स उपलब्धियों से जुड़ी खिलाड़ी रही हैं। इसलिए उनके डोपिंग मामले ने भारतीय खेल जगत का ध्यान खींचा है।

भारत में पिछले वर्षों में डोपिंग नियंत्रण को लेकर जागरूकता और परीक्षण व्यवस्था को लगातार मजबूत करने पर जोर दिया गया है। ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच महत्वपूर्ण होती है ताकि खिलाड़ी, खेल प्रशंसक और संस्थाएं अंतिम निर्णय को तथ्यों और प्रक्रिया के आधार पर समझ सकें।

स्वप्ना का मामला भी इसी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा।

एक ऐतिहासिक गोल्ड से डोपिंग जांच तक पहुंचा सफर

स्वप्ना बर्मन की कहानी में इस समय दो बेहद अलग तस्वीरें दिखाई दे रही हैं। एक तस्वीर 2018 जकार्ता की है, जहां वह भारतीय एथलेटिक्स का इतिहास बदलते हुए एशियन गेम्स की पहली भारतीय महिला हेप्टाथलॉन गोल्ड मेडलिस्ट बनी थीं।

दूसरी तस्वीर अगस्त 2026 की है, जब संन्यास की घोषणा के कुछ ही सप्ताह के भीतर उनके नाम के साथ NADA की प्रोविजनल सस्पेंशन सूची जुड़ गई।

इन दोनों घटनाओं के बीच उनका लंबा संघर्ष, चोटें, पदक और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं शामिल हैं।

लेकिन फिलहाल डोपिंग मामले का अंतिम अध्याय लिखा जाना बाकी है।

अब फैसला प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही

स्वप्ना बर्मन का डोप टेस्ट पॉजिटिव आने की खबर निश्चित रूप से भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ी खबर है। Boldenone जैसे प्रतिबंधित पदार्थ का सैंपल में पाया जाना गंभीर एंटी-डोपिंग मुद्दा है और NADA ने इसी आधार पर प्रोविजनल सस्पेंशन की कार्रवाई की है।

लेकिन उनकी स्थिति को अंतिम रूप से तय करने के लिए आगे की प्रक्रिया का इंतजार करना होगा। अभी उनके खिलाफ अंतिम दोषसिद्धि की जानकारी सामने नहीं आई है।

स्वप्ना ने कुछ ही दिन पहले चोटों के कारण एथलेटिक्स से संन्यास लिया था। उनके खाते में 2018 एशियन गेम्स का ऐतिहासिक हेप्टाथलॉन गोल्ड, एशियन चैंपियनशिप का स्वर्ण, ओलिंपिक प्रतिनिधित्व और अर्जुन पुरस्कार जैसी उपलब्धियां हैं।

अब खेल जगत की नजर इस बात पर रहेगी कि NADA की आगे की प्रक्रिया में क्या सामने आता है और इस मामले पर अंतिम निर्णय क्या होता है।

स्वप्ना बर्मन के डोप टेस्ट में Boldenone पाए जाने और NADA द्वारा प्रोविजनल सस्पेंशन की कार्रवाई ने उनके शानदार खेल करियर के बाद एक नया और गंभीर अध्याय जोड़ दिया है। हालांकि, फिलहाल यह अंतिम दोषसिद्धि नहीं है और मामले की आगे की एंटी-डोपिंग प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। स्वप्ना ने इसी महीने चोटों और शरीर के साथ नहीं देने का हवाला देते हुए एथलेटिक्स से संन्यास लिया था। 2018 जकार्ता एशियन गेम्स में भारत के लिए पहला हेप्टाथलॉन गोल्ड जीतने वाली स्वप्ना का करियर ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरा रहा है। अब इस मामले का अंतिम फैसला संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

 

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