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Lucknow-Kanpur Expressway पर सड़क धंसने के बाद NHAI में बड़ा फेरबदल, RO विशाल गौतम जम्मू-कश्मीर ट्रांसफर; पहले हटाए जा चुके हैं प्रोजेक्ट डायरेक्टर

Lucknow-Kanpur Expressway सड़क धंसने और गड्ढों को लेकर NHAI की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के बाद क्षेत्रीय अधिकारी विशाल गौतम का जम्मू-कश्मीर तबादला हुआ है। उनकी जगह अब्दुल बासित को जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले प्रोजेक्ट डायरेक्टर नकुल प्रकाश वर्मा को हटाकर नवरत्न को नया PD बनाया गया था। विशाल गौतम के सहकर्मी उनके तबादले को सामान्य प्रशासनिक ट्रांसफर बता रहे हैं, जबकि सूत्र इसे एक्सप्रेसवे मामले के बाद हुई किरकिरी से जोड़कर देख रहे हैं। आधिकारिक कारण स्पष्ट होने तक दोनों पहलुओं को अलग-अलग रखना जरूरी है। अब निगाहें सड़क की तकनीकी स्थिति, मरम्मत और आगे की निगरानी व्यवस्था पर रहेंगी।

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उत्तर प्रदेश

उद्घाटन के एक महीने में ही Kanpur-Lucknow Expressway बेहाल! जगह-जगह पैचवर्क, दरारें और धंसी सड़कें; 7 किमी हिस्से में चल रहा मरम्मत का काम

Kanpur-Lucknow Expressway पर उद्घाटन के करीब एक महीने बाद कई स्थानों पर मरम्मत और पैचवर्क का काम सामने आने से निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं। लखनऊ से कानपुर की दिशा में करीब 28वें से 35वें किलोमीटर तक साढ़े छह से सात किलोमीटर के हिस्से में सड़क किनारे और साइड लेन पर काम चलता मिला। करीब 37.6 किलोमीटर तक कई स्थानों पर नालियों में सुधार किया जा रहा था, जबकि 39.5 किलोमीटर के आसपास पुल में दरार भरने का काम और 39.8 किलोमीटर पर सड़क की मरम्मत मिली।

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उत्तर प्रदेश

Delhi-Meerut Expressway पर अब जाम को ‘स्पीड’ से मात देगा सिस्टम! 8.7 किमी हिस्से में 15 अगस्त से Variable Speed Limit का ट्रायल, जानिए कब कितनी रहेगी रफ्तार

Delhi-Meerut Expressway पर अब ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए सिर्फ सड़क चौड़ी करने पर निर्भर रहने के बजाय स्मार्ट स्पीड कंट्रोल का प्रयोग होने जा रहा है। सराय काले खां से यूपी बॉर्डर तक 8.7 किलोमीटर के हिस्से में प्रस्तावित Variable Speed Limit सिस्टम ट्रैफिक की स्थिति, वाहनों की संख्या और मौसम जैसे कारकों के आधार पर गति सीमा को बदल सकेगा। 15 अगस्त के आसपास प्रस्तावित इस पायलट प्रोजेक्ट में अक्षरधाम इंटरचेंज के पास इलेक्ट्रॉनिक VSL बोर्ड लगाए जाने हैं। शोधकर्ताओं ने 72 घंटे के ट्रैफिक डेटा के आधार पर पीक और ऑफ-पीक समय के लिए अलग-अलग गति सीमाओं की सिफारिश की है। अब 30, 90 और 120 दिन के मूल्यांकन से पता चलेगा कि यह तकनीक वास्तव में जाम, औसत गति और ड्राइवर व्यवहार पर कितना असर डालती है। सफल होने पर यही मॉडल देश के दूसरे व्यस्त एक्सप्रेसवे पर भी ट्रैफिक प्रबंधन का नया रास्ता खोल सकता है।

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