Allahabad High Court

उत्तर प्रदेश

Allahabad High Court का ऐतिहासिक फैसला: एक साल से अलग रह चुके दंपति को तलाक की अनुमति, बच्चों की अभिरक्षा मां को सौंपने का आदेश

Allahabad High Court का यह फैसला भारतीय परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है, जहां कानून और मानवीय संवेदनाओं के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है। कोर्ट का यह निर्णय तलाक के मामलों में न केवल कानूनी प्रक्रिया को समझने में मदद करेगा, बल्कि परिवारों को यह समझने का अवसर भी देगा कि उनका निजी जीवन किस हद तक कानूनी रूप से प्रभावित होता है।

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उत्तर प्रदेश

High Court में गवाह के रूप में मृतक को पेश करना, डीएम Fatehpur की कार्यशैली पर उठे सवाल

Fatehpur डीएम फतेहपुर ने 26 अक्टूबर 2024 की मुआयना रिपोर्ट पेश की थी जिसमें यह दावा किया गया था कि याची ने सरकारी तालाब की भूमि पर अवैध कब्जा किया है। इस रिपोर्ट में गवाहों के रूप में दो नाम सामने आए थे—छेदीलाल और मिथुन। लेकिन याची के अधिवक्ता जगदीश सिंह बुंदेला ने कोर्ट में एक चौंकाने वाला तथ्य पेश किया।

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उत्तर प्रदेश

40 साल तक मकान पर कब्जा करके किराएदार ने मालकिन को ठगा, High Court ने झटक दिया 15 लाख का झटका

High Court ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि “किराएदार ने जानबूझकर मुकदमेबाजी को लंबा खींचकर मालकिन और उनके परिवार को उनकी संपत्ति से वंचित रखा।” कोर्ट ने यह भी कहा कि “40 साल की लंबी अवधि में एक पूरी पीढ़ी को उनके वैध अधिकारों से महरूम कर दिया गया, जो न्यायिक प्रणाली पर एक कलंक है।”

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वैश्विक

Sambhal Violence: सांसद जियाउर रहमान बर्क को हाई कोर्ट का झटका, FIR रद्द करने से इनकार, जानें पूरा मामला

Sambhal Violence इस मामले में अब पुलिस जांच का क्या नतीजा निकलता है, यह देखने वाली बात होगी। हाई कोर्ट का यह निर्देश कि “गिरफ्तारी नहीं की जाएगी” सांसद बर्क के लिए राहत भरा है, लेकिन उनकी कानूनी परेशानियां अभी खत्म नहीं हुई हैं।

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उत्तर प्रदेश

Allahabad High Court का महत्वपूर्ण फैसला: आरोप तय होने के बाद कार्यवाही फिर से शुरू नहीं हो सकती

Allahabad High Court का यह निर्णय न केवल एक केस की सुनवाई के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह न्याय प्रणाली की सच्चाई और पारदर्शिता को भी दर्शाता है। जब समाज में न्याय का राज स्थापित होता है, तब ही हम एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की ओर बढ़ सकते हैं। न्यायालय की इस पहल का स्वागत किया जाना चाहिए, जिससे भविष्य में और अधिक न्यायिक प्रक्रियाओं को सही दिशा में बढ़ने में मदद मिलेगी।

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उत्तर प्रदेश

Allahabad High Court में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचन को दी गई चुनौती: राजनीति, ओडीआई और सामाजिक प्रभाव की चर्चा

Allahabad High Court यह मामला केवल वाराणसी या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय राजनीति के व्यापक संदर्भ में इसे देखा जाना चाहिए। यदि अदालत विजय नंदन की याचिका को मान लेती है, तो इससे न केवल वाराणसी बल्कि पूरे देश की राजनीति में एक नया मोड़ आ सकता है।

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उत्तर प्रदेश

Prayagraj-इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश-झूठे शादी के वायदे पर बलात्कार का केस चलेगा

Prayagraj इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस आदेश ने यह साफ कर दिया है कि विवाह का झूठा वादा कानूनी संरक्षण का आधार नहीं हो सकता। यह आदेश न केवल संबंधित मामले में न्याय की प्रक्रिया को साफ करता है, बल्कि समाज में ऐसे मामलों के प्रति कानूनी दृष्टिकोण को भी स्पष्ट करता है। इस प्रकार के मामलों में न्याय के प्रति गंभीरता और संवेदनशीलता आवश्यक है

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उत्तर प्रदेश

पूर्व विधायक Udaybhan Karwariya की रिहाई पर हाईकोर्ट ने UP सरकार से मांगा जवाब तलब

विजमा ने पति जवाहर यादव उर्फ जवाहर पंडित समेत चार लोगों की सरेराह हत्या के दोषी पाए गए Udaybhan Karwariya को राज्यपाल की ओर से समय पूर्व रिहाई के दिए गए आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। 13 अगस्त 1996 को सिविल लाइंस में सरेराह सपा के पूर्व विधायक जवाहर यादव उर्फ जवाहर पंडित और उनके तीन साथियों पर एके 47 से गोलियां बरसा कर निर्मम हत्या की गई थी।

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उत्तर प्रदेश

सरकारी वकीलों की तैनाती पर Allahabad High Court की सख्ती: न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग

Allahabad High Court लखनऊ पीठ का यह आदेश न केवल न्यायिक व्यवस्था की पारदर्शिता की मांग को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि न्यायपालिका अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उत्तर प्रदेश सरकार को इस आदेश को गंभीरता से लेते हुए कानूनी प्रक्रिया में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

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उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में मुसलमानों या ईसाइयों द्वारा कहीं भी धर्मांतरण कराने का कोई कार्य नहीं- Maulana Shahabuddin Razvi Bareilvi

Maulana Shahabuddin Razvi Bareilvi ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पहले से ही धर्मांतरण का कानून बना हुआ है। उसमें सख्त से सख्त धाराएं हैं, अगर कोई व्यक्ति उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण कराएगा तो इस कानून के तहत जेल की सलाखों में चला जायेगा। मौलाना ने आगे कहा कि संविधान में स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन की इजाजत दी है, मगर धर्म परिवर्तन कराने के लिए डराना, धमकाना या लालच देना संविधान के खिलाफ है। इस्लाम भी इसी बात की शिक्षा देता है।

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उत्तर प्रदेश

शाइन सिटी के डायरेक्टर राशिद नसीम पर करोड़ों रुपये ठगने का आरोप, रिपोर्ट मांगी Allahabad High Court ने

Allahabad High Court ने निर्देश दिया कि मामले के आरोपियों की ओर से किसी तीसरे पक्ष को कोई और बिक्री विलेख निष्पादित नहीं किया जाएगा, जिससे समाज में विश्वासघात का सामना करना पड़े। साथ ही कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी अधिकारी यह ध्यान रखें कि इस मामले में शामिल कोई भी व्यक्ति देश छोड़कर न जा पाए, जिससे सामाजिक संरक्षण का संकेत मिलता है।

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