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UNGA में Balen Shah का बड़ा संदेश: ‘हिमालय खतरे में है’, भारत-चीन के साथ साझा अलर्ट सिस्टम का प्रस्ताव; बोले- नेपाल को कर्ज नहीं, ग्रांट चाहिए

Balen Shah ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भोटेकोशी-त्रिशूली बाढ़ को हिमालय और दुनिया के लिए चेतावनी बताते हुए भारत और चीन के साथ साझा जलवायु एवं आपदा-प्रबंधन तंत्र बनाने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने सैटेलाइट डेटा साझा करने, ग्लेशियर झीलों की निगरानी, अर्ली वार्निंग सिस्टम मजबूत करने और आपदा के समय संयुक्त राहत-बचाव की जरूरत पर जोर दिया। शाह ने भारत और चीन सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आपदा के बाद मिली सहायता के लिए धन्यवाद दिया तथा कहा कि जलवायु आपदाओं से प्रभावित गरीब देशों को पुनर्निर्माण के लिए अतिरिक्त कर्ज के बजाय पर्याप्त ग्रांट आधारित सहायता मिलनी चाहिए। नेपाल के अनुसार हालिया आपदा में कम से कम 1,400 लोगों की मौत हुई और 6,000 से अधिक लोग लापता हैं, जबकि पुनर्निर्माण की जरूरत देश की GDP के करीब 10 प्रतिशत तक आंकी गई है। आगे की चुनौती केवल राहत और पुनर्निर्माण की नहीं, बल्कि हिमालयी क्षेत्र में ऐसी आपदाओं के जोखिम को पहले से पहचानने और कम करने की भी है।

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Nepal में बदली कूटनीति की तस्वीर! PM बालेन शाह ने पहली बार अकेले भारतीय राजदूत से की मुलाकात, चीन के दूत से भी बातचीत; आखिर क्यों टूटा अपना ही नियम?

Nepal उन्होंने भारत के साथ व्यापार, बिजली, सड़क और विकास सहयोग पर बातचीत की, जबकि चीनी राजदूत झांग माओमिंग के साथ भी नेपाल-चीन संबंधों और विकास सहयोग पर चर्चा की। सरकार के शुरुआती 100 दिनों के बाद सलाहकारों की सलाह पर शाह ने नेताओं, कारोबारियों और उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन संवाद बढ़ाया और अब विदेशी राजदूतों के साथ भी व्यक्तिगत बैठकें शुरू की हैं। यह बदलाव नेपाल की विदेश नीति में संतुलन, संस्थागत प्रक्रिया और व्यावहारिक कूटनीतिक संवाद के बीच नए समीकरण की ओर संकेत करता है।

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नेपाल के पीएम Balen Shah का बड़ा बयान: ‘भारत ही नहीं, नेपाल ने भी कब्जाई भारतीय जमीन’, संसद में दावे से मचा राजनीतिक भूचाल

Balen Shah के हालिया बयान ने भले ही राजनीतिक बहस को तेज कर दिया हो, लेकिन क्षेत्रीय स्थिरता और द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य के लिए दोनों देशों के बीच संवाद और कूटनीतिक समाधान की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर नेपाल सरकार की आगे की रणनीति और भारत की प्रतिक्रिया पर पूरे दक्षिण एशिया की नजर बनी रहेगी।

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